अगले 6 महीने में बिहार की राजनीति में हो सकेंगे बड़े बदलाव

पटना, बिहार/अमित कुमारः बिहार में महागठबंधन की सरकार है। राजद, जदयू तथा कांग्रेस की मौजूदा सरकार का सबसे चौकानें वाला निर्णय जनता को पसंद आ रहा है, लेकिन करोड़पति से अरबपति बनने की ख्वाहिस रखने वाले विधायकों को यह नापसंद कर रहा है। वे वर्तमान सीएम नीतीश कुमार से इसलिए नाराज चल रहे है क्योंकि वे शराब के धंधे से ही राजनीति में आए है। शराब बंदी से उनका सारा कारोबार चौपट हो गया है। इसलिए उन्हें राजनीति का कोई स्वाद ही नहीं आ रहा है। वे अन्दर ही अन्दर गुल खिला रहे है। भले ही यह सुनने में अटपटा लग रहा हो, लेकिन राजनीति के अन्दर खाने की यह रिपोर्ट है कि राजद से जदयू किनारा करना चाहता है, सिर्फ इसलिए क्योंकि नीतीश कुमार को पूरी तरह से पता चल गया है राजद के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव सत्ता अपने हाथ में लेना चाहते है। वे अपने पुत्र तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री देखना चाहते है। जबकि सरकार की बागडोर एम वाई समीकरण पर आधारित करने की पहल भी तेज हो गयी है। शहाबुद्यीन की रिहाई के बाद जदयू को दो भागों में तोड़कर एक भाग का समर्थन हासिल करने की जुगाड़ की जाने की संभावना व आशंका है। हिना शहाब को उपमुख्यमंत्री की बागडोर मिल सकती है। हांलाकि अभी कोई भी इसकी पुष्टि नहीं कर रहा है, लेकिन अन्दर इसकी खिचड़ी पक रही है। लालू प्रसाद यादव इसकी भनक नहीं लगने देना चाहते है। राजद को छोड़कर जदयू का दामन थामने वाले तकरीबन 25 विधायक ऐसे है, जो आज भी लालू प्रसाद यादव के एहसान को मानते है। ऐसे में यदि जदयू के आधे विधायक राजद के साथ हो जाते है तो एक बार फिर वही कहावत दोहराई जायेगी जो समता पार्टी से टूटकर जदयू बनने या फिर जदयू एवं जदएस बनने के समय हुआ था। इधर नीतीश कुमार भी अपनी सुरक्षा के लिए भाजपा से नजदीकियां बढ़ा रहे है। ऐसे में यदि सरकार बनता है तो दो प्रकार की राजनीतिक स्थितियां बनेगी। एक जदयू अपनी सुरक्षा को लेकर व पार्टी को टूटने से बचाने के लिए बीजेपी का दामन थाम सकती है। ऐसे में जदयू के 71 व बीजेपी के 53 विधायक मिलकर कुल 124 का आंकड़ा पूरा हो सकता है। केन्द्र में बीजेपी को समर्थन दे रहीं हम के एक, रालोसपा के दो तथा लोजपा के दो विधायक का जदयू को समर्थन मिल सकता है। ऐसे में जदयू 129 तथा निर्दलीय 4 विधायक के सहारे 133 का आंकड़ा पूरा कर एक बार फिर बीजेपी के सहारे अपनी नैया को अगले पांच वर्षो के लिए चला सकते है। दूसरी ओर राजद तेजस्वी को सीएम बनाने के लिए स्वयं के 80, कांग्रेस के 27, सीपीआई के 3, निर्दलीय 4 के भरोसे 114 का आंकड़ा पूरा कर सकते है। जदयू को तोड़ पाने में सफल नहीं होने पर राजद को विपक्ष में बैठना पड़ सकता है। तीसरी स्थिति यह बन रहीं है कि शराब बंदी के बाद नीतीश का लोकप्रियता काफी बढ़ गयी है। इसलिए यदि राजद नीतीश से समर्थन् वापस लेती है तो नीतीश कुमार चुनाव करवाना ही चाहेंगे और स्वयं के बदौलत पश्चिम बंगाल की तरह कुर्सी पर आसीन होना चाहेंगे। तीन परिस्थितियों से बिहार तकरीबन छह माह के अन्दर गुजरने वाला है। इसकी पटकथा लिखी जा रही है। नीतीश सरकार चलाना चाहते है, लेकिन दखलअंदाजी बर्दाश्त नहीं करना चाहते है। अपना कद बढ़ाने के लिए बिहार में शराब बंदी के बाद अन्य प्रदेश में यही नारा देकर अपने कद को और भी बढ़ाते हुये मोदी के समान करने की जुगत में है, लेकिन राजद के कुछ विधायक की करतूत को लेकर बिहार की वर्तमान सरकार की छवि काफी धुमिल हो रहीं है। ऐसे में नीतीश चाहते है कि वे राजद के बदले भाजपा का साथ मिल जाए। इधर बिहार के भाजपाई भी सत्ता के बाहर रहने के बदले सरकार में आने की अकुलाहट में है। इस प्रकार की अटकले अभी महज अटकले ही लग रहीं है, लेकिन इन बिन्दुओं पर अब चर्चा होने लगी है। यदि ये परिस्थितियां नहीं बनती है तो सरकार का गिर रहा कद , पांच वर्ष पहले का बिहार एक बार फिर गर्त में जाने की ओर मुखर दिख रहा है। छटपटाहट सभी को है, कौई सरकार बनाना चाहता है, कोई कद, कोई शामिल होना चाहता है तो कोई नये चुनाव के सहारे अपने बल पर सत्ता में वापसी। अटकलें, आशंकाएं, खीचांतानी सभी चल रहीं है देखिए आगे आगे होता है क्या ?

 

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