परिमाता मंदिर आस्था का केंद्र

पठानकोट, पंजाब/वरिष्ठ संवाददाताः परिमाता के अवतार के बारे में महाराज हेमराज लोढ़ा का कहना है कि दक्ष परी लगभग 20 साल पहले इंद्रलोक से पृथ्वी पर भ्रमण करने आई थी। उस दौरान वार्ड 5 स्थित सैयद की हवेली रूकी। एक राज परिमाता हवेली में स्नान कर रही थी नीचे एक कोढ़ी बैठा हुआ था। नहाते समय पानी के छीटें कौढ़ी को लग गए तो वह ठीक हो गया और खुशी से झूम उठा। परीमाता ने नीचे देखा कौन खुशी से नाच रहा है उस दौरान परीमाता से कोढ़ी की नजरें मिल गई और परीमाता आकाश में ओझल हो गई।

Share This Post

Post Comment