जहाँ नारी का सम्मान, वहां देवताओं का वास- साध्वी अदिति भारती

नई दिल्ली/अरविंद कुमार यादवः दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा रामलीला मैदान, पीतमपुरा में 23 से 29 दिसम्बर तक देवी भागवत कथा का भव्य आयोजन किया जा रहा है। सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या कथा व्यास साध्वी अदिति भारती जी ने कथा के तीसरे दिवस की कथा बांचते हुए महिषासुर वध की गाथा का मार्मिक वर्णन किया जिसे श्रवण कर दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों से आए हुए श्रद्धालु स्तब्द रह गए। साध्वी जी ने मानव समाज पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यह कैसी दुर्गा पूजा और विजय दशमी हम मनाते हैं जब हमारे समाज मे हिंसा और पाप पनप रहा है। माँ ने महिशासुर का वध कर धर्म की स्थापना की थी पर आज तो हम धर्म के नाम पर ही लड़ रहे हैं। धर्म बातें नहीं, पंथ नही, शास्त्रों का पठन पठान नहीं अपितु धर्म उस आदि शक्ति का साक्षात्कार है।

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एक सतगुरु ब्रह्मज्ञान प्रदान कर शक्ति स्वरूपा भगवती का प्रकटीकरण मानव के भीतर कराते है। महिषासुर के चरित्र का वर्णन करते हुए साध्वी जी ने बताया कि यह महिषासुर एक पौराणिक पात्र नहीं अपितु आज समाज मे बढती हिंसा, बढते बलात्कार, देह व्यापार, बढती अश्लीलता और पथभ्रष्ट होते युवा इस सब का मूल कारण मानव अंतस्त मे जोर पकड़ते काम वासना से विक्षिप्त हुए महिषासुर रुपी मन ही है। माँ का महिषमर्दनी स्वरुप इन सब महिषासुरों के लिए चुनौती है। उन्होंने बताया की जब जब काम से पीढित मनुष्य नारी का तिरस्कार करता है, उसे वस्तु के रूप में देखता है, तब तब समाज असंतुलित हो जाता है। बढ़ते महिला उत्पीडन के मामलों की ओर इंगित करते हुए साध्वी जी ने कहा, गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी का कथन है कि यदि समाज को संतुलित करना है, तो आज नारी को अपने वास्तविक शक्ति स्वरुप के प्रति जागृत होना होगा और साथ ही समाज को भी उसकी ओजस्विता को समझना होगा। साध्वी जी ने बताया की श्री आशुतोष महाराज जी के नेतृत्व मे दिव्य ज्योति जागृति संस्थान अपने लिंग समानता कार्यक्रम- संतुलन के माध्यम से नारियों को सशक्त, समाज को नारी के अस्तित्व के प्रति जागृत और कन्या भ्रूण हत्या नामक कुरीति को जड़ से उखाड फेंकने के लिए निरंतर कार्यरत है। समाज में बेटियों के प्रति छोटी मानसिकता को खत्म किया जा रहा है। साध्वी जी ने बेटी बोझ नही है, नारी तूं है शक्ति का प्रण व जयघोष भी करवाया।

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