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	<title>JULM SE JUNG :: National Newspaper</title>
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		<title>रिटेल में एफडीआई पर सर्वदलीय बैठक बेनतीजा</title>
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		<pubDate>Tue, 29 Nov 2011 08:17:22 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
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		<description><![CDATA[नई दिल्ली, 29 नवंबर (वेबवार्ता)। रिटेल सेक्टर में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) पर सरकार बुरी तरह से घिर गई है। खुदरा एफडीआई का फैसला वापस नहीं लिए जाने की स्थिति में संसद नहीं चलने देने पर आमादा विपक्ष के तेवर को देखते हुए मंगलवार को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक बेनतीजा रही।
बैठक खत्म होने के बाद प्रणब मुखर्जी ने पत्रकारों को बताया कि सभी दलों में कोई आम सहमति नहीं बन पाई। सभी दलों की राय ले ली गई है और अब वह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को इसकी जानकारी देंगे। बैठक से निकलने के बाद तृणमूल कांग्रेस नेता सुदीप बंदोपाध्याय ने साफ कहा कि जब तक सरकार रिटेल में एफडाआई वापस नहीं लेती, संसद नहीं चलने दिया जाएगा। कुछ इसी तरह की राय भाजपा, जद-यू समेत अन्य दलों ने व्यक्त की है। सर्वदलीय बैठक के बेनतीजा समाप्त होने के बाद संसद के शीतकालीन सत्र का छठा दिन भी हंगामे की भेंट ...]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p align="justify">नई दिल्ली, 29 नवंबर (वेबवार्ता)। रिटेल सेक्टर में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) पर सरकार बुरी तरह से घिर गई है। खुदरा एफडीआई का फैसला वापस नहीं लिए जाने की स्थिति में संसद नहीं चलने देने पर आमादा विपक्ष के तेवर को देखते हुए मंगलवार को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक बेनतीजा रही।</p>
<p align="justify">बैठक खत्म होने के बाद प्रणब मुखर्जी ने पत्रकारों को बताया कि सभी दलों में कोई आम सहमति नहीं बन पाई। सभी दलों की राय ले ली गई है और अब वह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को इसकी जानकारी देंगे। बैठक से निकलने के बाद तृणमूल कांग्रेस नेता सुदीप बंदोपाध्याय ने साफ कहा कि जब तक सरकार रिटेल में एफडाआई वापस नहीं लेती, संसद नहीं चलने दिया जाएगा। कुछ इसी तरह की राय भाजपा, जद-यू समेत अन्य दलों ने व्यक्त की है। सर्वदलीय बैठक के बेनतीजा समाप्त होने के बाद संसद के शीतकालीन सत्र का छठा दिन भी हंगामे की भेंट चढ़ने की आशंका प्रबल हो गई है।</p>
<p align="justify">बैठक में सरकार की तरफ से पवन बंसल और नारायण सामी मौजूद थे। इसके अलावा लालकृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज और अरुण जेटली (भाजपा), शरद पवार (एनसीपी), सुदीप बंदोपाध्याय (तृणमूल), मुलायम सिंह यादव और मोहन सिंह (सपा), मनोहर जोशी और अनंत गीते (शिवसेना), वासुदेव आचार्य (सीपीएम), गुरुदास दास गुप्ता (सीपीआई), सतीश मिश्रा (बसपा), शरद यादव (जेडी-यू), नागेश्वर राव (टीडीपी), टी.शिवा (डीएमके), थंबीदुरई (एआईडीएमके) आदि मौजूद थे।</p>
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		<title>11 दिसंबर को दिल्ली में जंतर मंतर पर धरना देंगे अन्ना</title>
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		<pubDate>Tue, 29 Nov 2011 08:15:08 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
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		<description><![CDATA[रालेगण सिद्धि 29 नवंबर (वेबवार्ता)। अन्ना ने रालेगण सिद्धि में साफ कर दिया है कि वो 11 दिसंबर को दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना देंगे। उन्होंने देश के लोगों से अपील की है कि वो ज्यादा से ज्यादा की संख्या में उपस्थित हों। वहीं, अन्ना के सहयोगी सुरेश पठारे ने ट्विटर पर ट्वीट किया है कि 11 दिसंबर को मजबूत लोकपाल बिल के लिए दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना दिया जाएगा। इस धरने में पूरे देश से लोग आकर हिस्सा लेंगे। इस धरना का मकसद शक्ति प्रदर्शन करना है। पठारे ने कहा कि मजबूत लोकपाल के लिए धरना दिया जाएगा। 11 दिसंबर को अन्ना खुद कमान संभालेंगे। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि तब तक स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट भी आ जाएगी और मामला साफ हो जाएगा। पठारे ने कहा कि पूरे देश के लोगों को इस धरना प्रदर्शन में बुलाने का काम चल रहा है। ...]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>रालेगण सिद्धि 29 नवंबर (वेबवार्ता)। अन्ना ने रालेगण सिद्धि में साफ कर दिया है कि वो 11 दिसंबर को दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना देंगे। उन्होंने देश के लोगों से अपील की है कि वो ज्यादा से ज्यादा की संख्या में उपस्थित हों। वहीं, अन्ना के सहयोगी सुरेश पठारे ने ट्विटर पर ट्वीट किया है कि 11 दिसंबर को मजबूत लोकपाल बिल के लिए दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना दिया जाएगा। इस धरने में पूरे देश से लोग आकर हिस्सा लेंगे। इस धरना का मकसद शक्ति प्रदर्शन करना है। पठारे ने कहा कि मजबूत लोकपाल के लिए धरना दिया जाएगा। 11 दिसंबर को अन्ना खुद कमान संभालेंगे। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि तब तक स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट भी आ जाएगी और मामला साफ हो जाएगा। पठारे ने कहा कि पूरे देश के लोगों को इस धरना प्रदर्शन में बुलाने का काम चल रहा है। वहीं, दिल्ली पुलिस ने साफ कर दिया है कि रामलीला मैदान पर अन्ना के अनशन को लेकर एक अनुरोध पत्र मिला है। जबकि जंतर मंतर को लेकर कोई भी अनुरोध पत्र नहीं मिला है। चूकी जंतर मंतर के आसपास धारा 144 नहीं लगी है और इस पर दिल्ली पुलिस विचार कर सकती है।</p>
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		<title>राजनीतिक से भ्रष्टाचार मिटाने को आगे आएं युवा: राहुल गांधी</title>
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		<pubDate>Tue, 29 Nov 2011 08:12:53 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
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		<category><![CDATA[National]]></category>

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		<description><![CDATA[नई दिल्ली 29 नवंबर (वेबवार्ता)। कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने सोमवार को स्वीकार किया कि सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार राजनीतिक व्यवस्था में है, जिससे लड़ने के लिए नए युवाओं को इस क्षेत्र में आगे लाना होगा। उन्होंने कहा कि युवाओं को गरीबी से भी लड़ना होगा क्योंकि जब तक देश में एक भी गरीब बच्चा मौजूद रहेगा, हिंदुस्तान चमक नहीं पाएगा।
