हर हाल में किसानों को मिले फसल बीमा योजना का लाभ-कृषिमंत्री

गोंडा, युपी/मयूर रैतानीः प्रदेश के कृषिमंत्री विनोद कुमार सिंह उर्फ पण्डित सिंह ने जनपद के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों तथा ऐसे क्षेत्र जहां पर गन्ने की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है, वहां के किसानों की गन्ने की फसल को अधिसूचित फसल में शामिल न करने पर बीमा कम्पनी एग्रीकल्चर इन्श्योरेन्स कम्पनी लिमिटेड के प्रतिनिधि को कड़ी फटकार लगाते हुए किसानों के हितों के साथ खिलवाड़ न करने की नसीहत दी है एवं ऐसे क्षेत्रों की गन्ने की फसल को अधिसूचित फसल की सूची में शामिल करने के निर्देश दिए है। यह निर्देश कृषि मंत्री ने जिला पंचायत सभागार में फसल बीमा योजना की समीक्षा बैठक करने के दौराान दिए हैं। समीक्षा में ज्ञात हुआ कि बीमा कम्पनियों द्वारा किसानों द्वारा प्रीमियम भुगतान करने के बावजूद उनकी फसल के नुकसान के अनुरूप बीमा राशि नहीं दी जा रही है साथ ही जनपद के बाढ़ क्षेत्र जैसे नवाबगंज, तरबगंज, करनैलगंज व कटरा जहां पर गन्ने की फसल की पैदावार सबसे ज्यादा होती है, वहां के किसानों की गन्ने की फसल को अधिसूचित फसल मंे नहीं शामिल किया गया है। इससे नाराज कृषिमंत्री ने बीमा कम्पनी के प्रतिनिधि को फटकार लगाते हुए तत्काल पुनः सर्वे करके चिन्हांकित क्षेत्रों में गन्ने की फसल को अधिसूचित करने व किसानों के हितों की अनदेखी न करने नसीहत दी है। बीमा योजना की समीक्षा करते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए फसल बीमा योजना प्राकृतिक आपदाओं जैसे ओलावृष्टि, चक्रवात, बेमौसम बारिश के अलावा कृमियों एवं रोगों के कारण किसी भी संसूचित फसल के नष्ट होने की स्थिति में किसानों को वित्तीय सहायता एवं बीमा कवरेज प्रदान करने तथा विशेषकर आपदा वर्षों में किसानों की आय को स्थिर रखने के उद्देश्य से भारत सरकार एवं प्रदेश सरकार के संयुक्त सहयोग से संचालित की जा रही है। इस अवसर पर उपनिदेशक कृषि ने बताया कि जनपद में फसल बीमा योजना के तहत बवर की जाने वाली फसलों में खरीफ के मौसम में धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, उर्द मूंग, तिल, मूंगफली, सोयाबीन गन्ना आदि, रबी के मौसम में गेहूं, चना, मटर, मसूर, लाही-सरसों आदि की फसलों को बीमा हेतु ग्राम पंचायतवार उपज के अनुसार अधिसूचति किया गया है। बीमित फसलों पर खरीफ की फसल में दो प्रतिशत, रबी की फसलों पर डेढ़ प्रतिशत तथा उद्यानी एवं बानवानी फसलों पर पांच प्रतिशत की प्रीमियम धनराशि किसानों को देनी होगी। इसके अलावा केसीसी होल्डर किसानों के अतिरिक्त बिना केसीसी वाले किसानों की भी फसलों का बीमा सरकार द्वारा नामित कम्पनियों द्वारा किया जा रहा है। उन्होने कृषकों से अनुरोध किया है कि वे सब अपनी-अपनी फसलों का बीमा जरूर करवाएं जिससे उन्हें आपदा की स्थिति में सरकार द्वारा आर्थिक सहायता मिल सके। उन्होने यह भी बताया कि किसानों को बीमे की सहायता राशि पचास प्रतिशत केन्द्र सरकार व पचास प्रतिशत की धनराशि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दी जाती है। उपनिदेशक कृषि ने बताया कि फसल बीमा योजना के तहत फसलों का बीमा कराने की अन्तिम तिथि 30 जुलाई है। इसलिए सभी किसानबन्धु समय से अपनी-अपनी फसलों का बीमा करवा लें। बैठक के दौरान मुख्य विकास अधिकारी जयन्त कुमार दीक्षित, उपनिदेशक कृषि डा0 मुकुल तिवारी, जिला कृषि रक्षा अधिकारी धनन्जय सिंह, जिला कृषि अधिकारी विनय सिंह, एलडीएम ए0के0 पाण्डेय सहित बैकों के प्रबन्धक व बीमा कम्पनियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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