नर्मदा बचाओं आंदोलन

राहुल यादवः राजघाट, नर्मदा किनारे, महिला शक्ति नर्मदा बचाने और गांव खेत बचाने के लिए पूरी ताकत से जुड़ती जा रही है।‘ जीवन अधिकार सत्याग्रह के 7वें दिन भी महिलाएं गांव-गांव से निकल कर 24 घण्टें के क्रमिक सत्याग्रह पर बैठ रही है। बहनों की इज्जत है किसमें घर गांव बचाने में इस नारे के साथ उसकी आवज बुलद होती जा रही है। जब कि निमाड की भजन किर्तन की परम्पम्रा भी मां रेवा के नाम चलते भजनों से आधी रात तक ये महिलाएं और भजननिपुन कलाकार डूब क्षंत्र के कवठी गांव के पन्नालाल पाटीदार और पिपलुद के कैलाश भाई जैसे उजाकर कर रहे है। दूसरी और रोज सुबह 8 बजे की प्रार्थना से लेकर विविध नारे, संघर्ष गीतों से भी गुज रही है। आंदोलन की आवाज।

ग्राम बोरखेडी ग्राम कवठी ग्राम कसरावद व कुण्डिया व बोधवाडा ये बडवानी कुक्षी मनावर तहसिलों के गांव के सैकडों लोग जिलाधीश श्री गंगवाल को मिल कर आपना पत्र मुख्यमंत्री के नाम देकर आये तथा जिलाधीश को सुना कर आये कि हमारा गांव जीवित है, और हमें अवैध गैरकानूनी रूप से डूबोने की कोशिश करोगें तो हम भी टकराएंगे जरूर।

सत्याग्रह स्थल पर गांव-गांव ने लिखे ग्राम सेमल्दा, गोपालपुरा (मनावर), निसरपुर, खापरखेडा (कुक्षी), पिपलुद, कुण्डिया (बडवानी) पिछोडी (बडवानी) के पत्र प्रधानंमत्री के नाम भेजे गये है। गांववासियों ने लिखे उनके मन की बात उनका कहाना है कि नर्मदा हमारी माता है, यहां कि धरती खेती फलोंघान हमारे सार्वजिनक स्थल आदि के साथ हम जी रहे है। हमारी जीविका बांध की डूब से छीनकर, वैकल्पिक आजीविका-किसानों को दूसरी जमीन और भूमिहीनों को दूसरा व्यवसाय- न देते हुए हमें बरबाद करना हमें नामंजुर है। हम डटे है सत्याग्रह पर हम नहीं हटेंगे सामना करंेगे गांव-गांव ने आपने आपने निवासीयों से आनाज, कहीं नीबूं तो कहीं केला लाकर और हर रोज अपने खाने के साथ अन्य महमानों और ग्रामवासियों के लिए भोजन पैकेट्स आकर सत्यग्रह का खर्च चला रहे है। किसी ने दरी तो किसी ने पंखें दान में दिये है।

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