युवक कांग्रेस के नव निर्वाचित पदाधिकारियों के सम्मेलन बुनियाद का राष्ट्रीय राजधानी के जापानी पार्क में उद्घाटन करने के बाद संगठन के करीब आठ हजार कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए राहुल ने कहा, हिंदुस्तान का युवा इस देश को बदलेगा। आप इस संगठन में आइए और गरीबों के लिए लड़िए, युवाओं के लिए लड़िए। हजारों लोग एक व्यवस्था को चलाते हैं। आप व्यवस्था को बदल सकते हैं। उन्होंने कहा कि आज लोग भ्रष्टाचार की बात करते हैं। लेकिन सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार तो राजनीतिक व्यवस्था में है। अगर राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव ...]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p align="justify">नई दिल्ली 29 नवंबर (वेबवार्ता)। कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने सोमवार को स्वीकार किया कि सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार राजनीतिक व्यवस्था में है, जिससे लड़ने के लिए नए युवाओं को इस क्षेत्र में आगे लाना होगा। उन्होंने कहा कि युवाओं को गरीबी से भी लड़ना होगा क्योंकि जब तक देश में एक भी गरीब बच्चा मौजूद रहेगा, हिंदुस्तान चमक नहीं पाएगा।</p>
<p align="justify">युवक कांग्रेस के नव निर्वाचित पदाधिकारियों के सम्मेलन बुनियाद का राष्ट्रीय राजधानी के जापानी पार्क में उद्घाटन करने के बाद संगठन के करीब आठ हजार कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए राहुल ने कहा, हिंदुस्तान का युवा इस देश को बदलेगा। आप इस संगठन में आइए और गरीबों के लिए लड़िए, युवाओं के लिए लड़िए। हजारों लोग एक व्यवस्था को चलाते हैं। आप व्यवस्था को बदल सकते हैं। उन्होंने कहा कि आज लोग भ्रष्टाचार की बात करते हैं। लेकिन सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार तो राजनीतिक व्यवस्था में है। अगर राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव नहीं आया तो भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को नहीं लड़ा जा सकता। इससे ख्भ्रष्टाचार से, लड़ने का एक ही तरीका है कि हमें नए युवाओं को आगे लाना होगा।</p>
<p align="justify">राहुल ने कहा, आप ख्युवक कांग्रेस के निर्वाचित पदाधिकारी, छह से आठ हजार की संख्या में हैं। आप एक करोड़ युवा कार्यकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। आप पर जिम्मेदारी है कि आप युवाओं के लिए लड़ें, गरीबों के लिए लड़ें, भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ें, गांवों में जाएं और जन समस्याओं को समझें।<br />
राहुल ने यह भी कहा, हमने राजनीति का दरवाजा खोल दिया है लेकिन कोई युवा अकेला काम नहीं कर सकता। यहां कांग्रेस पार्टी मौजूद है। कांग्रेस पार्टी के पास गहराई है, अनुभव है जिसे युवा शक्ति से जोड़ने की जरूरत है।<br />
कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने युवक कांग्रेस में हाल ही में लोकतांत्रिक और पारदर्शी तरीके से हुए चुनाव की तारीफ करते हुए कहा, हमने एक करोड़ लोगों को राजनीतिक व्यवस्था का हिस्सा बनाया है। युवक कांग्रेस नए राजनीतिक नेतृत्व को सामने ला रही है, जिसमें कोई भी पैराशूट से नहीं आया। उन्होंने कहा कि जब हमने पूछा कि क्या कमी है तो आपने कहा कि युवाओं का संगठन है और इसमें युवा होने चाहिए। इसलिए हमने चुनाव प्रक्रिया की शुरुआत की। इसे हमने पंजाब से शुरू किया और आहिस्ता-आहिस्ता पूरे देश में लागू किया। हमने यही सोचा कि युवाओं का संगठन है और इसमें युवाओं की आवाज होनी चाहिए। राहुल ने कहा कि दूसरे संगठनों को देखिए, वहां पदाधिकारी मनोनीत हो जाते हैं। लेकिन हमने इसमें बदलाव किया है।</p>
<p align="justify">उन्होंने युवक कांग्रेस के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों से कहा, आपको राहुल गांधी ने, जितेंद्र सिंह ने या मीनाक्षी नटराजन ने नहीं चुना है। आप अपने बल पर चुनकर आए हैं। ऐसा किसी और संगठन में नहीं होता। दूसरे संगठनों में एक व्यक्ति ही पूरे ढांचे को चुन लेता है। लेकिन यहां इन पदाधिकारियों को एक करोड़ लोगों ने चुना है। मैं जहां-जहां दौरे करता हूं, वहां बदलाव देखता हूं। मैं देखता हूं कि नजरिए और आत्मविश्वास में बदलाव आया है।</p>
<p align="justify">राहुल ने यह भी कहा कि अगर कोई पदाधिकारी अच्छी तरह काम कर रहा है तो उसे कोई नहीं हटा सकता। सभी चुनाव लड़ कर आए हैं और आपको राहुल गांधी भी नहीं हटा सकता। जब तक आप अनुशासनहीनता या पार्टी विरोधी कार्रवाई नहीं करेंगे आप बने रहेंगे। ऐसा किसी और पार्टी में नहीं होता। वे हमारा मजाक बनाते हैं लेकिन आने वाले दिनों में वे भी इसका अनुसरण करेंगे। उन्होंने कहा कि अब युवाओं के लिए राजनीति के दरवाजे आहिस्ता-आहिस्ता खुलेंगे। पहले राजनीति के दरवाजे बंद हुआ करते थे। अब हमने इसे बदला है। आपमें से कोई भी राजनीतिक पृष्ठभूमि का नहीं है लेकिन फिर भी यहां युवक कांग्रेस में है। हमें इस जड़ को मजबूत बनाना है। उन्होंने युवा कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे जनता के बीच जाकर उनके मुद्दों को उठाएं और गरीबी से लड़ें।</p>
<p align="justify">राहुल ने कहा, देश में गरीबी सबसे बड़ी समस्या है। गरीबी के खिलाफ लड़ाई 60 साल से जारी है। हमें इस स्थिति को बदलना है। जब तक देश में एक भी गरीब बच्चा रहेगा, तब तक हिंदुस्तान नहीं चमक सकेगा। कांग्रेस महासचिव ने कहा कि गरीबी को मिटाना हमारा पहला मकसद होना चाहिए। हमें अपनी जड़ें गहरी कर गरीबी को मिटाना है क्योंकि जब तक गरीबी रहेगी देश मजबूत नहीं हो सकता। दो दिन के इस सम्मेलन में देश के आर्थिक, राजनीतिक हालात और युवाओं से संबंधित प्रस्ताव भी पारित किए जाएंगे। इस सम्मेलन को कल प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी संबोधित करेंगे।<br />
सम्मेलन में 20 राज्यों से युवक कांग्रेस के पदाधिकारी हिस्सा ले रहे हैं। माना जाता है कि उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले युवाओं को जोड़ने के मकसद से राहुल खुद इस तरह का सम्मेलन चाहते थे।</p>
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		<title>चीन में टीवी धारावाहिकों के दौरान विज्ञापनों पर रोक</title>
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		<pubDate>Tue, 29 Nov 2011 08:10:26 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
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		<description><![CDATA[बीजिंग  29 नवंबर (वेबवार्ता)। चीन में हुए एक सर्वेक्षण के बाद टीवी धारावाहिकों के दौरान विज्ञापन दिखाने पर रोक लगा दी गई है। यह रोक अगले साल एक जनवरी से प्रभावी हो जाएगी। समाचार पत्र चाइना डेली के अनुसार प्रसारण पर निगरानी रखने वाली चीन की शीर्ष संस्था ‘द स्टेट एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ रेडियो, फिल्म और टेलीविजन’ (एसएआरएफटी) ने धारावाहिकों के बीच में विज्ञापन दिखाने पर सभी टीवी स्टेशनों को राष्ट्रीय प्रतिबंध का आदेश दे दिया है। टीवी स्टेशन को विज्ञापन हटाकर अपने कार्यक्रमों को दोबारा से व्यवस्थित करने और ऐसा न करने पर कड़ी सजा भुगतने के लिए तैयार रहने को कहा गया है। ऑनलाइन समाचार पत्र बीजिंग न्यूज के मुताबिक पूर्वी चीन के जिआंगसु टेलीविजन और उत्तर चीन के ताएंजिन टेलीविजन ने प्रतिबंध को मानने की बात कही है। वहीं चीन के सेंट्रल टेलीविजन (सीसीटीवी), बीजिंग और शंघाई टेलीविजन का कहना है कि उन्हें अब तक ऐसा कोई नोटिस ...]