समय बीत रहा, पेपर ट्रेल मशीनों के लिए पैसे दे सरकार: चुनाव आयोग

नई दिल्ली/नगर संवाददाताः मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी ने ‘मौजूदा माहौल′ का हवाला देते हुए सरकार से आग्रह किया है कि वह पेपर ट्रेल मशीनों की समयबद्ध खरीद के लिए तत्काल धन जारी करे, ताकि 2019 के लोकसभा चुनाव में उन मशीनों को उपयोग में लाया जा सके। कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद को लिखे ताजा पत्र में जैदी ने यह भी कहा कि अवमानना याचिका की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आयोग को वह समय सीमा बताने का निर्देश दिया है, जिसके भीतर वीवीपीएटी (वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल) की पूरी प्रणाली अमल में लाई जाएगी। मुख्य चुनाव आयुक्त ने हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया है कि ‘मौजूदा माहौल′ से उनका क्या तात्पर्य है, लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि वह विपक्ष की ओर से ईवीएम की विश्वसनीयता पर उठाए जा रहे संदेहों का हवाला दे रहे थे। मालूम हो कि बसपा, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने ‘गड़बड़ी’ वाली ईवीएम को लेकर चुनाव आयोग पर निशाना साधा है। देश के 16 दलों ने हाल ही में अधिक पारदर्शिता लाने के लिए मतपत्र वाली व्यवस्था फिर शुरू करने का आग्रह किया था। अपने पत्र में जैदी ने यह याद दिलाया है कि वह पहले ही सरकार को सूचित कर चुके हैं कि वीवीपीएटी की आपूर्ति के लिए ऑर्डर फरवरी, 2017 तक नहीं दिया गया तो अगले आम चुनाव की जरूरतों को पूरा करने के वास्ते निर्माताओं के लिए सितंबर, 2018 तक वीवीपीएटी की आपूर्ति करना मुश्किल होगा। चुनाव आयोग को 2019 के लोकसभा चुनाव में सभी मतदान केद्रों को कवर करने के लिए 16 लाख से अधिक पेपर ट्रेल मशीनों की जरूरत होगी। इस पर 3,174 करोड़ रूपये की लागत का अनुमान है। बीते 22 मार्च को कानून मंत्री को लिखे पत्र में जैदी ने कहा कि आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि जरूरी संख्या में वीवीपीएटी बनाने के लिए धन जारी किए जाने से 30 महीने के भीतर उसका निर्माण किया जा सकता है। इन मशीनों का निर्माण भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लि. तथा इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया करती है। उल्लेखनीय है कि जून 2014 से आयोग धन आवंटन के लिए सरकार को कम से कम 11 बार रिमाइंडर दे चुका है। पिछले साल जैदी ने इस मामले में प्रधानमंत्री को भी पत्र लिखकर उनका ध्यान आकृष्ट किया था। इसी साल 7 अप्रैल को विधि राज्यमंत्री पीपी चौधरी ने राज्यसभा को बताया था कि सरकार वीवीपीएटी खरीदने के लिए चुनाव आयोग के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। विधि मंत्रालय ही चुनाव आयोग के लिए नोडल इकाई है और वही उसकी आर्थिक मांगों तथा नियम-कानूनों में बदलाव के प्रस्तावों पर विचार करता है। वहीं वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने रविवार को आरोप लगाया कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) को इस्तेमाल में लाए जाने से पहले ही उससे छेड़छाड़ की जा सकती है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि चुनाव आयोग आपत्तियों को ईवीएम हैंकिंग तक सीमित कर रहा है। उसे सर्वर से राइटिंग (लिखने) के स्टेज में ही सॉफ्टवेयर से छेड़छाड़ की जांच की अनुमति देनी चाहिए। मतलब यह कि ईवीएम में पहले ही छेड़छाड़ हो सकती है, इसलिए हैकिंग की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक ऐसा रास्ता निकाले जिससे कि राजनीतिक पार्टियां ईवीएम सॉफ्टवेयर के कोडिंग के समय ही पर्यवेक्षण कर सकें, जैसा कि उन्हें बाद में करने की अनुमति होती है।

 

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