बालकिया धोरा मुक्ति आंदोलन ने पकड़ा जोर, साधू-संतों ने कलक्टरी में डाला बेमियादी डेरा

बालकिया धोरा मुक्ति आंदोलन ने पकड़ा जोर, साधू-संतों ने कलक्टरी में डाला बेमियादी डेरा

बीकानेर, राजस्थान/नेमीचंदः अयोध्या से आए संत परमेश्वरदास-सीताराम बाबा, भाजपा के बृजमोहन सिंह भाटी, मोहित बोथरा, मगन महाराज, विक्की गहलोत, सांगीलाल गहलोत व वेद व्यास के नेतृत्व में मंगलवार को शासन-प्रशासन के रूढिवादी रवैये पर नाराजगी जताते हुए रैली निकालकर कलक्टरी पहुंचकर धरना दिया। यह रैली हमलों की बारी स्थित सीताराम मंदिर से निकलकर शहर के मुख्य बाजारों में से होते हुए कलक्टरी पहुंची। इसमें प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए रोष जताया। संत परमेश्वरदास-सीताराम बाबा के नेतृत्व में दिये जा रहे धरने में उन्होंने बताया कि राम राज्य की स्थापना करने की बात करने वाली सरकार के शासन में साधू-सन्तों को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जोड़बीड़ क्षेत्र स्थित बालकिया धोरा मंदिर में साधना करने वाले साधू-संतों के अनुसार वन विभाग के अधिकारी उन्हें उक्त भूमि से बेदखल करने की कोशिश कर रहे हैं। मंदिर में वर्षों से साधू-संत तपस्या कर रहे हैं। वहीं आस-पास गांवों के लोग यहां रोजाना पूजा करने आते हैं। मंदिर परिसर में पुराने तालाब और कुण्ड भी हैं। लगातार यहां पशु-पक्षी विचरण करने आते हैं। जिन्हें पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए साधू-संतों ने धोरा भूमि क्षेत्र में ट्यूब वैल खुदवाना चाहा था। लेकिन सरकारी महकमों के अधिकारियों ने कार्य रुकवा दिया। इतना ही नहीं जब साधू-संतों ने भक्तों के सहयोग से निरीह पशु-पक्षियों के लिए टैंकर से पानी मंगवाया तो सरकारी नुमाइन्दों ने वो भी रूकवा दिए। इस पर नाराजगी जताते हुए धरनार्थियों ने बताया कि उनके पास वन विभाग का अनापत्ति प्रमाण पत्र है और छह जनवरी-2000 को तत्कालीन कलक्टर की ओर से शासन सचिव-वन विभाग को लिखा गए पत्र की प्रतिलिपि भी है। जिसमें इस भूमि के वन विभाग के क्षेत्र से मुक्त करने पर कलक्टर कार्यालय को कोई आपत्ति नहीं बताई गई।

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