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>बीजिंग  29 नवंबर (वेबवार्ता)। चीन में हुए एक सर्वेक्षण के बाद टीवी धारावाहिकों के दौरान विज्ञापन दिखाने पर रोक लगा दी गई है। यह रोक अगले साल एक जनवरी से प्रभावी हो जाएगी। समाचार पत्र चाइना डेली के अनुसार प्रसारण पर निगरानी रखने वाली चीन की शीर्ष संस्था ‘द स्टेट एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ रेडियो, फिल्म और टेलीविजन’ (एसएआरएफटी) ने धारावाहिकों के बीच में विज्ञापन दिखाने पर सभी टीवी स्टेशनों को राष्ट्रीय प्रतिबंध का आदेश दे दिया है। टीवी स्टेशन को विज्ञापन हटाकर अपने कार्यक्रमों को दोबारा से व्यवस्थित करने और ऐसा न करने पर कड़ी सजा भुगतने के लिए तैयार रहने को कहा गया है। ऑनलाइन समाचार पत्र बीजिंग न्यूज के मुताबिक पूर्वी चीन के जिआंगसु टेलीविजन और उत्तर चीन के ताएंजिन टेलीविजन ने प्रतिबंध को मानने की बात कही है। वहीं चीन के सेंट्रल टेलीविजन (सीसीटीवी), बीजिंग और शंघाई टेलीविजन का कहना है कि उन्हें अब तक ऐसा कोई नोटिस नहीं मिला है। वेबसाइट सिना डॉट कॉम द्वारा करवाए गए एक सर्वेक्षण में शामिल 10,000 प्रतिभागियों में से 85 प्रतिशत ने धारावाहिकों के बीच में विज्ञापन दिखाए जाने पर प्रतिबंध लगाने का समर्थन किया था। पिछले महीने एसएआरएफटी ने टीवी और रेडियो पर सेक्स से सम्बंधित विज्ञापन को प्रतिबंधित किया था।</p>
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		<title>अनियमित खानपान का शिकार यंग इण्डिया</title>
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		<pubDate>Thu, 10 Nov 2011 09:29:41 +0000</pubDate>
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आजादी के 60 वर्षों में हमने अपनी खाने की आदतों के बारे में क्या विचार किया इससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि हम बेहिसाब खाने वाला देश बन गए। हमारी संस्कृति और सभ्यता में खान-पान आकर्षण का विषय रहा लेकिन विगत एक दशक में पश्चिमी संस्कृति हमारी खानपान शैली पर कुछ ज्यादा ही हावी हो गई। तभी तो कोलकाता चिप्स की राजधानी हो गई और बैंगलूर नूडल्स का, चेन्ने बिस्कुट का और मुंबई भेल से वड़ा-पाव की राजधानी बन गई।
जंक फूड से फूलता पेट नजर तो आ रहा है किन्तु आकार और गंध का आकर्षण मोटापे को खुला आमंत्रण दे रहा है। आज खाद्य सामग्री लगातार भारी मात्रा में और आकर्षक तरीके से हमारे जीवन में घुसपैठ कर चुकी है। अस्वास्थ्यप्रद भोजन की बढ़ती लत ने मोटापा बढ़ाया। फिर मोटापे से अन्य रोगों में भी बढ़ोतरी होती गई।
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<p>आजादी के 60 वर्षों में हमने अपनी खाने की आदतों के बारे में क्या विचार किया इससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि हम बेहिसाब खाने वाला देश बन गए। हमारी संस्कृति और सभ्यता में खान-पान आकर्षण का विषय रहा लेकिन विगत एक दशक में पश्चिमी संस्कृति हमारी खानपान शैली पर कुछ ज्यादा ही हावी हो गई। तभी तो कोलकाता चिप्स की राजधानी हो गई और बैंगलूर नूडल्स का, चेन्ने बिस्कुट का और मुंबई भेल से वड़ा-पाव की राजधानी बन गई।</p>
<p>जंक फूड से फूलता पेट नजर तो आ रहा है किन्तु आकार और गंध का आकर्षण मोटापे को खुला आमंत्रण दे रहा है। आज खाद्य सामग्री लगातार भारी मात्रा में और आकर्षक तरीके से हमारे जीवन में घुसपैठ कर चुकी है। अस्वास्थ्यप्रद भोजन की बढ़ती लत ने मोटापा बढ़ाया। फिर मोटापे से अन्य रोगों में भी बढ़ोतरी होती गई।</p>
<p>हम लोग अपने आसपास के माहौल का शिकार होते जा रहे हैं। 50 प्रतिशत लोग अनियमित समय में चार बार खाते हैं इनमें सेहत के लिए हानिकारक नमकीन वगैरह की मात्रा ज्यादा होती है।<br />
फास्ट फूड का क्रेज महानगरों से कस्बों तक घुसपैठ कर चुका है। पकौड़ा,समोसा, कचौरी, नूडल्स, पिज्जा, बर्गर, पावभाजी, पेस्ट्री, चिप्स खाने वाले शहरी बच्चे मोटापे से पीड़ित हो रहे हैं किन्तु आदी हो चुके हैं। कोल्डड्रिंक्स और आइसक्रीम की मांग बढ़ रही है। फल पौष्टिक हैं। बावजूद इसके लोग कभी भी चाय-काफी के साथ बिस्कुट खाते हैं, शायद यह भूलकर कि बिस्कुट आसानी से नहीं पचते। सैर-सपाटे के दौरान फास्टफूड ज्यादा चलता है।<br />
खाने की इस दीवानगी के बीच पौष्टिक आहार की अनदेखी हो रही है। दाल-रोटी, पराठा खिचड़ी के शौकीन घट रहे हैं। तेल और मक्खन की मात्रा बढ़ रही है, दही की मांग घट रही है। छांछ पिछड़ रही है। लस्सी एक सीमित वर्ग का पेय बन कर रह गई है।<br />
टीवी बिगाड़ रहा है खानपान संस्कृति। सड़कों के किनारे खोमचे भीड़ जुटा रहे हैं। चटपटे खाने के शौकीन चटपटा खा रहे हैं। मॉलों और मल्टीप्लेक्स में भी आकर्षण का केन्द्र हैं खान-पान के स्टॉल। आधुनिक कैफे में चर्चा की जगह चकल्लस और फटाफट भोजन का क्रेज स्पष्ट नजर आ रहा है। महंगे स्कूलों की केन्टीन में बच्चे वेस्टर्न स्टाल में डिब्बाबंद भोजन खा रहे हैं। द्घर का भोजन टेस्टलेस लगने लगा है। हर कहीं फटाफट भोजन की दुकानों से उठने वाली तीखी गंध महसूस की जा सकती है।<br />
इन चीजों को जिस खूबसूरती से ग्राहकों तक पहुंचाया जा रहा है वह भी ध्यान देने योग्य है लेकिन हमें इस ओर सोचने की फुर्सत नहीं है। बाहर खाने-खिलाने का फैशन कहिए या नई आदत, बढ़ रही हैं। रेस्टांरेंट का बदलता हुआ रूप आकर्षण बढ़ा रहा है। अब मौके की तलाश का दौर नहीं बल्कि मूड का जमाना हो गया है।<br />
हम जरूरत से ज्यादा इसलिए नहीं खा रहे कि हम भूखे हैं या फिर डिब्बाबंद खाना बहुत स्वादिष्ट है। वजह है बदलता परिवेश और बदलती हुई जीवनशैली। 24 द्घंटे में चार बार खाने की आदत वर्षों पुरानी है। फर्क सिर्फ इतना आया है कि पहले स्वादिष्ट एवं पौष्टिक भोजन हम सभी का पसंदीदा भोजन था। अब तीखी गंध, चटपटा स्वाद और तैलीय भोजन हमारी कमजोरी बन चुका है।<br />
क्या खाएं, क्या न खाएं सोचने की जरूरत ही कहां रह गई। सांझ हुई नहीं कि सड़क किनारे भीड़ जुटनी शुरू हो जाती है। कुछ तो रोजाना खाने वाले नियमित ग्राहक भी बन चुके हैं। गरमा-गरम चटपटे व्यंजन, डोसा, सांभर वड़ा, इडली पीछे छूट रहे हैं। पसंदीदा जंक फूड आगे बढ़ चुका है और बढ़ा रहा है मोटापा। अनियमित खानपान का शिकार है यंग इंडिया। टीवी बदल चुका है हमारे बच्चों के खान-पान की %E</p>
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		<title>धोनी बने भारत के सबसे कामयाब विकेटकीपर</title>
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		<pubDate>Mon, 07 Nov 2011 12:51:04 +0000</pubDate>
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		<description><![CDATA[

नई दिल्ली, 07 नवंबर (वेबवार्ता)। टीम इंडिया के कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी भारत के सबसे कामयाब विकेटकीपर बन गए हैं। धोनी ने कोटला टेस्ट मैच में जब मार्लाेन सैम्युल्स का कैच पकड़ा तो टेस्ट क्रिकेट में 200 शिकार करने वाले वो भारत के पहले विकेटकीपर बन गए। धोनी ने टेस्ट मैचों में 174 कैच पकडे हैं। वहीं उनके नाम 62 स्टंपिग है।  इसी के साथ धोनी ने भारत के पूर्व विकेटकीपर सैयद किरमानी को पीछे छोड़ दिया जिनके नाम 198 शिकार थे। यही नहीं धोनी भारत के पहले विकेटकीपर बन गए हैं जिनके नाम 3000 टेस्ट रन और 200 शिकार हों।
