मदुरै में आँजणा समाज ने बहाई ज्ञान की गँगा

माँगीलाल चौधरी, मदुरैः  तारीख 02/10/2015 को सुबह ५बजे साधवी श्री भगवतीबाईजी ने रामेश्वरम में मणि दर्शन किया।रामेश्वरम मे मणि दर्शन के बाद माँ मिनाक्षी धाम मदुरै नगरे के लिए प्रस्थान किया। मदुरै सुबह क़रीबन ९:३० बजे मदुरै पहुँच कर सबसे पहले माँ मिनाक्षी और देवों के देव महादेव के दर्शन किऐ और आशीर्वाद लिया। दर्शन के बाद साधवी श्री भगवती बाईजी श्री श्री १००८ श्री राजारामजी के मन्दिर मदुरै मे पहुँचे वहाँ पर कन्या के द्वारा व धर्म प्रेमियों ने पुष्प व गुलाल से श्री साधवी श्री भगवती बाईजी का स्वागत किया । स्वागत के बाद साधवी मन्दिर में पहुँच कर अपने गुरू महाराज श्री राजेशवर भगवान के सामने दण्ड मस्तक करके गुरू महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया । मन्दिर के बाद श्री साधवी श्री भगवती बाईजी श्री लीलादेवी भवन पहुँची जहाँ पर हज़ारों में एकत्रित सभी समाज के भाई व बहिनें पहले से ही श्री साधवी के इन्तज़ार में अपनी अपनी निगाहें लगा बैठे थे जेसे ही साधवी श्री भगवती बाईजी श्री लीलादेवी भवन के आगे पहुँचे तो हज़ारों में एकत्रित श्रध्दालुओं ने जय जय कार करनी शुरू कर दी

जय राजेशवर भगवान की
जय आँजणा माता की
जय हँजा मैया की
जय गुरू महाराज की
जय मिनाक्षी माँ की

यह सब जयकारा इतना गुँज गया की देखते ही देखते और भी कई लोग एकत्रित हो गऐ यह नज़ारा दैख कर ऐसा प्रतीत हो रहा था कि मानों सब एक ही माँ का परीवार हो लेकिन इस जयकारे में सभी समाज के धर्म प्रेमी एकत्रित थे । इसके बाद लोगों ने श्री भगवती मैया के दर्शन किऐ और प्रसाद के रूप आशीर्वाद लिया एक भजन के रूप मे भगवान का नाम लिया उसके कुछ शब्द इस प्रकार थे

ऊँ नारायण नारायण नारायण नारायण नारायण (९ बार)

बर्मा नारायण नारायण नारायण नारायण नारायण (९ बार)

विष्णु नारायण नारायण नारायण नारायण नारायण (९ बार)

शिव नारायण नारायण नारायण नारायण नारायण (९ बार)

ऐसे यह भजन इतना सुहाना था सब सज्जन लोग इस भजन रूपी ज्ञान की गंगा मे धर्म प्रेमियों ने भी जम कर ढुबकिया लगाने लगे प्रवचन के बाद महा प्रसाद का आरम्भ किया गया सभी धर्म प्रेमियों ने महा प्रसाद को ग्रहण किया । और क़रीबन २pm को साधवी श्री भगवती बाईजी ने मदुरै से पुनः प्रस्थान करने को कहा तो समाज के बन्धुओं के चेहरे पर मायुसी चाहते देखकर श्री साधवी ने कुछ पल और सज्जनों के बिच रहने का फ़ैसला किया । तो फिर चेहरे पर रोनक देखने को मिली लेकिन यह सब को पता है कि यह रोनक लम्बी लम्बे समय तक नहीं ठहरनी है ।  और आख़िरी वह घड़ी आगई श्री साधवी से पुनः प्रस्थान करने का निर्णय कर लिया कईयो के आँखों में आँसु देखने को मिले तब जाकर श्री साधवी ने कहा मिलना बिछुड़ना तो संसार का नियम है और साधवी ने कहा कि मदुरै वासियों के प्रेम भाव से ख़ुद प्रेरित हु लेकिन प्रस्थान तो करना पड़ेगा आगे और भी भक्त धर्म प्रेमी इन्तज़ार कर रहे है मदुरै से क़रीबन ३Pm श्री साधवी तिरूची के लिए प्रस्थान किया वहाँ पर चाय पानी करते ही सेलम के लिए प्रस्थान करेंगे ।  रात्रि भोज सेलम आँजणा समाज द्वारा आजोजित किया गया है

 

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