जनजाति क्षेत्र के विकास में कोई कमी नहीं रखी जाएगी

जयपुर, जगदीश कुमावत: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रविवार को जैसलमेर से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से 127.85 करोड़ रूपये के 41 कार्याें के शिलान्यास एवं लोकार्पण के बाद संबोधित करते हुए कहा कि आदिवासी समुदाय के उत्थान के लिए योजनाएं बनाने में राज्य सरकार ने कोई कमी नहीं रखी है। टीएसपी क्षेत्र सहित टाडा और माडा क्षेत्र में विकास कार्यों को बढ़ावा दिया जा रहा है। बिखरी हुई आबादी के विकास में आगे भी कोई कमी नहीं रखी जाएगी। जनजाति क्षेत्र में विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने 98.76 करोड़ रूपये के 28 कार्यों का शिलान्यास और 29.09 करोड़ रूपए के 13 कार्यों का लोकार्पण किया।
मुख्यमंत्री ने पूरे आदिवासी समाज को विश्व आदिवासी दिवस की बधाई दी और कहा कि सभी की भावनाओं का सम्मान करते हुए हमने इस दिन प्रदेश में अवकाश घोषित किया है। हमारा उद्देश्य है कि इस दिन आदिवासी समाज की समस्याओं पर विचार.विमर्श हो, अभी तक की उपलब्धियों पर चर्चा करने के साथ ही भविष्य की योजनाओं की रूपरेखा भी तय की जाए। उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि आज हर ग्राम पंचायत में क्षेत्रीय आदिवासी समाज के लोगों ने समाज की समस्याओं पर चिंतन.मनन किया।
जैसलमेर में जनजाति छात्रों के लिए 50 बेड की क्षमता का छात्रावास खोलने की घोषणा की गहलोत ने श्री मावजी महाराज, श्री गोविंद गुरू, वीरबाला कालीबाई एवं मानगढ़ के शहीदों को याद किया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जनजाति क्षेत्रों सहित पूरे प्रदेश में बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सड़कों के विकास में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने जैसलमेर में जनजाति छात्रों के लिए 50 बेड की क्षमता का छात्रावास खोलने की भी घोषणा की उन्होंने कहा कि बाड़मेर एवं जोधपुर में भी जनजाति छात्रों के लिए हॉस्टल खुलेंगे। जोधपुर में जनजाति छात्रों के लिये कोचिंग सेन्टर खोला जाएगा ताकि उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार किया जा सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी क्षेत्र के विकास के लिए हमारी सरकार सदैव तत्पर रही है। हमारी पिछली सरकार के समय रतलाम से डूंगरपुर वाया बांसवाड़ा ब्रॉडगेज रेल लाइन का सपना पूरा करने के लिए राज्य सरकार ने 200 करोड़ रूपये रेलवे को दिये थे, जमीन अवाप्ति भी हुई थी और तत्कालीन यूपीए चेयरपर्सन श्रीमती सोनिया गांधी ने उसका शिलान्यास भी किया था लेकिन सरकार बदलने के बाद यह काम अधूरा रह गया। गहलोत ने कहा कि देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू के जमाने से ही सबसे पिछड़े लोगों, वनवासियों एवंं आदिवासी समाज को मुख्य धारा में लाने और उनके विकास के लिए प्रयास शुरू किये गये थे। पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी एवं श्री राजीव गांधी का भी आदिवासी समाज से विशेष लगाव था। स्व. राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री बनते ही राजस्थान सहित विभिन्न राज्याें के आदिवासी क्षेत्रों का दौरा कर पिछड़े क्षेत्रों के विकास का संदेश दिया।

Share This Post