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			<content:encoded><![CDATA[<p><a rel="attachment wp-att-132" href="http://julmsejung.com/%e0%a4%a7%e0%a5%8b%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%ac%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%af/mahendra-singh-dhoni/"><img class="alignnone size-thumbnail wp-image-132" title="mahendra-singh-dhoni" src="http://julmsejung.com/wp-content/uploads/2011/11/mahendra-singh-dhoni-150x150.jpg" alt="" width="150" height="150" /></a></p>
<p><a rel="attachment wp-att-132" href="http://julmsejung.com/%e0%a4%a7%e0%a5%8b%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%ac%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%af/mahendra-singh-dhoni/"><img class="alignnone size-medium wp-image-132" title="mahendra-singh-dhoni" src="http://julmsejung.com/wp-content/uploads/2011/11/mahendra-singh-dhoni-300x205.jpg" alt="" width="300" height="205" /></a></p>
<p>नई दिल्ली, 07 नवंबर (वेबवार्ता)। टीम इंडिया के कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी भारत के सबसे कामयाब विकेटकीपर बन गए हैं। धोनी ने कोटला टेस्ट मैच में जब मार्लाेन सैम्युल्स का कैच पकड़ा तो टेस्ट क्रिकेट में 200 शिकार करने वाले वो भारत के पहले विकेटकीपर बन गए। धोनी ने टेस्ट मैचों में 174 कैच पकडे हैं। वहीं उनके नाम 62 स्टंपिग है।  इसी के साथ धोनी ने भारत के पूर्व विकेटकीपर सैयद किरमानी को पीछे छोड़ दिया जिनके नाम 198 शिकार थे। यही नहीं धोनी भारत के पहले विकेटकीपर बन गए हैं जिनके नाम 3000 टेस्ट रन और 200 शिकार हों।</p>
]]></content:encoded>
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		<title>स्वस्थ रहिए, टैक्स से बचिए</title>
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		<pubDate>Sat, 12 Mar 2011 11:01:39 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
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		<description><![CDATA[
नई दिल्ली &#124; यह बजट आपकी सेहत पर भी भारी पड़ने वाला है। इलाज पर खर्च बहुत बढ़ जाएगा। पूरा चिकित्सा तंत्र अब कर के दायरे में शामिल हो गया है। उत्पाद शुल्क की रियायत वापस लेने से आयुर्वेदिक, यूनानी व होम्योपैथिक दवाएं महंगी हो जाएंगी। इतना ही नहीं, जांच कराने से लेकर अस्पताल में भर्ती होकर इलाज कराने तक पर टैक्स लग गया है। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने स्वास्थ्य क्षेत्र का कोई भी ऐसा कोना नहीं छोड़ा है, जहां से आप बचकर निकल जाएं।
रोटी, कपड़ा और मकान की महंगाई का दंश झेल रहे लोगों के लिए इलाज करना काफी कठिन हो जाएगा। बेसिक उत्पाद शुल्क की दर को चार से पांच फीसदी करने की वजह से दवाएं महंगी हो जाएंगी, इनमें आयुर्वेदिक, यूनानी और होम्योपैथिक दवाएं भी शामिल हैं। इसका असर उन चिकित्सा उपकरणों पर भी पड़ेगा, जिनका उपयोग अस्पतालों में इलाज के लिए किया जाता है।
केंद्रीय उत्पाद ...]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><a href="http://julmsejung.com/wp-content/uploads/2011/03/health.jpg"><img class="alignnone size-medium wp-image-123" title="health" src="http://julmsejung.com/wp-content/uploads/2011/03/health-300x217.jpg" alt="" width="300" height="217" /></a><br />
नई दिल्ली | यह बजट आपकी सेहत पर भी भारी पड़ने वाला है। इलाज पर खर्च बहुत बढ़ जाएगा। पूरा चिकित्सा तंत्र अब कर के दायरे में शामिल हो गया है। उत्पाद शुल्क की रियायत वापस लेने से आयुर्वेदिक, यूनानी व होम्योपैथिक दवाएं महंगी हो जाएंगी। इतना ही नहीं, जांच कराने से लेकर अस्पताल में भर्ती होकर इलाज कराने तक पर टैक्स लग गया है। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने स्वास्थ्य क्षेत्र का कोई भी ऐसा कोना नहीं छोड़ा है, जहां से आप बचकर निकल जाएं।</p>
<p>रोटी, कपड़ा और मकान की महंगाई का दंश झेल रहे लोगों के लिए इलाज करना काफी कठिन हो जाएगा। बेसिक उत्पाद शुल्क की दर को चार से पांच फीसदी करने की वजह से दवाएं महंगी हो जाएंगी, इनमें आयुर्वेदिक, यूनानी और होम्योपैथिक दवाएं भी शामिल हैं। इसका असर उन चिकित्सा उपकरणों पर भी पड़ेगा, जिनका उपयोग अस्पतालों में इलाज के लिए किया जाता है।</p>
<p>केंद्रीय उत्पाद शुल्क, न्यूनतम वैकल्पिक कर ख्मैट, और 25 से अधिक बिस्तरों वाले एयरकंडीशंड प्राइवेट अस्पतालों पर पांच फीसदी का सेवाकर लगा दिया गया है। खून की जांच हो अथवा सीटी स्कैन, एमआरआइ टेस्ट हो अथवा अत्याधुनिक तकनीक से दिल का इलाज, इन सबके लिए अब और अधिक भुगतान करना पड़ेगा। इतना ही नहीं इन अस्पतालों में डाक्टर से परामर्श के लिए भी अब अधिक फीस देनी होगी, क्योंकि इसे सेवाकर के दायरे में शामिल कर लिया गया है। वित्त मंत्री भले ही महंगे उपचार को महंगा करने का दावा कर रहे हों, लेकिन इससे गरीबों का इलाज भी सस्ता नहीं रह जाएगा।</p>
<p>विशेष आर्थिक क्षेत्र ख्एसईजेड, में स्थापित फार्मास्युटिकल्स व इससे जुड़े उद्योगों पर न्यूनतम वैकल्पिक कर ख्मैट, लगा दिया गया है। इस कर की दरें भी आधा फीसदी बढ़ा दी गई हैं। मैट कंपनियों के शुद्ध मुनाफे पर लगता है। बजट के इस प्रावधान से दवाओं की कीमतों को पर लग जाएंगे। इससे गरीब मरीजों और उनके परिवार की बेहाली और बढ़ जाएगी।</p>
<p>इलाज हुआ महंगा-<br />
-वातानुकूलित 25 बेड अथवा इससे अधिक बेड वाले अस्पतालों पर पांच फीसदी का सेवाकर<br />
-जांच व परीक्षण करने वाली प्रयोगशालाओं पर पांच फीसदी सेवा कर<br />
-एक फीसदी उत्पाद शुल्क के दायरे में होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक व यूनानी दवाएं<br />
-एसईजेड में दवा कंपनियों पर 18.5 फीसदी का मैट</p>
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		<title>कतर का जीवन</title>
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		<pubDate>Thu, 06 Jan 2011 08:44:38 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
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		<description><![CDATA[
समुद्र और मारुस्थल से संयुक्त रहे कतर के लोगों के लिए यह दोनों रोजी के साधन रहे हैं। लेकिन इसके साथ-साथ समुद्र और मारुस्थल आनन्द और मनोरजंन के लिए भी है। ये कतर के पर्यटन की रीड़ की हड्डी हैं। समुद्र का गरम पानी, सुखदाई तट और सुन्दर मरुस्थल पर्यटकों का आर्कषन का केन्द्र रहे हैं।
पर्यटकों की बढ़ती संख्या देखते हुए सरकार ने वहां पर पर्यटन अधिकार स्थापित किए। इसके लिए कतर ने कई अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन रखे हैं। कतर का समुद्र और मारुस्थल आज भी लोगों के लिए आकर्षक स्थान है और कतरियों का आमदनी का जरिया भी है।

समुद्ध के स्थिर तट और मारुस्थल अपने अनन्त खिचाव और प्राकृतिक और बनावटी अचम्भे के लिए वे पर्यटन शिल्प का मुख्य सहारा है। कतर में दोहा आने पर पर्यटकों को एयरपोर्ट से ही सारी सुविधाएं उपलब्ध होनी शुरू हो जाती हैं।
