नीतीश सरकार की पूर्ण शराबबंदी की खुली पोल

अरवल, बिहार/नगर संवाददाताः एक तरफ बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार राज्‍य में पूर्ण शराबबंदी लागू करने की बात कहकर पूरे देश में अपनी पीठ थपथपाने में जुटे हैं, वहीं आरटीआई में खुलासा हुआ है कि उनके दावे झूठे हैं. आरटीआई के जरिए संबंधित विभाग से पूछा गया था कि क्या बिहार में शराबबंदी के बाद शराब का लाइसेंस जारी किया गया है? उत्पाद विभाग का लिखित जवाब हां में आया. आरटीआई में बताया गया है कि पटना के दीघा इलाके के एक चर्च के फादर को शराब बनाने और उपयोग करने का लाइसेंस दिया गया है. आरटीआई एक्टिविस्ट नवल किशोर सिंह का कहना है कि शराबबंदी कानून (19A) में चर्च के पादरियों को शराब बनाने और उपयोग करने का अधिकार दिया गया है. बिहार में पूर्ण शराबबंदी के बाद बकायदा एक चर्च के पादरी को शराब बनाने और सेवन करने का लाइसेंस भी जारी किया गया है. जहां आम आदमी को स्प्रीट के इस्तेमाल की इजाजत नहीं है लेकिन सरकार कुछ लोगों को शराब बेचने और सेवन करने की इजाजत दे रही है. बिहार सरकार के उत्पाद एवं मद्य निषेध मंत्री अब्दुल जलील मस्तान ने इस बात से साफ इंकार किया है उनका कहना है कि कुछ लोग भ्रम फैला रहे है. जो भी शराब का इस्तेमाल करेगा वो जेल जाएगा. उधर, चर्च को शराब का लाइसेंस देने के बाद पूर्व सीएम जीतन राम मांझी ने मोर्चा खोल दिया है और कहा है कि अगर धार्मिक रीति रिवाजों के आधार पर शराब का लाइसेंस दिया जा सकता है तो उनकी जाति में भी आषाढ़ पूजा में शराब जरूरी है, ऐसे में उनकी जाति के लोगों को भी रीति रिवाजों के लिए सरकार शराब की इजाजत दे. भाजपा के नेता प्रेम कुमार ने कहा कि यह सरकार की दोहरी नीति है. हम इसका विरोध करेंगे. आप केवल चर्च को यह सुविधा नहीं दे सकते हैं. हिन्दूओं और दूसरे धर्मों के लोगों को भी छूट मिलनी चाहिए. आप केव एक धर्म को इजाजत नहीं दे सकते हैं. जाहिर है कि RTI से हुए इस खुलासे के बाद शराबबंदी को लेकर सियासत गरम होने लगी है. बीजेपी ने सरकार पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाया है तो वहीं जदयू की तरफ से सरकार का बचाव किया गया है. शराबबंदी के बीच RTI से हुए इस खुलासे ने सरकार के लिए मुसीबत का काम किया है. सवाल यही है कि अगर मंत्री का दावा सही है तो फिर लाइसेंस जारी कैसे हो गया.

 

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