गुरु बिना भगवान तक पहुँचना असंभवः साध्वी अदिति भारती जी

नई दिल्ली/अरविंद कुमार यादवः दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा रामलीला मैदान, पीतमपुरा में 23 से 29 दिसम्बर तक देवी भागवत कथा का भव्य आयोजन किया जा रहा है। सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या कथा व्यास साध्वी अदिति भारती जी ने कथा के दूसरे दिवस में माँ भगवती के दिव्य लीला चरित्रा के माध्यम से ब्रह्माण्ड उत्पत्ति के जटिल रहस्य का उद्घाटन किया। जिसमें देवी महात्मय प्रसंग रखते हुए सुदर्शन और शशिकला की गाथा का भी सरसवर्णन किया और साथ ही साथ देश के युवाओं को श्रेय पथ का चयन कर सुदर्शन जैसे महान व्यक्तित्व को प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित भी किया। माँ के चरण नख में ब्रह्माण्ड दर्शन की लीला का विश्लेषण करते हुए साध्वीजी ने बताया कि जिस सृष्टि के आधर की खोज विज्ञान अपने प्रारंभिक काल से कर रहा है परन्तु किसी निर्णयात्मक उत्तर तक नहीं पहुँचा है, माँ अपनी इस लीला से स्पष्ट करती हैं कि सृष्टि का आधर मैं ही हूँ। सृष्टि की आधर भूत कण-कण में व्याप्त भगवती का दर्शन स्थूल नेत्रों से नहीं होता परन्तु एक सत्गुरु दिव्य दृष्टि प्रदान कर कण-कण में व्याप्त उस ईश्वर के दर्शन मानव के घट के भीतर करवाते हैं। साध्वी जी ने कहा सर्व श्री आशुतोष महाराज जी कहते हैं कि प्रश्न यह नहीं है कि ईश्वर है या नहीं है। प्रश्न तो यह है कि हमारे पास दिव्य दृष्टि है या नहीं है? देवी महात्मय में अयोध्या के दो राजकुमारों सुदर्शन और शत्रुजीत की जीवन लीला में यह वर्णन आता है कि जीवन में दो मार्ग हुआ करते हैं। एक श्रेय मार्ग और दूसरा प्रेय मार्ग। प्रिय लगने वाले प्रेय मार्ग का चयन कर पहले तो आनंद मिलता है परन्तु जीवन शत्रुजीत, दुर्याध्न, रावण जैसे पतन की गर्त में डूब जाता है। वहीं जो श्रेष्ठ मार्ग का चयन करते हैं वह स्वामी विवेकानंद, परमहंस योगानंद, शिवाजी, मीरा बाई जैसे महान व्यक्तित्व को प्राप्त करते हैं। और समाज के लिए भी कल्याण कारी होते हैं। सुदर्शन के आदर्श जीवन की मिसाल देते हुए साध्वीजी ने आज के युवाओं को स्वयं के उस शक्ति स्वरूप जीवन को नशे, दुर्बलता, तनाव, इन्पिफरिओरटी काम्प्लेक्स की कारागर को तोड़ महान व्यक्तित्व को प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया।

Share This Post

Post Comment