यहां पर विश्राम घर और बाजार 15-20 मिनट की दूरी पर स्थित ...]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><a href="http://julmsejung.com/wp-content/uploads/2011/01/qatar.jpg"><img class="alignnone size-medium wp-image-100" title="qatar" src="http://julmsejung.com/wp-content/uploads/2011/01/qatar-300x200.jpg" alt="" width="300" height="200" /></a></p>
<p>समुद्र और मारुस्थल से संयुक्त रहे कतर के लोगों के लिए यह दोनों रोजी के साधन रहे हैं। लेकिन इसके साथ-साथ समुद्र और मारुस्थल आनन्द और मनोरजंन के लिए भी है। ये कतर के पर्यटन की रीड़ की हड्डी हैं। समुद्र का गरम पानी, सुखदाई तट और सुन्दर मरुस्थल पर्यटकों का आर्कषन का केन्द्र रहे हैं।<br />
पर्यटकों की बढ़ती संख्या देखते हुए सरकार ने वहां पर पर्यटन अधिकार स्थापित किए। इसके लिए कतर ने कई अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन रखे हैं। कतर का समुद्र और मारुस्थल आज भी लोगों के लिए आकर्षक स्थान है और कतरियों का आमदनी का जरिया भी है।</p>
<p><a href="http://julmsejung.com/wp-content/uploads/2011/01/syd-mead-future-doha-qatar1.jpg"><img class="alignnone size-medium wp-image-101" title="syd-mead-future-doha-qatar1" src="http://julmsejung.com/wp-content/uploads/2011/01/syd-mead-future-doha-qatar1-300x210.jpg" alt="" width="300" height="210" /></a><br />
समुद्ध के स्थिर तट और मारुस्थल अपने अनन्त खिचाव और प्राकृतिक और बनावटी अचम्भे के लिए वे पर्यटन शिल्प का मुख्य सहारा है। कतर में दोहा आने पर पर्यटकों को एयरपोर्ट से ही सारी सुविधाएं उपलब्ध होनी शुरू हो जाती हैं।<br />
यहां पर विश्राम घर और बाजार 15-20 मिनट की दूरी पर स्थित है। दोहा कतर की राजधानी है जो कतर के पूर्वी तट पर स्थित है। यह कतर की सांस्कृतिक व्यापारिक और आर्थिक क्रियाओं का केन्द्र है। यहां पर लगभग 80 प्रतिशत लोग रहते हैं। उस नगर के मशहूर और अद्भूत जगहों में से दोहा कौर्निश प्रमुख है। इसे ÷कतर का फेफड़ा&#8217; माना जाता है, नवम्बर और मई के बीच में लोग यहां चलने और दौड़ लगाने आते हैं। इस समय मौसम भी शांत होता है और तापमान भी कम। इसके श्वेत तट पर पर्यटक दिनभर बैठकर आनन्द लेते हैं। इसके इलावा वे स्कूबा डुबकी लगाकार समुद्री शैल, मूंगा और रंगीन मछलियों को देखने का लुत्फ भी उठा सकते हैं।</p>
<p><a href="http://julmsejung.com/wp-content/uploads/2011/01/Qatar12.jpg"><img class="alignnone size-medium wp-image-104" title="Qatar12" src="http://julmsejung.com/wp-content/uploads/2011/01/Qatar12-300x164.jpg" alt="" width="300" height="164" /></a></p>
<p>दोहा में कई परम्परागत सूख भी है, जहां पर्यटनक अपनी मनपसन्द खरीदारी कर सकते हैं। यहां बाजगरी और ऊंठ का सुख देखने लायक है। बाजों की सुन्दरता देखने के लिए लोग काफी पैसे खर्च करते हैं। दोहा के पुराने परम्परागत सूखों में मसाला, इलायची मिश्रित कॉफी और जड़ी-बूटियों की मोहक सुगन्ध पाई जाती है। पर्यटक नगर में अनेक कॉफी की दुकानों में गुलाबजल में मिली चाय या इलायची, वाली अरबि और तुकी कॉफी का आनन्द उठा सकते हैं। कतर में 2000 में कतर पर्यटक अधिकार (क्यू.टी.ए) की नियुक्त की गई, जिसके अन्तर्गत देश की पर्यटन नीति बनाना और इसे एक प्रसिद्ध पर्यटक स्थल बनाना है। क्यू.टी.ए कतर एयरवेज के सहयोग से सराय क्षेत्र को बढ़ावा देती है। नए सराय बनाकर उनकी सेवाएं ऊंची श्रेणी पर लाने में अहम भूमिका निभाती है। समुद्री तट की सुविधा, आधुनिक टेलिकम्युनिकेशन आदि की सुविधा से पर्यटकों की बढ़ोत्री हुई है। खरीदारी के लिए सिटी सेन्टर, मॉल, लैन्डमार्क बगैरा और खेल की सुविधाएं बनाकर कतर को अंतर्राष्ट्रीय खरीदी और खेल के मेले रखने के योग्य बनाया है। पारिवारिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए जुलाई 2002 और 2003 में क्यु.टी.ए. ने पहला समर फेस्टिवल किया। इसमें होने वाले कलात्मक और मनोरन्जक कार्यों को देखने के लिए गल्फ और अरब देशों से कई परिवार आते हैं।</p>
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		<title>तुर्की का एक नगर इस्तम्बुल</title>
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		<pubDate>Thu, 06 Jan 2011 08:34:51 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
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		<description><![CDATA[
इसका पश्चिमी भाग यूरोप के पूर्वी कनारे में और पूर्वी भाग एशिया के पश्चिमी किनारे पर का भाग है। तुर्की को इस्लामी देश देखकर बहुत से लोग यह सोच लेते हैं कि वहां पर स्त्रियां बुर्के में अपने आपको ढके रहती होगीं और पुरुषों के चेहरे पर लम्बी-लम्बी दाढ़ी और ढीले ढाले पायजामे पहने हुए होगें। लेकिन असल में ऐसा नहीं है। यहां पर काफी हद तक यूरोपीय जीवन शैली को ही अपनाया जाता है, क्योंकि यह देश यूरोप में ही माना जाता है। यदि तुर्की जाएं तो बॉस्फोरस देखे बिना तो यात्रा अधूरी रहेगी।

बॉस्फोरस जाते हुए रास्ते में हरे भरे पार्क, आलीशान डोलमाबाहच, चिरागान महल, जो अब ग्रैंड होटल बन गया है आदि के दिलकश नजारे लम्बे समय तक हमारे दिलों-दिमाग पर छाये रहते हैं। डोलमाबाहचे महल जो कि बोस्फोरस के किनारे पर स्थित है, उसका सगमरमर का मुखौटा पानी की लहरों में झिलमिलता हुआ एक अनोखी छटा बिखेरता ...]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><a href="http://julmsejung.com/wp-content/uploads/2011/01/Istanbul02.jpg"><img class="alignnone size-medium wp-image-92" title="Istanbul02" src="http://julmsejung.com/wp-content/uploads/2011/01/Istanbul02-300x160.jpg" alt="" width="300" height="160" /></a></p>
<p>इसका पश्चिमी भाग यूरोप के पूर्वी कनारे में और पूर्वी भाग एशिया के पश्चिमी किनारे पर का भाग है। तुर्की को इस्लामी देश देखकर बहुत से लोग यह सोच लेते हैं कि वहां पर स्त्रियां बुर्के में अपने आपको ढके रहती होगीं और पुरुषों के चेहरे पर लम्बी-लम्बी दाढ़ी और ढीले ढाले पायजामे पहने हुए होगें। लेकिन असल में ऐसा नहीं है। यहां पर काफी हद तक यूरोपीय जीवन शैली को ही अपनाया जाता है, क्योंकि यह देश यूरोप में ही माना जाता है। यदि तुर्की जाएं तो बॉस्फोरस देखे बिना तो यात्रा अधूरी रहेगी।</p>
<p><a href="http://julmsejung.com/wp-content/uploads/2011/01/istanbul01.jpg"><img class="alignnone size-medium wp-image-93" title="istanbul01" src="http://julmsejung.com/wp-content/uploads/2011/01/istanbul01-227x300.jpg" alt="" width="227" height="300" /></a></p>
<p>बॉस्फोरस जाते हुए रास्ते में हरे भरे पार्क, आलीशान डोलमाबाहच, चिरागान महल, जो अब ग्रैंड होटल बन गया है आदि के दिलकश नजारे लम्बे समय तक हमारे दिलों-दिमाग पर छाये रहते हैं। डोलमाबाहचे महल जो कि बोस्फोरस के किनारे पर स्थित है, उसका सगमरमर का मुखौटा पानी की लहरों में झिलमिलता हुआ एक अनोखी छटा बिखेरता है। बोस्फोरस का पुल संस्पेंशन ब्रिज विश्व का सबसे बड़ा पुल है। उस ब्रिज को देखकर व्यक्ति स्वयं ही सस्पेंस में पड़ जाता है। बोस्फोरस पुल पार करते करते ही बीलरबेइ महल आता है।<br />
