आदिवासी आज भी मूलभूत सुविधा को मोहताज

होशंगाबाद, मध्य प्रदेश/नगर संवाददाताः मध्य प्रदेश के बैतूल से लगभग 80 किलोमीटर दूर बसा है मरका ढाना गांव. यहां के आदिवासी आज भी मूलभूत सुविधा को मोहताज है. आदिवासियों के पास कोई रोजगार नहीं है इसलिए उन्होंने जंगल की खाली पड़ी जमीन पर हजारों फलदार पौधे लगा दिए. एक वक्त में बंजर पड़ी इस जमीन पर आज कहीं भी नजर घुमाओ तो हरियाली ही नजर आती है. गांव में सिर्फ रोजगार ही एक समस्या नहीं है पीने का पानी भी एक बड़ी चिंता है. इसीलिए आदिवासियों ने यहां 10 महीने में सौ मीटर लंबा और 20 फीट गहरा बांध बनाया है. और पीने के पानी के लिए भी कुआं खोदा है. बांध का निर्माण ये सोच कर किया गया कि आने वाले वक्त में बारिश के बाद भरे बांध के पानी से गांव में बड़ी नर्सरी बनाई जाएगी जिससे जंगल को हरा भरा किया जाएगा. जिस बांध को इन आदिवासियों ने बगैर सरकारी मदद के बनाया है अगर उसे सरकार बनवाती तो 8 महीने में 5 लाख रुपए की मजदूरी लग जाती. आदिवासियों की सूझबूझ तो देखिए बगैर पानी के इस इलाके में 6 साल पहले लगभग दस हजार फलदार पौधे लगा गए थे जो अब दस फ़ीट तक हो गए है. इनमे आम, काजू, अमरूद, नींबू, बादाम, कटहल, आंवला शामिल हैं. इन आदिवासियों की आंखों में अब इंतजार है तो सिर्फ बारिश का जिससे बांध में पानी भरे और हर तरफ हरियाली हो

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