बारिश के मौसम में भी पानी के कमी से जूझ रहे है उत्तराखंड वासी

पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड/नगर संवाददाताः उत्तराखंड में आसमान से पानी बरस रहा है, लेकिन उत्तराखंडियों की प्यास नहीं बुझ पा रही है. जी हां बारिश के सीजन में ऊपर से तो पानी ही पानी है, लेकिन आम आदमी को पीने के लिए शुद्ध पानी नहीं मिल पा रहा है. सबसे पहले बात करते हैं जनपद पौड़ी की. यहां तीन विकास खंड़ों के ग्रामीणों को पेयजल किल्लत से निजात दिलाने वाली महत्वाकांक्षी भैरवगढ़ी पम्पिंग पेयजल योजना अधर में लटकी हुई है. अधिकारियों की हीलाहवाली और बजट की कमी के आम आदमी की प्यास पर भारी पड़ रही है. जनपद पौड़ी के जयहरीखाल, द्वारीखाल और दुगड्डा ब्लॉकों के ग्रामीणों की पेयजल किल्लत दूर करने के मकसद से बनाई जा रही भैरवगढ़ी पम्पिंग पेयजल योजना बजट की कमी और अधिकारियों की हिलाहवाली के चलते सालों से अधर में लटकी है. यह राज्य सेक्टर के अंतर्गत साल 2006 में स्वीकृत हुई. सतपुली के निकट नयार नदी से पानी को अपलिफ्ट करके 5 स्टेज में बनने वाली इस योजना से तीन ब्लाकों की 74 बस्तियों तक पीने का पानी पहुंचाया जाना था, लेकिन अफसोस एक दशक तो पूरा हुआ, लेकिन यह योजना नहीं. इस महत्वाकांक्षी योजना को लेकर समय पर पूरा करने के लिए समय-समय पर ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने धरना प्रदर्शन कर अपनी आवाज अधिकारियों तक न पहुंचाई हो, लेकिन सरकारी तंत्र की रफ्तार तो देखिए की जो काम 23 करोड़ में हो जाना चाहिए था वह आज 46 करोड़ में भी नहीं हो पा रहा है. दुगड्डा, जयहरीखाल, द्वारीखाल की सालों से पेयजल की समस्या से जूझ रही जनता को राहत दिलाने के मकसद से बनाई जा रही भैरवगढ़ी पम्पिंग पेयजल योजना कब तक पूरी होगी इसका जवाब न तो अधिकारियों के पास है और ना ही सरकार के पास. 10 सालों से निर्माणाधीन इस महत्वाकांक्षी योजना को लेकर यदि अधिकारियों ने जरा भी गम्भीरता दिखाई होती तो आज इस योजना से इस क्षेत्र के करीब 150 से अधिक गांव पेयजल संकट से नहीं जूझ रहे होते.

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