इस महल के पीछे इस्तम्बुल का सबसे ऊंचा शिखर कमलिका पहाड़ी है। दूसरे किनारे पर &#8216;अर्नुवुदकोय&#8217; में प्रचीन लकड़ी के बने हुए ओटोमन-राज्य काल की विला और सामने ही &#8216;बेबेक&#8217; के आधुनिक अपार्टमेंट दिखाई देते हैं। कुछ किलोमीटर की दूरी पर &#8216;रूमेली हिसारी&#8217; और &#8216;अनादोलू हिसारी&#8217; दुर्ग बने हुए हैं।</p>
<p>इनके बाद &#8216;फातिह सुल्तान मेहमत&#8217; पुल आता है। &#8216;दुआतीप हिल&#8217; से बोसफोरस और पुल का नजारा देख सकते हैं। अमीरगान पार्क&#8217; में ट्यूलिप फूल मानों हमारा स्वागत कर रहे हो। इसके एशियाई भाग में &#8216;कनालिका&#8217; नामक मछली के व्यापारियों का गांव है। यहां रेस्तरा और कैधे की दही प्रसिद्ध है।</p>
<p>तोपकपी महल ओटोमन साम्राज्य का शाही महल था। जो कि पुराने शहर के किनारें पर स्थित है। इस महल में ओटोमन काल की शिल्प-कृतियां, शाही कीमती हीरे जवाहरात, शीशे की वस्तुएं, विश्व का सबसे बड़ा हीरा &#8216;स्पूनसैलर हीरा,&#8217; प्राचीन काल के चीनी-मिट्टी के नक्काशी किए हुए बर्तन, शाही परिवारों की पोशाकें, लघु चित्र, पैगम्बर मुहम्मद साहब के पवित्र धार्मिक अवशेष, उनकी तलवारे, तीर कमान आदि अनगिनत संग्रहीत चीजे हैं।<br />
तोपकापी महल को 1929 ई. में कमाल अतातुर्क की आज्ञा से संग्रहालय में परिवर्तित कर दिया गया। बोसफोरस के पश्चिमी किनारे पर डोलमाबाहचे महल 600 मीटर तक फैला हुआ है। जिसमें 56 स्तम्भ है और साढ़े चार टन का झाड़फानूस है जिसमें प्रकाश के लिए 750 बत्तियां हैं, 120 फुट की ऊंचाई पर लटकाया हुआ है।</p>
<p>इस महल में 300 कमरे, 6 हमाम, बड़े-बड़े स्वागत कक्ष हैं। यूरोप और सुदूर पूर्व देशों की शिल्प-कृतियों से महल सजा हुआ है। तुर्की्र रिपब्लिक के संस्थापक राष्ट्रपति मुसतफा कमाल अतातुर्क का निधन 1938 को इसी महल में हुआ था। इस महल के किनारे पर बड़े अच्छे-अच्छें रेस्तंरा है जो शीश कबाब और लवाशा आदि के लिए प्रसिद्ध है। यह महल सोमवार और बुहस्पतिवार को बंद रहता है। बेलरबेई महल का निर्माण 19वीं शताब्दी में सुल्तान अब्दुल अजीज ने करवाया था। यह महल बासफोरस के एशियाई किनारे पर स्थित है। गर्मियों में सुल्तान इसी महल में निवास करता था। यह महल भी सोमवार और बृहस्पतिवार के दिन बन्द रहता है।</p>
<p><a href="http://julmsejung.com/wp-content/uploads/2011/01/Istanbul03.jpg"><img class="alignnone size-full wp-image-94" title="Istanbul03" src="http://julmsejung.com/wp-content/uploads/2011/01/Istanbul03.jpg" alt="" width="249" height="180" /></a></p>
<p>&#8216;गोक्सू महल&#8217; को &#8216;कुसुस्कू&#8217; भी कहा जाता है इसे &#8216;अब्दुल मसीत&#8217; ने 19वीं शताब्दी के मध्य में बनवाया था। इस महल की एनालिक इमारत में जड़े हुए शीशे 1718 ई. में वेनिस की ओर से उपहार के रूप में दिए गए थे। रथों की दौड़ सुल्तानों और दर्शकों के मनोरजंन का एक बड़ा साधन था। &#8216;सुलेमानी मस्जिद&#8217; गोल्डन हार्न के पश्चिमी तट पर स्थित है। यह शाही मस्जिदों में सबसे सुन्दर है। प्रसिद्ध वास्तु-शिल्पी &#8216;सिनान&#8217; के अन्तर्गत इसका निर्माण हुआ थ। इसी के साथ &#8216;सिनान&#8217; की कब्र बनी हुई है। इस इमारत में मदरसा, धर्म तत्व विषय और चिकित्सा के शिक्षण विभाग भी है। सेंटसोफिया संग्रहालय के सामने छः मीनारों की शाही सुल्तान अहमत&#8217; मस्जिद है। इसे नीली मस्जिद भी कहा जाता है। इसका निर्माण 17वीं शताब्दी में किया गया था। इसके इलावा शाही फतीह मस्जिद, एयुप मस्जिद, सोकोलू मेहमद पाशा मस्जिद और मिहरमाह सुल्तान आदि मस्जिदें उल्लेखनीय है।  यहां के पुराने शहर में &#8216;कपाली कार्शी&#8217; है, जिसे ग्रैण्ड बाजार भी कहा जाता है, जो ऊपर से ढका हुआ है। इस बाजार में चार हजार से अधिक दुकानें है। जहां दुकानदारों और ग्राहकों का शोर हमेशा कानों को एक अनोखा सा मजा देता है। इस बाजार में सोने की ज्यूलरी, चीनी के नक्काशकारी किए हुए खुबसूरत बर्तन, विश्व विख्यात कालीन, हीरे, चमड़े की वस्तुएं, तांबे और पीतल के छोटे-बड़े बर्तन आदि सारी जरूरत की चीजें मिल जाती है। इसके इलावा मसालों के लिए मिसिर चर्शिसी और ताबे की वस्तुओं के लिए बर्किजिलर बाजार पर्यटकों के लिए आर्कषन का केन्द्र हैं। इसके इलावा मनोरजंन को ध्यान में रखते हुए ÷तकसीम हरबिए&#8217; क्षेत्र में तुर्की संगीत, बैली डांस, माडर्न-डिस्को, कैब्रे और जाज क्लब आदि है।</p>
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		<title>सबसे खतरनाक है मोबाइल एडिक्शन</title>
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		<pubDate>Thu, 06 Jan 2011 08:23:54 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
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		<description><![CDATA[
युद्ध और मोहब्बत के दौरान सनक ही सब कुछ कराती है। प्रेम करना गुनाह नहीं। गुनाह है प्यार में अंधा हो कर सब कुछ भूल जाना। भक्ति में शक्ति होती है। प्रेम करना ही है तो वतन से करो, प्रकृति से करो। ईश्वर से करो। प्रेम रोगी बन कर हिंसक बन जाना प्रेम का अपमान करना ही है। एडिक्ट होना द्घातक हो जाता है फिर चाहें आप किसी भी चीज के एडिक्ट क्यों न बनें। चर्चा  में ड्रग एडिक्ट ही आते हैं। लव एडिक्शन के कारनामे भी रोंगटे खड़े कर देते        हैं। प्रेम रोगियों की केमिस्ट्री कम खतरनाक नहीं होती।
आधुनिक युग में कुछ टीवी एडिक्शन के शिकार हैं तो  कुछ मोबाइल एडिक्शन के। दुष्परिणाम पड़ रहा है द्घरेलू औरतों और विद्यार्थियों        पर। औरतें आक्रामक हो रही हैं तो विद्यार्थियों का रूझान पढ़ाई से हटता ...]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><a href="http://julmsejung.com/wp-content/uploads/2011/01/mobile.jpg"><img class="alignnone size-medium wp-image-87" title="mobile" src="http://julmsejung.com/wp-content/uploads/2011/01/mobile-300x220.jpg" alt="" width="300" height="220" /></a><br />
युद्ध और मोहब्बत के दौरान सनक ही सब कुछ कराती है। प्रेम करना गुनाह नहीं। गुनाह है प्यार में अंधा हो कर सब कुछ भूल जाना। भक्ति में शक्ति होती है। प्रेम करना ही है तो वतन से करो, प्रकृति से करो। ईश्वर से करो। प्रेम रोगी बन कर हिंसक बन जाना प्रेम का अपमान करना ही है। एडिक्ट होना द्घातक हो जाता है फिर चाहें आप किसी भी चीज के एडिक्ट क्यों न बनें। चर्चा  में ड्रग एडिक्ट ही आते हैं। लव एडिक्शन के कारनामे भी रोंगटे खड़े कर देते        हैं। प्रेम रोगियों की केमिस्ट्री कम खतरनाक नहीं होती।</p>
<p>आधुनिक युग में कुछ टीवी एडिक्शन के शिकार हैं तो  कुछ मोबाइल एडिक्शन के। दुष्परिणाम पड़ रहा है द्घरेलू औरतों और विद्यार्थियों        पर। औरतें आक्रामक हो रही हैं तो विद्यार्थियों का रूझान पढ़ाई से हटता जा रहा        है। किताबों के पन्नों में प्रेमी प्रेमिका की तस्वीरें और खत रहेंगे तो कहां        से पढ़ाई में मन लगेगा।</p>
