दो शब्द स्वतंत्रता दिवस पर

जोधपुर, राजस्थान/नरपत सिंह राजपुरोहितः आज क्यूँ देश भक्ति राष्ट्र के दो पर्वो में सिमट कर रही गयी हैं ? ऐसे तो कोई देश के लिए नही सोचता बस अगस्त और जनवरी में ही क्यूँ खून उबलता हैं | हम सभी को इस पर विचार करना चाहिए | आज स्वतंत्रता के लिए नहीं अपितु देश के भीतर आतंकवाद एवम भ्रष्ट्राचार के लिए लड़ना हैं और मुखोटा पहने अपनों के खिलाफ लड़ना हैं | यह लड़ाई और भी ज्यादा गंभीर हैं क्यूंकि इसमें कौन अपना हैं कौन पराया यह समझना मुश्किल हैं | आज की सदी में देश को देशभक्त की ज्यादा जरुरत हैं क्यूंकि आज दुश्मन अंग्रेज नहीं, नाही सीमा पर इतना खतरा हैं जितना भ्रष्ट्राचारियों से देश को हैं |आज सिपाही को नहीं आम नागरिक को देश की हिफाजत करनी हैं |

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