लॉक डाउन के दौरान चित्तौड़गढ़ में भोजन वितरित किया गया

चित्तौड़गढ़/राजस्थान, चंद्रप्रकाश भावसार: पुठोली गांव के गरीबो के मसीहा (नेता जी) पंकज वैष्णव एक मध्यम परिवार के है, लेकिन देश भक्ति कूट-कूट कर भरी हुई है। इन्हें किसी भी तरह का भलाई का कार्य बता दीजिए। बिना हिचकिचाहट के हर वक्त तैयार रहते है। आज इस भयंकर कोरोना रूपी त्रासदी में उन्होंने अपनत्व दिखाते हुए। इस आपदा में भूखे असहाय, निर्धन व्यक्तियों को भोजन कराने का संकल्प लिया। लॉक डाउन में आप स्वयं ने पहली बार 50 व्यक्तियों को अपने गांव पुठोली के ढूंढ-ढूंढ कर भोजन के पैकेट दिए।
आज रविवार 29 मार्च को फिर से मानस बनाया की आसपास में इस आपदा से बहुत से व्यक्ति बिरला सीमेंट प्लांट व हिंदुस्तान जिंक से कार्य के दौरान आए हुए है। जो देश के कोने.कोने से आए हैं। जो लॉक डाउन से अपने घर नही जा सके और उनके पास जो पैसे थे, जो खर्च हो चुके है। ऐसे व्यक्तियों को भोजन के पैकेट दिए जाए। इसी विचार से उन्होंने अपने 10-12 मित्रों से बात की ओर हाथों हाथ चार सौ व्यक्तियों के लिए भोजन के पैकेट तैयार करवाए। इसमे उनके मित्र रतन सिंह राणावत, शंभू लाल सालवी, अरुण सिंह, शैलेंद्र सिंह राठौड़, लक्ष्मण सिंह, विष्णु मीणा, सुरेंद्र सिंह झाला, सीताराम वैष्णव, मुकेश सुथार, शंकर सालवी, शिव सालवी, गणपत सिंह आदि के सहयोग से भोजन की व्यवस्था हो पाई। लेकिन इस खाने को वितरित करने के लिए सम्बंधित अधिकारी की परमिशन जरूरी है। इस सम्बन्ध में उन्होंने पत्रकार दुर्गेश लक्षकार व पुठोली वार्ड पंच से सम्पर्क किया और कहा खाना तो तैयार हो रहा है। लेकिन हमारे पास खाना वितरण करने के लिए परमिशन नही है। तो पुठोली वार्ड आठ के पन्च ने विकास अधिकारी महोदय से बात की लेकिन महोदय ने बताया कि इस मामले में आज्ञा (परमिशन) उपखण्ड अधिकारी दे सकते है। फिर सचिव साहब से बात की ओर बाद में उपखण्ड अधिकारी जी के पीए साहब को कॉल किया बात हुई। फिर पंकज वैष्णव गए। जाकर आज्ञा पत्र लेकर आए और अपने दो ऑटो व एक स्कोर्पियो पर वह लेटर चिपका कर। सायं चार बजे से ऐसे व्यक्तियों को ढूंढ कर भोजन के पैकेट देने केलिए तीनो वाहनों को रवाना किये। एक ऑटो चन्देरिया में दूसरा स्कॉर्पियो से चित्तौड़गढ़ रोडवेज बस स्टैंड, रेल्वे स्टेशन व कलेक्टरी चौराहा व तीसरा वाहन पुठोली टांसपोर्ट नगर होते हुए, मेंड़ीखेड़ा, गंगरार टेसण, गंगरार टोल व टोल के आगे पुलिस नाका बन्दी तक जाकर इस त्रासदी में सहयोग प्रदान करने वालो को भी भोजन के पैकेट दिए गए। और छिक्स लाइन पर ट्रकों में सवार हो कर जा रहे व्यक्तियों को रुकवा कर भोजन के पैकेट वितरण किये गए। भोजन के पैकेट देने से पहले सभी से कहा गया। आप सभी एक मीटर की दूरी पर रहे और एक बाद एक व्यक्ति को भोजन के पैकेट दिए गए।

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