<p>करोड़ों हाथों में मोबाइल पकड़ा कर कई कंपनियों ने        अरबों का कारोबार कर लिया किन्तु उपयोगिता के दृष्टिकोण से यदि हम मोबाइल फोन        की समीक्षा करें तो लाभ कम, हानि ज्यादा नजर आयेगी। मोबाइल फोन ब्लैकमेलिंग        का सुलभ साधन जो बन गया है।द्घंटों मोबाइल फोन पर अपनी उंगलियां चलाने वालों        की निराली दुनिया यही बता रही है कि मोबाइल स्टेटस सिम्बल बन गया है। लोग इसका        सदुपयोग कम और दुरूपयोग ज्यादा कर रहे हैं। अश्लील तस्वीरें और संदेश के        प्रसारण में मोबाइल महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। गप्प मारने में महारथियों        के लिए तो मोबाइल फोन वरदान साबित हो रहा है।<br />
स्कूली विद्यार्थियों को भी मोबाइल लत लग रही है। कम्प्यूटर के गेम्स बच्चे        मोबाइल में खेल रहे हैं। गाने सुन रहे हैं, फिल्में देख रहे हैं। ब्लू फिल्में        तक बड़ी आसानी से बन रही हैं। मोबाइल एडिक्ट पतन के मार्ग पर बढ़ चुके हैं। अपनी        जिन्दगी हैण्डसेट तक सीमित कर युवा वर्ग ने मोबाइल रोग पाल कर स्वयं को        बर्बादी का मार्ग प्रशस्त किया है। मोबाइल एडिक्ट न दिन में अपना ध्यान अपने        कार्यक्षेत्रा में केन्द्रित कर पा रहे हैं और न ही रात में चैन की नींद सो        पा रहे हैं। एसएमएस से पीड़ितों का इलाज संभव नहीं। इसी तरह मोबाइल टू मोबाइल        द्घंटों बातें करने वालों का भी इलाज मुश्किल है। मोबाइल फोन का उपयोग जानना        जरूरी है। दुर्भाग्य यह है कि लोग दुरूपयोग का आनंद लूट रहे हैं।<br />
बच्चों को एक बार चस्का लग गया तो वे मोबाइल बिना जीना असंभव चिल्लाने लगते        हैं। मोबाइल झूठ बोलने वालों के लिए तो मानो वरदान साबित हो रहा है लेकिन        चिन्ता किसे है?सभी मस्त हैं मोबाइल-मोबाइल खेलने और बेचने में। मध्यम वर्ग        पर मोबाइल का बड़ा गहरा प्रभाव पड़ रहा है। पेट में रोटी न रहे चलेगा, जेब में        मोबाइल जरूरी है। टॉपअप जरूरी है। रिचार्ज कूपन जरूरी है। स्कूल-कॉलेज पढ़ने        वालों के पास लंच बॉक्स न रहे चलेगा, मोबाइल जरूरी है।<br />
पालकों ने प्रतिस्पर्धा को गलत अर्थ में लिया और खरीद दिया बच्चों को कलर        मोबाइल हैन्डसेट्स। होस्टल में रह कर पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए तो एक        बार मोबाइल की उपयोगिता मायने रखती है किन्तु द्घर में रह कर गांव अथवा शहर        के शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों और शिक्षकों        दोनों के लिए मोबाइल की अनिवार्यता समझ के बाहर की बात है।<br />
क्लासरूम में ही रिंग टोन बजने लगती है। बच्चे म्यूजिक सुनने में मस्त हैं।        पढ़ाई की किसी को कोई फिक्र नहीं है। द्घर पर भी पढ़ाई के समय मोबाइल हाथ में        नजर आए तो इसे दुर्भाग्य ही कहना पड़ेगा। मोबाइल के द्वारा टीनएजर्स अपराध के        नये-नये गुर सीख रहे हैं। मोबाइल एडिक्शन एक खतरनाक रोग बनता जा रहा है।</p>
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		<title>हंसिए और स्वस्थ रहिए</title>
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		<pubDate>Thu, 06 Jan 2011 07:49:57 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
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आज के इस महंगाई के दौर में जहां        हर चीज महंगी है, हंसी ही सस्ती क्यों रहे, सो हंसी भी महंगी हो गई है जिसे        लोग सोच-समझ के बहुत थोड़ा-थोड़ा खर्च करते हैं। आज जीवन शैली ही ऐसी बन गई है        किसी को दम मारने की फुर्सत नहीं। हंसने की कौन कहे, रोने तक की फुर्सत नहीं        मगर हंसना छोड़कर आप जो रोग पाल बैठेंगे, उनके इलाज के लिए तो आपको फुर्सत        निकालनी ही पड़ेगी।
फिर क्यों न बीमारी से बचने और        पैसा बचाने के लिए ये फुर्सत के क्षण पहले ही निकाल लिया जाए। जिन्दगी        जिन्दादिली का नाम है। जिन्दादिल ...]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #000000;"> </span></p>
<p><span style="color: #000000;"><a rel="attachment wp-att-145" href="http://julmsejung.com/%e0%a4%b9%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%8f/laughing1/"><img class="alignnone size-thumbnail wp-image-145" title="laughing1" src="http://julmsejung.com/wp-content/uploads/2011/01/laughing1-150x150.jpg" alt="" width="150" height="150" /></a></span></p>
<p><span style="color: #000000;"><a rel="attachment wp-att-145" href="http://julmsejung.com/%e0%a4%b9%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%8f/laughing1/"></a>आज के इस महंगाई के दौर में जहां        हर चीज महंगी है, हंसी ही सस्ती क्यों रहे, सो हंसी भी महंगी हो गई है जिसे        लोग सोच-समझ के बहुत थोड़ा-थोड़ा खर्च करते हैं। आज जीवन शैली ही ऐसी बन गई है        किसी को दम मारने की फुर्सत नहीं। हंसने की कौन कहे, रोने तक की फुर्सत नहीं        मगर हंसना छोड़कर आप जो रोग पाल बैठेंगे, उनके इलाज के लिए तो आपको फुर्सत        निकालनी ही पड़ेगी।</span></p>
<p><span style="color: #000000;">फिर क्यों न बीमारी से बचने और        पैसा बचाने के लिए ये फुर्सत के क्षण पहले ही निकाल लिया जाए। जिन्दगी        जिन्दादिली का नाम है। जिन्दादिल रहने के लिए उम्र की कोई पाबंदी नहंी होती।        हर समय चेहरा लटकाए उदासी से द्घिरे रहने पर कोई मनोरोग तो द्घेर ही लेते        हैं, शारीरिक रोग भी कम नहीं होते।<br />
हार्ट प्रॉब्लम का एक अहम कारण तनाव है। हंसने से ध्यान बंटने पर तनाव खत्म        होता है। जीवन तनावरहित हो तो दिल की बीमारियां बहुत कम हो जाएंगी और तनाव        रहित रहने का अचूक नुस्खा है बात-बात पर हंसना, ठहाके लगाना और जीवन को भरपूर        जीना।<br />
हंसने से एनर्जी लेवल बढ़ता है उसमें व्यकि की सोच बेहतर हो जाती है।        नकारात्मक विचार तिरोहित हो जाते हैंऔर व्यक्ति संतुलित ढंग से समस्याओं पर        गौर कर सही निर्णय लेने में सक्षम होता है।<br />
सॉओल के संचालक डॉक्टर विमल छाजेर के अनुसार &#8216;हंसने से मसल्स मजबूत होते हें,        ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है, ब्लडप्रेशर नियंत्रित होता और दिल ठीक रहता है।        इसलिए स्वस्थ रहना है तो हंसिए जरूर।&#8217;<br />
क्लीनिकल साइकोलोजिस्ट डॉक्टर नयना बत्रा के अनुसार तनाव इस युग का अभिशाप        है। इसके कारण कई मनोरोग पनपने लगते हैं। मैं अपने मरीजों को दवा कम, लाफ्टर        थेरेपी ज्यादा सजेस्ट करती हूं।<br />
यह जाना माना सत्य है कि खुलकर हंसने के बाद हम बहुत हल्का फुल्का महसूस करते        हैं। होता यह है कि हंसने से हम भरपूर ऑक्सीजन ग्रहण करते हैं जो हमें ताजगी        का अहसास कराती है।<br />
इसके अलावा हंसने से ब्लड सैल्स बढ़ते हैं, ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और मसल्स        रिलेक्स करते हैं। स्ट्रैस हार्मोन एपिनोप्रिन और कार्टिसोल भी हंसने से कम        हो जाते हैं।<br />
हंसने की महत्ता समझ पाने के कारण का राज है तनावमुक्त रहना। तनावमुक्त रहने        के लिये जरूरी है खूब हंसना, दिल खोलकर हंसना।ही आजकल हंसने पर बहुत जोर दिया        जाने लगा है। जगह-जगह अब लाफिंग क्लब खुल गए हैं। शहरों में पार्क में लोग        हंसने की एक्सरसाइज करने लगे हैं। स्वस्थ रहने का राज है तनावमुक्त रहना।        तनावमुक्त रहने के लिये जरूरी है खूब हंसना, दिल खोलकर हंसना।</span></p>
