विद्या वही जो बंधनों से मुक्त करेः साध्वी अदिति भारती

विद्या वही जो बंधनों से मुक्त करेः साध्वी अदिति भारती

नई दिल्ली/अरविंद कुमार यादवः शास्त्रों में दो प्रकार की विद्या का वर्णन आता है परा विद्या और अपरा विद्या, माता सरस्वती इन दोनों ही विद्याओं की प्रदायिणी है। परन्तु इस संसार की विद्या अपरा विद्या को शास्त्रों में अविद्या और परा विद्या ब्रह्म ज्ञान को कहा गया है क्योंकि ब्रह्मज्ञान ही मानव को उसके कर्म बंधनों से मुक्त कर श्रेष्ठ पथ पर अग्रसर करता है। कथा व्यास साध्वी अदिति भारती जी ने दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्रीमद देवी भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के पांचवे दिन श्रद्धालुओं को देवी माँ के ब्रह्मज्ञान प्रदायिणी महासरस्वती के लीला प्रसंग को श्रवण करवाया। साध्वी जी ने बताया कि माँ सतगुरु रूप धारण कर अपनी संतानों को आवागमन के चक्र से मुक्त करने के लिए ब्रह्मज्ञान प्रदान करती है और जीवन की उत्कर्ष यात्रा पर उन्हें प्रशस्त करती हैं। स्वामी विवेकानंद और रामकृष्ण परमहंस, द्रौपदी और भगवान श्रीकृष्ण, योगानंद परमहंस और युक्तेश्वर गिरी आदि गुरु- शिष्य जोड़ियों का उदाहरण देते हुए कथा व्यास ने बताया की इस संसार में गुरु- शिष्य का सम्बन्ध ही सर्व श्रेष्ठ सम्बन्ध है। माँ सरस्वती की शिष्या लीला की जीवन गाथा का वर्णन करते हुए साध्वी जी ने ध्यान और समाधी के विज्ञान को भी ग्रंथों और एतिहासिक केस-स्टडीज़ के माध्यम से श्रद्धालुओं के समक्ष रखा। उन्होंने बताया कि समाधी भारत वर्ष का सनातन पुरातन विज्ञान है जिसे अध्यात्म से दूर होने के कारण आज का मानव भूल गया है। विद्या की प्रदायनी माँ सरस्वती की कृपाओं से श्रद्धालुओं को अवगत कराते हुए कथा व्यास जी ने शिक्षा क्षेत्र का रुख करते हुए कहा कि भारत की प्राचीन शिक्षा पद्दति मानव को उसके कर्तव्यों का बोध कराती थी जिससे वह सबका सम्मान करना व अपनी कला को देश सेवा के लिए प्रयोग करना सीखता था, पर अधिकारों पर आधारित आज की शिक्षा मानव को विद्वत्ता तो दे रही है पर उसके भीतर मानवीय के गुणों का संचार करने में सफल नहीं हो रही। विद्या की प्रदायनी माँ सरस्वती अब ब्रह्मज्ञान का आधार प्रदान कर शिक्षा को भी सम्पूर्ण शिक्षा में बदलने का सन्देश दे रही है। साध्वी जी ने संस्थान द्वारा अभावग्रस्त वर्गों और क्षेत्रों से आने वाले बच्चों के लिए चलाये जा रहे सम्पूर्ण शिक्षा प्रकल्प मंथन को शिक्षा क्षेत्र में एक उदहारण की तरह रखा जो बाहरी स्किल्स के साथ साथ बच्चों में मानवीय मूल्यों का भी उदय कर रहा है।

Share This Post

Post Comment