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अनियमित खानपान का शिकार यंग इण्डिया
आजादी के 60 वर्षों में हमने अपनी खाने की आदतों के बारे में क्या विचार किया इससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि हम बेहिसाब खाने वाला देश बन गए। हमारी संस्कृति और सभ्यता में खान-पान आकर्षण का विषय रहा लेकिन विगत एक दशक में पश्चिमी संस्कृति हमारी खानपान शैली पर कुछ ज्यादा ही हावी हो गई। तभी तो कोलकाता चिप्स की राजधानी हो गई और बैंगलूर नूडल्स का, चेन्ने बिस्कुट का और मुंबई भेल से वड़ा-पाव … Read entire article »
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सबसे खतरनाक है मोबाइल एडिक्शन
युद्ध और मोहब्बत के दौरान सनक ही सब कुछ कराती है। प्रेम करना गुनाह नहीं। गुनाह है प्यार में अंधा हो कर सब कुछ भूल जाना। भक्ति में शक्ति होती है। प्रेम करना ही है तो वतन से करो, प्रकृति से करो। ईश्वर से करो। प्रेम रोगी बन कर हिंसक बन जाना प्रेम का अपमान करना ही है। एडिक्ट होना द्घातक हो जाता है फिर चाहें आप किसी भी चीज के एडिक्ट क्यों न बनें। चर्चा में ड्रग एडिक्ट ही आते हैं। लव एडिक्शन के कारनामे भी रोंगटे खड़े कर देते हैं। प्रेम रोगियों की केमिस्ट्री कम खतरनाक नहीं होती। आधुनिक युग में कुछ टीवी एडिक्शन के शिकार हैं तो कुछ मोबाइल एडिक्शन के। दुष्परिणाम पड़ रहा है द्घरेलू औरतों और विद्यार्थियों … Read entire article »
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हंसिए और स्वस्थ रहिए
आज के इस महंगाई के दौर में जहां हर चीज महंगी है, हंसी ही सस्ती क्यों रहे, सो हंसी भी महंगी हो गई है जिसे लोग सोच-समझ के बहुत थोड़ा-थोड़ा खर्च करते हैं। आज जीवन शैली ही ऐसी बन गई है किसी को दम मारने की फुर्सत नहीं। हंसने की कौन कहे, रोने … Read entire article »
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कैसे रहें खुशहाल और तंदुरूस्त
मल्टीनेशनल कंपनी में कार्यरत निशित जैन जो एक उच्च अधिकारी हैं, इन दिनों कार्यभार को लेकर काफी तनावग्रस्त रहने लगे थे। कंप्यूटर के आगे बैठे-बैठे शरीर अकड़ जाता था। उन्हें बैकएक की समस्या भी रहने लगी थी। व्यायाम की कमी से शरीर बीमारियों का द्घर बन जाता है। न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक रोग भी आ द्घेरते हैं। उनमें स्ट्रैस और डिप्रेशन तथा एलर्जी कॉमन हैं। सही पॉस्चर रख के बैठना, सीधे तनकर चलना, कंधे झुकाकर नहीं बल्कि सीधे सिर उठाकर चलना सही तरीका है। जवान व्यक्ति को ऊर्जावान होना चाहिए। इसके लिए योग बहुत मददगार साबित होगा। योग न केवल शरीर और मन को ही मजबूती प्रदान करता है बल्कि … Read entire article »
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मेडीटेशन के फायदे
कहते हैं ‘मेडिटेशन इज माइंड विदाउट एजिटेशन, ध्यान से मन शांत निर्विकार होता है इसमें दो राय नहीं। ध्यान में अपने चित्त की गतिविधि को देहगत संवेदना को तटस्थ बनकर, सिर्फ साक्षी के तौर पर देखा जाता है। अपने को पहचानने का एक उत्तम जरिया है ध्यान। … Read entire article »
अनियमित खानपान का शिकार यंग इण्डिया
आजादी के 60 वर्षों में हमने अपनी खाने की आदतों के बारे में क्या विचार किया इससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि हम बेहिसाब खाने वाला देश बन गए। हमारी संस्कृति और सभ्यता में खान-पान आकर्षण का विषय रहा लेकिन विगत एक दशक में पश्चिमी संस्कृति हमारी खानपान शैली पर कुछ ज्यादा ही … Read entire article »
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वास्तु और आपका घर