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		<title>कैसे रहें खुशहाल और तंदुरूस्त</title>
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		<pubDate>Wed, 05 Jan 2011 19:00:09 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[Life & Style]]></category>

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		<description><![CDATA[मल्टीनेशनल कंपनी में कार्यरत निशित जैन जो एक उच्च अधिकारी हैं, इन दिनों कार्यभार को लेकर काफी तनावग्रस्त रहने लगे थे। कंप्यूटर के आगे बैठे-बैठे शरीर अकड़ जाता था। उन्हें बैकएक की समस्या भी रहने लगी थी।
व्यायाम की कमी से शरीर बीमारियों का द्घर बन जाता है। न केवल शारीरिक बल्कि        मानसिक रोग भी आ द्घेरते हैं। उनमें स्ट्रैस और डिप्रेशन तथा एलर्जी कॉमन हैं।
सही पॉस्चर रख के बैठना, सीधे तनकर चलना, कंधे झुकाकर नहीं बल्कि सीधे सिर        उठाकर चलना सही तरीका है। जवान व्यक्ति को ऊर्जावान होना चाहिए। इसके लिए योग        बहुत मददगार साबित होगा। योग न केवल शरीर और मन को ही मजबूती प्रदान करता है बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी शक्ति प्रदान करता है।
आज ज्यादातर बड़े शहरों की बड़ी- बड़ी कंपनियों में कार्यरत लोगों की जीवन ...]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>मल्टीनेशनल कंपनी में कार्यरत निशित जैन जो एक उच्च अधिकारी हैं, इन दिनों कार्यभार को लेकर काफी तनावग्रस्त रहने लगे थे। कंप्यूटर के आगे बैठे-बैठे शरीर अकड़ जाता था। उन्हें बैकएक की समस्या भी रहने लगी थी।<br />
व्यायाम की कमी से शरीर बीमारियों का द्घर बन जाता है। न केवल शारीरिक बल्कि        मानसिक रोग भी आ द्घेरते हैं। उनमें स्ट्रैस और डिप्रेशन तथा एलर्जी कॉमन हैं।<br />
सही पॉस्चर रख के बैठना, सीधे तनकर चलना, कंधे झुकाकर नहीं बल्कि सीधे सिर        उठाकर चलना सही तरीका है। जवान व्यक्ति को ऊर्जावान होना चाहिए। इसके लिए योग        बहुत मददगार साबित होगा। योग न केवल शरीर और मन को ही मजबूती प्रदान करता है बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी शक्ति प्रदान करता है।</p>
<p>आज ज्यादातर बड़े शहरों की बड़ी- बड़ी कंपनियों में कार्यरत लोगों की जीवन शैली कुछ इस तरह की है जिसमें, तनाव संबंधी प्रॉब्लम        और मोटापे की बढ़ती दर चिंता का विषय है।<br />
रिलैक्स होना सीखें<br />
डालास के कूपर क्लीनिक में वैलनेस प्रोग्राम के एक्जीक़्यूटिव डायरेक्टर कानी  टाइन के अनुसार हम में से ज्यादातर लोग दिन भर में दस मिनट भी चैन से नहीं  बैठते हैं, जबकि ध्यान, योग और विजुएलाइजेशन से हृदयगति और ब्लडप्रेशर कम होता है। ड्यूक यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन में पाया गया कि रिलेक्सेशन तकनीकों से  डायबिटीज के मरीजों का ब्लड शुगर लेवल एक फीसदी कम हो सकता है।<br />
गहरी सांस लें<br />
टाइन के अनुसार यह स्टे्रस हटाने का सबसे अच्छा और सरल तरीका है। इसे अपनी        आदत में शामिल कर लें। इसके लिए आप जब भी द्घड़ी देख रहे हों, कुछ गहरी सांस        ले जो आप के पेट तक जाएं, या फिर एकांत में बैठकर गहरी सांस लेते हुए अपनी        आती-जाती सांसों पर गौर करें। जब आपका दिमाग भटकने लगे तो धैर्य रखते हुए अपना  ध्यान वापस अपनी सांसों पर ले आएं। पांच मिनट की प्रैक्टिस से शुरू करते हुए यह समय आप १० से १५ मिनट तक ले जाएं।<br />
उलझनों को दिमाग से निकालें। उलझनें होती हैं सुलझने के लिए। सोच सोच कर        हलकान न हों। अपने पसंदीदा काम में खुद को व्यस्त कर अपना ध्यान डायवर्ट करे।        द्घर की अस्त व्यस्त चीजों को करीने से सजाएं। द्घर के छोटे-छोटे कार्य भी  तरोताजा कर सकते हैं। म्यूज़िक सुनें, फड़कती धुन के साथ उन्मुक्त होकर झूमें।<br />
गुस्से पर रखें कंट्रोल<br />
गुस्सा आपकी जान का दुश्मन है। एक अध्ययन के अनुसार गुस्सैल प्रकृति के लोगों  में कम गुस्सा करने वालों के मुकाबले दिल के दौरे का खतरा दो गुना ज्यादा होता  है, लेकिन गुस्से को दबाना भी सेहत के हक में नहीं है। उसे जाहिर करना भी  जरूरी है। एक शोध के मुताबिक भावनाओं को दबाकर रखने से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।<br />
जब आपको किसी बात पर गुस्सा आने लगे तो अपना ध्यान इधर उधर की दूसरी बातों की  तरफ डायवर्ट करने का प्रयत्न करें।<br />
मिजाज में बेफिक्री लाएं। इससे जिन्दगी में व्यर्थ की टेंशन से मुक्ति मिलेगी, वे फिजूल बातें जो अनावश्यक रूप से आपकी खुशियों को ग्रहण लगाती हैं। मेड नहीं  आई तो कौन सा पहाड़ टूट पड़ा आपके लिये। क्या वो इतनी अहम है। जाम में फंस गए तो क्यों मूड बिगाड़ें। स्टीरियो पर गाने एंजॉय करें या मोबाइल पर किसी  प्रियजन से कुछ गपशप कर लें।<br />
रिश्तों में कड़वाहट न आने दें<br />
डीन आर्निश अपनी पुस्तक लव एंड सर्वाइवल में लिखते हैं मैं तो ऐसी किसी दवा के बारे में नहीं जानता जो सेहत पर अच्छे रिश्तों से ज्यादा असर डालती हों। रिश्ते नाते आपके सुरक्षा कवच हैं। इनकी अहमियत को समझें।<br />
जो लोग सोशल होते हैं जिनके यहां रिश्तेदारों का आना जाना लगा रहता है। वे  खुश रहते हैं। उनके जीवन में बोरियत नहीं होती। मैन इज ए सोशल एनिमल। इसीलिए  अकेलापन व्यक्ति के लिए सबसे बड़ी सज़ा है। दिमागी संतुलन और उसकी ताजगी बनाए   रखने के लिए लोगों से इंटरएक्ट करना जरूरी है।<br />
लोगों से मिलने जुलते रहने के अलावा सामाजिक कार्यो में भाग लेना, किसी गु्रप  से जुड़े रहना, क्लब किट्टीज में एक्टिव रहें। युनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन, एनआर्बर  में हुए एक अध्ययन के अनुसार अगर आप हफ्ते में एक दिन महज आधा द्घंटा भी दूसरों   की सेवा में बिताते हैं तो आप अपनी जिन्दगी कई साल बढ़ा लेते हैं।<br />
भारत की आध्यात्मिकता आज पश्चिम के लोगों का मुख्य आकर्षण है। कारण है भौतिकता   में लिप्त उनके अपने कलचर से उपजी द्घोर अशांति। आध्यात्मिक कामों में व्यस्त  रहने से सहनशक्ति बढ़ती है। स्टै्रसलेवल कम होता है, मानसिक शांति मिलती है  जिसका शरीर पर सकारात्मक असर पड़ता है।<br />
ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में छपी एक स्टडी के अनुसार एक योग मंत्र करने या एक        कैथोलिक रोजेरी करने से आपकी श्वास की दर करीब ६ सांसें प्रति मिनट धीमी होने        लगती है जिसमें सुकून का एहसास तो होता ही है, ब्लड प्रेशर व हृदयगति भी        संतुलित होती हैं।<br />
डिप्रेशन को हावी न होने दें<br />
आज के युग में एक कॉमन बीमारी है डिप्रेशन यानी कि अवसाद, द्घोर निराशा की        स्थिति। इससे बचने के लिये सोच में पॉजिटिविटी लाएं। व्यायाम करें क्योंकि  ड्यूक यूनिवर्सिटी में की गई एक स्टडी बताती है कि व्यायाम डिप्रेशन के लिए  उतना ही फायदेमंद है जितनी डिप्रेशन के लिए दी जाने वाली दवाएं। एक्युपंक्चर  भी आजमाया जा सकता है और काउंसलिंग तथा मनःचिकित्सक की राय भी ली जा सकती है।   अपने को खुशहाल व तंदुरूस्त रखना आपकी अपने प्रति पहली जिम्मेदारी है।<br />
-उषा जैन &#8216;शीरीं&#8217;</p>
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