भोपाल एम्स के नाराज छात्रों ने स्वास्थ्य मंत्री पर फेंकी स्याही

भोपाल, मध्यप्रदेश/नगर संवाददाताः केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा एम्स भोपाल में एमआरआई और सीटी स्कैन मशीन का उद्घाटन करने पहुंचे थे। इस दौरान एम्स के छात्र बेहतर सुविधाओं और फेकल्टी की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन करने लगे। इसी दौरान नाराज छात्रों के एक गुट ने नड्डा पर स्याही फेंक दी, जो उनके कुर्ते और गाड़ी पर गिरी। दरअसल केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के एम्स पहुंचते ही मेडिकल छात्रों ने विरोध शुरू कर दिया। छात्रों ने एम्स की इमारत के निर्माण में हो रही देरी और फैकल्टी समेत दूसरी सुविधाओं की कमी के चलते जमकर नारेबाजी की। इधर छात्र नारेबाजी कर रहे थे उधर नड्डा ने MRI और सीटी स्कैन मशीन का उद्घाटन कर रहे थे। इसके बाद जब वह बाहर आए तो छात्रों ने अपनी मांगों को ना सुने जाने से नाराज होकर उन पर स्याही फेंक दी। फेंकी गई स्‍याही नड्डा के कुर्ते पर गिरी। इसके बाद उन्‍हें तुरंत गाड़ी में बैठाया गया। और विरोध कर रहे छात्रों को पुलिस ने खदेड़ लिया जिसमे कुछ छात्रों को चोट आने की भी खबर है। जब नड्डा ने नाराज स्टूडेंट्स से कहा कि पहले जो भी हुआ हो, उन्हें नहीं मालूम, लेकिन अब वे सारी परेशानियों को शॉर्ट आउट कर रहे हैं। इस पर स्टूडेंट्स ने कहा कि यहां जो भी मंत्री आता है, वो सिर्फ वादा करके चला जाता है। जुलाई में केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते भी एम्स आए और वादा करके चले गए। उनके जाने के बाद ना ही कोई समस्या दूर की गई और ना ही वो दुबारा आए। नड्डा पर स्याही फेंके जाने पर वहां मौजूद लोगों ने तुरंत नड्डा के इर्द-गिर्द घेरा बनाया और उन्‍हें तुरंत गाड़ी में बैठाया। खबरों के अनुसार हंगामा बढ़ते देख ड्राइवर ने हड़बड़ी में गाड़ी आगे बढ़ा दी जो कि छात्राओं के पैर पर चढ़ गई। छात्राओं को अस्‍पताल ले जाया गया। वहीं नड्डा मौके से रवाना हो गए। मामले के बारे में एक छात्रा ने बताया कि हम उन्‍हें हमारी समस्‍याएं बताना चाहते थे लेकिन लेकिन उन्होने हमारी समस्याओं को जानने में दिलचस्पी नहीं दिखायी। एक छात्र ने ANI को बताया कि 13 सालों बाद भी AIIMS में कई सुविधाएं शुरू नहीं हुई हैं। कई डिपार्टमेंट काम करने की स्थिति में नही हैं। छात्रों नें पुलिस बल के प्रयोग पर भी नाराजगी जताते हुए कहा, हम अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं, लेकिन हमारी आवाज को जबरन दबाया जा रहा है। दरअसल, एम्स 13 साल से आश्वासनों पर ही चल रहा है। 13 सालों में चार केंद्रीय मंत्री एम्स का दौरा कर चुके हैं। लेकिन एम्स के हाथ आज भी खाली है।

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