दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र के लिए बनेगी एक नीति

नई दिल्ली/नगर संवाददाताः दिल्ली-एनसीआर में जल्दी ही एकसमान नीति से प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र जारी किए जाएंगे। पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) ने दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से इस बाबत ऑडिट रिपोर्ट मंगवा ली है। औचक निरीक्षण के लिए छह टीमें भी गठित कर दी गई हैं। डेढ़ महीने में नई नीति तैयार कर ली जाएगी। दिल्ली एनसीआर में लगातार बढ़ रहे वायु प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट ने गत सप्ताह सख्त रवैया अख्तियार करते हुए दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के साथ साथ केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को कड़ी फटकार लगाई थी। साथ ही इस दिशा में एक समग्र योजना तैयार करने का निर्देश भी दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने सीपीसीबी को एन्वायरमेंट कम्पनशेटरी चार्ज की मद में एकत्रित राशि से 2.50 करोड़ रुपये निकालने की इजाजत भी दे दी है। कोर्ट ने सीपीसीबी से कहा है कि यह राशि वह दिल्ली एनसीआर में रियल टाइम मॉनिट¨रग स्टेशन बनाने के लिए उपकरण खरीदने पर खर्च करेगा। कोर्ट ने ईपीसीए को भी पीयूसी (प्रदूषण जांच केंद्रों) की जांच करने के लिए निर्देश दिया है। पीयूसी में चल रही धांधली पर एनसीआर के चारों सदस्य राज्यों से रिपोर्ट तलब कर ली गई है। इस रिपोर्ट के आधार पर आकलन किया जाएगा कि हर रोज और हर माह कितने प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र जारी किए जा रहे हैं, यह प्रमाणपत्र जारी करते हुए प्रक्रिया क्या अपनाई जाती है और क्या किसी को प्रमाणपत्र देने से इन्कार भी किया जाता है या नहीं। इसकी क्रॉस चेकिंग और रियलिटी चेक के लिए ईपीसीए की टीमें चारों राज्यों के कुछ सेंटरों के नमूने लेंगी। इन टीमों में तकनीकी और प्रशासनिक दोनों ही लोग शामिल रहेंगे। ईपीसीए के अध्यक्ष डॉ. भूरेलाल ने बताया कि सभी राज्यों से सप्ताह भर में सेंटरों की ऑडिट और जांच रिपोर्ट आ जाएगी। दोनों रिपोर्टो के आधार पर एक्सपर्ट टीम एनसीआर के लिए एक समान नीति के मानक तय करेगी।

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