जदयू नेता को शराब संग गिरफ्तार करने उत्पात अधिकारी हुआ गिरफ्तार

पटना, बिहार/शिवशंकर लालः नितीश सरकार की पूर्ण शराबबन्दी की लीला देखिये जदयू प्रखंड अध्यक्ष की दारु संग गिरफ्तार करने वाले उत्पाद अवर निरीक्षक को ही गिरफ्तार कर लिया गया है।  सूबे में 5 अप्रैल से जारी पूर्ण शराबबंदी का सच बड़ा ही भयानक है। साथ ही इस नए नियम का प्रयोग पक्ष और विपक्ष को देखकर किया जा रहा है। सुबे के मुखिया नितीश कुमार के गृह जिले नालन्दा में  30 अगस्त को हरनौत के जदयू प्रखंड अध्यक्ष सह मुखिया पति इंदरजीत सेन को168 बोतल देशी शराब के साथ उत्पाद विभाग ने उनके घर से गिरफ्तार किया था। लेकिन देखिये सत्ता का खेल मुखिया पति को धरने वाले उत्पाद विभाग के अवर निरीक्षक दीपक कुमार को हरनौत थाना ने  इन धाराओं के तहत 193 195 203 420 & 120 B IPC गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे धकेल दिया गया है। हद तो ये है कि उत्पाद एवं मद्य निषेध के प्रधान सचिव में पत्र लिख कर इस बात को स्पष्ट किया है कि जदयू प्रखंड अध्यक्ष को देशी शराब के संग पकड़ने वाले अवर निरीक्षक दीपक कुमार न केवल निर्दोष है बल्कि पूरी तरह कानून संगत कार्रवाही उन्होंने की है। सत्ता की हलक का असर देखिये गिरफ्तार प्रखण्ड अधीक्षक को गिरफ्तार करने वाले उत्पाद अधिकारी पर ही कार्रवाही हो गई है। साथ ही लोहरा के पुर्व मुखिया सुवेद्र सहित चार लोगों के खिलाफ साजिश का मामला दर्ज कर लिया गया है। साथ ही  उत्पाद विभाग के इंसपेक्टर दीपक कुमार पर जिला प्रशासन ने इंसपेक्टर का मोबाइल भी किया जब्त कर लिया गया है। इधर बिहार में शराबबंदी के मुद्दे पर राज्य की पुलिस और उत्पाद विभाग में सब कुछ सामान्य नहीं है।एक मामले में राज्य पुलिस ने उत्पाद विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों को थाने में 10 घंटे तक इस बात के लिए दबाव बनाने के लिए पूछताछ की कि उन्होंने किस सोर्स के आधार पर छापेमारी की। यही नहीं, इस मामले में अब उत्पाद निरीक्षक दीपक कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है।साथ ही लोहरा के पूर्व मुखिया रहे सुवेन्द्र कुमार को भी गिरफ्तार किया गया है। चुकी ये मुद्दा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह ज़िला नालन्दा का है साथ ही मुख्यमंत्री की पार्टी से जुड़ा है। उनकी ही पार्टी के एक ब्लॉक अध्यक्ष चंद्रजीत कुमार सेन के घर से 30 अगस्‍त को 167 शराब की बोतलें बरामद की गईं।लेकिन इस मामले में पुलिस आरोपियों को जेल भेजने की जगह उत्पाद विभाग के अधिकारियों से ही थाने में पूछताछ कर दबाब बनाने की कोशिश करती रही। लेकिन मामले ने उस समय तूल पकड़ लिया जब नालंदा के ज़िला अधिकारी सेन के गांव एसपी के साथ पहुंच गए और यहां तक कह डाला कि सेन को फंसाया गया है। लेकिन इस मामले में जब उत्पाद विभाग के वरीय अधिकारियों ने पुलिस को चेतावनी दी कि अगर सेन को बचाने के लिए उनके विभाग के अधिकारियों के ऊपर दबाव बनाया गया तो वो भविष्य में छापेमारी नहीं करेंगे, तब जाकर सेन को जेल भेजा गया। हालांकि उत्‍पाद निरीक्षक की गिरफ्तारी के बाद अब ये मामला कितना गर्माएगा, यह जानने के लिए फिलहाल इंतजार करना होगा। लेकिन ये तो तय हो गया है की मामले को लेकर सरकार के दो विभाग आमने सामने आ गए है। वही दूसरी तरफ इसको लेकर सियासत भी गर्म हो गई है। शनिवार को बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने नालंदा के डीएम और एसपी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।उन्होंने आरोप लगाया कि जिला के डीएम और एसपी कानून को ताक पर रखकर जिला में काम कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि दोनों जेडीयू के एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं इसलिए दोनों का यहां से तबादला होना चाहिए।मोदी ने इस पूरे मामले की जांच राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक से कराने की मांग की है। मोदी ने यह भी आरोप लगाया कि उत्पाद विभाग की रेडिंग टीम के नेतृत्वकर्ता इंस्पेक्टर दीपक कुमार को पुलिस ने हिरासत में लेकर करीब 9 घंटे तक उनसे पूछताछ की कि इन्फॉर्मर का नाम बताओ और उसे जबरन कागज पर यह लिखने को मजबूर किया कि पैसा देने के प्रलोभन पर छापेमारी कराई गई थी।

Share This Post

Post Comment