स्वतंत्रता संग्रामी और शिक्षा दानी थे संत बाबा मोहन सिंह जी मतवाला

सिरसा/हरियाणा, पंकज माहेश्वरी: कालावाली इस क्षेत्र में कई ऐतिहासिक गुरुद्वारों की स्थापना और देखरेख करने के अलावा संत बाबा मोहन सिंह जी मतवाला ने स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके साथ-साथ उन्होंने इस क्षेत्र के पहले शिक्षा दानी होने का मान भी प्राप्त किया है। उनकी इस देन से क्षेत्र के लोग उन्हें पूर्ण मान सम्मान देते हैं और उनके प्रति अथाह श्रद्धा रखते हैं। ब्रह्मज्ञानी संत बाबा मोहन सिंह जी मतवाला सभी धर्मों के लोगों को एक ही नजर से देखते थे और उनको बराबर मान सम्मान देते थे यही कारण है कि संत बाबा मोहन सिंह मतवाला की बरसी हर वर्ग के लोग मिलकर श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाते हैं गुरबाणी के महान प्रचारक संत बाबा मोहन सिंह जी नाम सिमरन का उपदेश देते हुए 1992 को अपनी सांसारिक यात्रा पूरी करके गुरु चरणों में जा विराजे थे।
1930 से पहले कालावाली क्षेत्र के लोग ज्यादातर अनपढ़ था क्योंकि क्षेत्र में कोई स्कूल नहीं था वह समय संत बाबा मोहन सिंह जी मतवाला ने क्षेत्र में आकर गांव तिलोकेवाला में गुरुद्वारा श्री निर्मलसर साहिब की स्थापना की और इस गुरुद्वारे में गुरु नानक विधा भंडार के नाम पर प्राइमरी स्कूल की स्थापना की इस स्कूल में उन्होंने कई साल तक मुफ्त शिक्षा का दान दिया। उनसे पढ़कर कई क्षेत्र निवासी बड़े-बड़े पदों पर तैनात हैं और कई रिटायर हो चुके हैं उन्होंने इस क्षेत्र में रहकर कई सालों तक भक्ति की और लोगों को शब्द गुरु के साथ जोड़ा इससे पहले वह लगभग 15 साल तक ऐतिहासिक गुरुद्वारा तंबू साहेब मुक्तसर साहिब में मुख्य ग्रंथि की सेवा करते रहे थे। इस दौरान उन्होंने 1921 में सिखों के धर्म युद्ध जैतो के मोर्चों में भाग लिया इस मोर्चा में उन्होंने चलती गोलियों में पहला अखंड पाठ प्रकाश किया और इस मोर्चे को फतेह दिलाई उन्होंने आजादी की लड़ाई में भी बढ़.चढ़कर योगदान दिया इस दौरान देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल और डॉक्टर किचलू के साथ नाभा जेल में भी रहे इसके बाद वह 1926 में जिला संगरूर पर गांव जंडालीकलां के गुरुद्वारा साहिब में कई साल तक सेवा की वह 1930 में गांव तिलोकेवाला में आए और फिर उन्होंने जहां 1992 तक गुरबाणी और सिख धर्म का प्रचार किया उन्होंने इस क्षेत्र में शिक्षा के साथ.साथ कई गावों में गुरुद्वारे भी स्थापित करके लोगों को गुरबाणी और सिख धर्म के साथ जोड़ा 1992 में मानवीय जामा त्याग कर गुरु चरणों में जा विराजे थे और अब गद्दी नशीन संत बाबा गुरमीत सिंह जी मुख्य सेवादार गुरुद्वारा निर्मलसर साहेब में उनकी 28 वीं बरसी 17 जनवरी को गांव तिलोकेवाला के गुरुद्वारा श्री निर्मलसर साहिब में श्रद्धा और उत्साह के साथ मना रहे है इस मौके पर धार्मिक दीवान के अलावा और अमृत संचार भी दिया जाता है इस मौके पर उनको बड़ी संख्या में धार्मिक राजनीतिक और समाजिक संगठनों के लोग अपनी श्रद्धासुमन भेंट करते हैं।

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