भवन बनकर तैयार हो जाता है तो वह पंचभूत का रूप धारण कर लेता है। ईटो, मिट्टी, सीमेन्ट वगैरह से जब भवन बनकर तैयार हो जाता है तो लोग इसे निर्जीव समझते है लेकिन उनकी यह विचार धारा गलत है। दीवारे भी बाते करती है और सांस लेती है तभी तो कभी कोई गुप्त बात करनी हो तो लोग कहते है कि धीरे बात करें क्योंकि दीवारों के भी कान होते है। इन बातों से सिद्ध होता है कि हमारे पूर्वजों ने इस लकोक्ति को बनाते वक्त वास्तु शास्त्र का अध्ययन किया … Read entire article »
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गौरीकुंडः जहां स्नान से मिटती हैं ग्रह बाधाएं व त्वचा रोग
हमारे देश में ऐसी कई प्राचीन जलधाराएं व जल स्रोत हैं जिनमें स्नान से त्वचा संबंधी रोग ठीक हो जाते हैं। किन्तु पवित्र गंगा नदी एक ऐसी नदी है जहां स्नान से ग्रह बाधाएं भी मिट जाती हैं। इसी के तट पर है गौरी कुण्ड, मान्यता है कि यहां स्नान करने से ग्रहबाधाएं व त्वचा रोग मिट जाते हैं। हरिद्वार नगर में बिल्व पर्वत की तलहटी में बिल्वकेश्वर महादेव मंदिर से आगे स्थित है गौरीकुण्ड। रेलवे स्टेशन व बस स्टैण्ड से यह स्थान दो-ढाई किमी की दूरी पर … Read entire article »
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खाटू श्याम धाम
खाटू श्याम नगरी सनातन मतावलम्बियों के लिये आस्था का धाम हैं यह धाम भीम-पौत्र बर्बरीक के जीवन प्रसंग से जुड़ा है। बर्बरीक को भारतीय धार्मिक साहित्य में सुहृदय, सि( सैन, सि(ेश्चर्य, सूर्यावर्चा, चाण्डिल, श्याम-प्रभु, भीम-पौत्र आदि नामों से जाना जाता है। इसके अलावा तीन बाणधारी, शीश के दानी, नीले के अवतार आदि पर्याय नाम भी उनके जीवन प्रसंग से जुड़े हैं। महाभारत के यु( में बर्बरीक ने अपनी उपस्थिति से सभी को विस्मय में डाल दिया था। प्रत्येक पक्ष यह सोचने लगा … Read entire article »
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लड़कियां सोच-समझकर प्रशिक्षण संस्थान का चुनाव करें
बदलते परिवेश में कला के हर क्षेत्र की ओर लोगों का रुझाान बढ़ा है। शहर और कस्बों में प्रशिक्षण संस्थाओं का महत्व और उपयोगिता अप्रत्याशित रूप से बढ़ी है। इन प्रशिक्षण संस्थाओं के यकीकन चौंका देने वाले अत्यंन सुखद व सराहनीय परिणाम भी सामने आए हैं। प्रशिक्षण संस्थाओं में प्रशिक्षण ले कर साधारण प्रतिभाएं विशिष्टता हासिल करने में सफल हुई हैं। इन प्रशिक्षण संस्थाओं के प्रति लड़कियां भी स्वाभाविक रूप से आकृष्ट हुई हैं क्योंकि लड़कों की अपेक्षा लड़कियों के पास अधिक … Read entire article »
फैशन की दुनिया में भविष्य
फिल्मों की लोकप्रियता में वृद्धि और फैशन के क्षेत्र में नए-नए प्रयोग तथा सौन्दर्य प्रतियोगिताओं के बढ़ते प्रचलन ने आज फैशन के क्षेत्र में युवाओं के लिए रोजगार सम्भवनाओं के नए द्वार खोल दिए हैं। आज भारत सरकार की नई नीतियों के कारण बहुराष्ट्रीय कंम्पनियां भी फैशन उद्योग के विकास के लिए गंभीर है। समाज मे तेजी से बदलती मान्यताएं, रूचियों में आये परिवर्तन तथा बाजार में अंगड़ाई लेती रोजगार की सम्भावनाओं ने युवावर्ग के लिए विकल्पों का अंबार लगा दिया हैं। फैशन डिजाइनिंग एक ऐसा ही क्षेत्र … Read entire article »
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ठंड से पंगा…… ना बाबा ना
सभी प्राकतिक प्रक्रियाएं आपके शारीरिक क्रियाकलापों से जुडी हुई हैं। ठंड होने पर उसका महसूस होना भी इसी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में यदि आप महज बहादुरी दिखाने के चक्कर में ये जताते हों कि ‘ये ठंड किस चिडिया का नाम हैं ‘,तो संभल जाइए। ये बिना-वजह की बहादुरी आपके लिए मुसीबत बन सकती है। कुछ लोग अक्सर सर्दी को लेकर लापरवाही दिखाना चाहते हैं। दरअसल वे दूसरे लोगों पर यह इम्प्रेशन डालने की कोशिश मे रहते हें कि जैसे उन्हें सर्दी लग ही न रही … Read entire article »