बॉलीवुड़ की मशहूर गायिका अनुराधा पौडवाल को कोल्हापुर के डीवाई पाटिल यूनिवर्सिटी ने डॉक्टरेट की डिग्री से सम्मानित

कोल्हापुर, महाराष्ट्र/संगप्पाः गायिका अनुराधा पौडवाल को संस्कृत के श्लोक का प्रचार-प्रसार करने में सराहनीय योगदान के लिए उन्हें डी. वाय. पाटिल यूनिवर्सिटी के पांचवे दीक्षांत समारोह में ‘डी. लिट’ की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। दीक्षांत समारोह में अनुराधा के साथ उनका पूरा परिवार मौजूद था। ‘हीरो’, ‘राम-लखन’, ‘तेजाब’, ‘आशिकी’, ‘जंग’, ‘दिल′, ‘दिल है कि मानता नहीं’, ‘साजन’, ‘बेटा’ जैसी तमाम सुपरहिट फिल्मों के गीत गाने वाली अनुराधा पौडवाल को जितनी प्रसिद्धि से भी मिला है। इस सम्मान के बाद अनुराधा ने कहा, ‘यह गौरवशाली पल मैं आपके साथ बांट रही हूं। आज का सम्मान भावनाओं से परिपूर्ण है और यह क्षण इसलिए भी खास है क्योंकि आज मेरा परिवार भी मेरे साथ है जिन्होंने मेरा साथ दिया और मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। कर्मयोगी वह होता है जो बिना किसी की सहायता के भी काम करता है। अपने जीवन के सर्वाधिक चुनौतीपूर्ण समयों में मेरे सबसे ज्यादा हिट गीत आए। जब मुझे म्यूजिकल हिट्स के लिए लगातार फिल्म फेयर पुरुस्कार मिल रहें थे तब मैंने फिल्म संगीत को छोड़ने का निर्णय लिया और अंत में मुझे यह सम्मान तब मिला जब मै अपने संगीत करियर के शिखर पर नहीं हूं। मेरी जीवनयात्रा में सेवाभाव का ही सबसे ज्यादा योगदान रहा है, बतौर एक बेटी, एक पत्नी, एक मां, एक बहन होने के नाते मुझे अपने परिवार की सेवा से सबसे ज्यादा संतुष्टि मिली है।’ बॉलीवुड़ की मशहूर गायिका अनुराधा पौडवाल ने कहा कि टेक्नोलॉजी, इंटरनेट की दुनिया ने संगीत में बड़ा बदलाव किया है। नए गायक तेज व पाश्चात्य माहौल से ज्यादा प्रभावित हैं। इसलिए गीत भी तड़क भड़क वाले ही आ रहे हैं और श्रोताओं को जो सुनने को मिलेगा वहीं पसंद भी करेंगे। हिन्दुस्तानी फिल्मों का आधार ही संगीत रहा है। यह हमारी फिल्मों की संस्कृति भी है। कुछ दिनों बाद इससे भी लोग ऊब जाएंगे तो शास्त्रीय व सुर मधु़र संगीत का दौर एक बार फिर आएगा।

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