सबका साथ, सबका विकास सरकार का लक्ष्यः राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी

सबका साथ, सबका विकास सरकार का लक्ष्यः राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी

नई दिल्ली/नगर संवाददाताः राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के अभिभाषण के साथ मंगलवार को संसद का बजट सत्र शुरु हो गया। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सत्र की शुरुआत से पहले दोनों सदनों को संयुक्त रूप से संबोधित किया। उन्होंने अपने अभिभाषण में कहा कि यह एक ऐतिहासक सत्र है क्योंकि स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार आम बजट और रेल बजट एक साथ पेश किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सबका साथ, सबका विकास सरकार का लक्ष्य है। सभी सरकारी नीतियों के मूल में गरीब, पीड़ित, दलित, वंचित, की भलाई है। पीएम उज्ज्वला योजना से स्वच्छ इधन मिलेगा। उज्ज्वला योजना से लाभ पाने वालों में 37 प्रतिशत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के हैं। 2.2 करोड़ लोगों ने गैस सब्सिडी छोड़ दी। इससे गरीबों का विकास होगा। राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि कालेधन के खिलाफ लोगों का सहयोग सराहनीय है। रियो आेलंपिक में मिली सफलता हमारे देश की महिलाओं की ताकत को दर्शाता है। मातृत्व अवकास 12 हफ्ते से 26 हफ्ते किया गया। इंद्रधनुष योजना के अंतर्गत बच्चों को बीमारियों से बचाने के लिए टीके लगाए जा रहे हैं। दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के अंतर्गत 11000 से भी ज्यादा गांवों में बिजली पहुंचाई गई। पीएम फसल बीमा से किसानों को लाभ पहुंचा है। खरीफ की फसल में 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। मुद्रा योजना के जरिए लोगों को लोन मिले। 26 करोड़ जनधन अकाउंट खोले गए। एक लाख बैंक मित्रों की नियुक्ति की गई। गरीबों के लिए पीएम आवास योजना चलाई। 13 करोड़ गरीब सामाजिक सुरक्षा योजना से जुड़े। राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि देशभर में 3 करोड़ शौचालय का निर्माण किया गया। दिव्यांगो के लिए आरक्षण बढ़ाकर 4 फीसद किया गया। 6 लाख दिव्यांगों को नौकरी देने का सरकार का लक्ष्य है। इससे पहले सत्र में शामिल होने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी संसद पहुंचे। इस दौरान पीएम ने कहा कि बजट सत्र में सार्थक चर्चा होनी चाहिए।बजट पर सभी दलों से बात हुई है। आज से नई परंपरा का प्रारंभ हो रहा है। पहली बार आम बजट के साथ रेल बजट भी जोड़ा गया है। इससे पहले सोमवार को बजट सत्र के दौरान संसद को चलाने में सभी दलों से सहयोग मांगते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि संसद एक ‘महापंचायत’ है और चुनाव के समय में मतभेद उभरने के बावजूद इसे सुचारू रूप से काम करना चाहिए। सरकार ने मंगलवार से शुरू हो रहे बजट सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। इसके पहले राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सरकार को बजट सत्र पहले नहीं बुलाना चाहिए था। उन्होंने याद दिलाया कि 2012 में ऐसी ही स्थिति में विधानसभा चुनावों के कारण संप्रग सरकार ने बजट सत्र आगे बढ़ा दिया था। उन्होंने बजट सत्र के दूसरे हिस्से से पहले भी सर्वदलीय बैठक बुलाए जाने की मांग की। कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया तथा माकपा नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि सत्र के पहले हिस्से में नोटबंदी पर भी चर्चा होनी चाहिए। येचुरी ने एक फरवरी को बजट पेश किए जाने को ‘अवैज्ञानिक’ बताते हुए कहा कि इसमें तीसरे तिमाही के सांख्यिकीय अांकड़ों पर विचार नहीं हो पाएगा, क्योंकि यह अांकड़ा मध्य फरवरी तक ही आ पाता है। इस बीच नोटबंदी पर अपना विरोध कायम रखते हुए तृणमूल कांग्रेस ने बजट सत्र के पहले दो दिन का बहिष्कार करने का एलान किया है। इन दो दिनों में राष्ट्रपति का अभिभाषण होगा और बजट पेश किया जाएगा। लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के मुख्य सचेतक कल्याण बनर्जी ने कोलकाता में बताया- ‘नोटबंदी के विरोध में तृणमूल कांग्रेस के सांसद बजट सत्र के पहले दो दिन संसद में मौजूद नहीं रहेंगे।’

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