डकैती की रकम में हेराफेरी के 18 साल बाद आईजी राजकुमार देवांगन को सरकार ने भेजा घर

रायपुर, छत्तीसगढ़/मयूर जैनः भारतीय पुलिस सेवा के वरिष्ठ अधिकारी राजकुमार देवांगन को अनिवार्य सेवानिवृति देकर घर भेज दिया है। वे डकैती के करीब 18 साल पुराने मामले की रकम हेराफेरा करने को लेकर विवादों में थे। इसमें वे निलम्बित भी हुए थे। केन्द्र सरकार ने आईजी रैंक के अधिकारी देवांगन को गंभीर आरोपों को देखते हुए सेवा के लिए अनुपयुक्त माना। इस आदेश की अनुपालना में राज्य सरकार ने उन्हें अनिवार्य सेवानिवृति की औपचारिकता पूरी। उन्हें तीन महीने का वेतन और भत्ते दिए जाएंगे। 1992 बैच के अधिकारी देवांगन ने हाल ही में पदोन्नति पर विचार के लिए कैबिनेट में अपील की थी। लेकिन, इसे राज्य मंत्रिमंडल ने नामंजूर कर दिया था। महिला कांस्टेबल को रात में बुलाने के आरोपों से घिरे एक अन्य आईजी पवनदेव को एडीजी के रूप में पदोन्नति दे दी गई थी। उनकी अपील को कैबिनेट ने स्वीकार कर लिया था। पवनदेव को उनके खिलाफ आरोपों में क्लीनचिट मिल चुकी है। गृह विभाग के अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि आईजी राजकुमार देवांगन पर 1998 में जांजगीर जिले के बाराद्वार में हुई 65 लाख रुपए की डकैती की रकम में हेराफेरी करने का आरोप था। तात्कालीन थानेदार नरेन्द्र मिश्रा के घर से डकैती की रकम बरामद की गई थी। उस समय राजकुमार देवांगन एसपी जांजगीर थे। उन पर भी गंभीर आरोप लगे थे। इस मामले में उन्हें निलंबित भी किया गया था। विभाग की ओर से उन्हें नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था।

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