34 देशों के मिसाइल ग्रुप में आज शामिल होगा भारत

नई दिल्ली/नगर संवाददाताः एनएसजी मेंबरशिप हासिल करने में चीन की वजह से भारत को भले ही नाकामी मिली, लेकिन 34 देशों के मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (MTCR) ग्रुप में देश की सोमवार को एंट्री हो रही है। इस पावरफुल ग्रुप में एंट्री के बाद भारत अमेरिका से वो खास प्रिडेटर ड्रोन्स भी खरीद सकेगा, जिनकी मदद से अफगानिस्तान में तालिबान को तबाह किया जा सका था।
– फॉरेन मिनिस्ट्री के स्पोक्सपर्सन विकास स्वरूप ने इस बारे में कहा- “हमने इस मिसाइल ग्रुप की मेंबरशिप के लिए पिछले साल अप्लाई किया था। प्रोसिजर पूरा हो चुका है। सोमवार को फॉरेन सेक्रेटरी फ्रांस, नीदरलैंड्स और लग्जमबर्ग के एम्बेसडर्स की मौजूदगी में इसके डॉक्युमेंट्स पर सिग्नेचर करेंगे।
– एनएसजी में भारत की एंट्री का विरोध करने वाला चीन इस ग्रुप का मेंबर नहीं है।
– यूएस से न्यूक्लियर डील के बाद भारत एनएसजी और एमटीसीआर जैसे ग्रुप में एंट्री की कोशिश कर रहा है।
– ये ग्रुप न्यूक्लियर, बायोलॉजिकल और केमिकल वेपन्स को कंट्रोल करने से जुड़े हैं।
– इसी तरह, ऑस्ट्रेलिया ग्रुप केमिकल वेपन्स और वैसेनार अरेंजमेंट छोटे हथियारों वाला ग्रुप है।
– मरीन्स से जुड़े विवाद के चलते पिछले साल इटली ने भारत की एमटीसीआर में एंट्री का विरोध किया था।
– इटली के दो मरीन पर भारत के दो मछुआरों की हत्या का आरोप था। अब इन दोनों मरीन्स को इटली वापस भेजा जा चुका है।
– इसके बाद इटली भी भारत की इस ग्रुप में एंट्री को लेकर नर्म रुख अपना रहा है।
– इस महीने की शुरुआत में भारत हेग कोड ऑफ कंडक्ट को मानने के लिए तैयार हो गया था।
– ये बैलिस्टिक मिसाइलों के प्रसार को रोकने से जुड़ा ग्रुप है। कोड ऑफ कंडक्ट मानने के बाद ये तय हो गया था कि एमटीसीआर में भारत को एंट्री मिल जाएगी।
– 1987 में बने इस ग्रुप में शुरुआत में G-7 देश अमेरिका, कनाडा, जर्मनी, जापान, इटली, फ्रांस और ब्रिटेन शामिल थे।
– चीन MTCR का मेंबर नहीं है, लेकिन वह इसकी गाइडलाइन मानने पर राजी है।
– इसका मकसद बैलिस्टिक मिसाइलों को बेचने की लिमिटेशन तय करना है।
– MTCR मुख्य रूप से 500 kg पेलोड ले जाने वाली और 3000 किमी तक मार करने वाली मिसाइलों और अनमैन्ड एरियल व्हीकल टेक्नोलॉजी (ड्रोन) के खरीदे-बेचे जाने पर कंट्रोल रखता है।
– एमटीसीआर में एंट्री के बाद भारत को रॉकेट सिस्टम, ड्रोन और इससे जुड़ी टेक्नोलॉजी हासिल करने में मदद मिलेगी।
– शुरुआत में अमेरिका से जनरल एटॉमिक्स कंपनी द्वारा बनाए गए प्रिडेटर ड्रोन्स और अनमैन्ड एरियल व्हीकल मिलने में मदद मिलेगी।
– इन्हीं ड्रोन्स ने अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ हमलों में अहम भूमिका निभाई थी।
– इन्हें जनरल एटॉमिक्स एमक्यू-1 प्रिडेटर भी कहा जाता है।
– इसे सबसे पहले यूएस एयरफोर्स और सीआईए ने यूज किया था।
– नाटो (नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन) की फौजों ने बोस्निया, सर्बिया, इराक वॉर, यमन, लीबियाई सिविल वॉर में भी इनका इस्तेमाल किया था।
– प्रिडेटर के अपडेटेड वर्जन में हेलफायर मिसाइल के साथ कई अन्य वेपन्स भी लोड होते हैं।
– प्रिडेटर में कैमरा और सेंसर्स भी लगे होते हैं जो इलाके की पूरी मैंपिंग में खासे मददगार होते हैं।

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