हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया चप्पल और सैंडल में अंतर

नई दिल्ली/नगर संवाददाताः आज तक आप बैक स्ट्रैप वाली फुटवियर को सैंडल समझते थे तो आप अब तक गलतफहमी में जी रहे थे। जी हां दिल्ली हाईकोर्ट में एक ऐसा मामला सामने जिसके बाद कोर्ट को चप्पल और सैंडल में फर्क बताना पड़ा। कोर्ट ने बताया कि बैक स्ट्रैप वाली फुटवियर चप्पल है सैंडल नहीं जबकि जिसे आप अब तक चप्पल समझते थे वो सैंडल है। हाइकोर्ट को ये अंतर दोनों उत्पादों पर लगने वाले निर्यात शुल्क को लेकर स्पष्ट करना पड़ा। दरअसल चप्पल और सैंडल के बीच लगने वाले निर्यात शुल्क में मिलने वाली छूट में दोगुना अंतर है। एक ओर सैंडल के निर्यात पर जहां 10 फीसद तो वहीं चप्पल के निर्यात पर 5 फीसदी रिबेट मिलती है। चेन्नई की एक कंपनी द्वारा दायर की गई थी जिसमें कंपनी ने कहा था कि वह सैंडल बनाती है और उसे सैंडल पर मिलने वाली 10 प्रतिशत छूट की हकदार है जबति उसे सरकार द्वारा 5 प्रतिशत छूट दी गई। इस मामले पर न्यायमूर्ति एस. रविंद्र भट्ट और नजमी वजीरी की खंडपीठ ने निर्णय देते हुए ये स्पष्ट किया है कि जिस महिला फुटवियर के पीछे स्ट्रैप (फीता) नहीं लगा हो उसे सैंडल कहते हैं, न कि चप्पल। महिलाओं की फुटवियर बिना स्ट्रैप के बन ही नहीं सकते इसलिए उसे चप्पल की श्रेणी में ही रखा जाएगा। कंपनी द्वारा 2003 में दायर याचिका पर फैसला सुनाते हुए हाइकोर्ट ने कहा कि इस तरह कंपनी को निर्यात शुल्क के हिसाब से 5 प्रतिशत ही छूट मिलेगी।

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