श्री मल्लीनाथ मेले में दिखी संस्कृति की झलक

बाड़मेर, राजस्थान/भैराराम पोटलियाः किसी देश की वास्तविकता धरोहर उस देश की संस्कृति होती है। भारत जैसे देश में यदि सांझी संस्कृति की झलक देखनी हो तो किसी मेले की तरफ रूख करना पडेगा। ऐसी ही झलक पश्चिम राजस्थान में लूणी नदी के किनारे पर भरे जाने वाले प्रसिद्ध प्राचीन श्री मल्लीनाथ पशु-मेला तिलवाड़ा में देखने को मिलती है। जिसका विधिवत आगाज ध्वजारोहण के साथ हुआ है। इस मेले में राजस्थान सहित मध्य प्रदेश, पंजाब, गुजरात, हरियाणा आदि राज्यों से हजारों की संख्या में पशु-पालन, पशु-व्यापारी भाग लेते है। सिर पर अपने-अपने अंदाज में बंधी पगडिया व साफे, लंबी-लंबी व बाकेदार ूमंदे, अंगरखी व कूर्ते के पहनावे से स्वतः ही पशु-पालन के क्षेत्र का पता चल जाता है। इस प्रकार के मेलों से एक-दूसरे की संस्कृति, सभ्यता को समझने देखने का अवसर मिलता है।

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