भारत-अफगानिस्तान के अटूट संबंध: मुखर्जी

नई दिल्ली। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने बुधवार को कहा कि भारत और अफगानिस्तान के बीच अटूट विश्वास और आपसी समझदारी वाला जो संबंध है, वह राजनीति या रणनीतिक तर्को से परे है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध न तो कभी खत्म होंगे और न ही इसके समाप्त होने की कोई समयसीमा है।
राष्ट्रपति भवन में मंगलवार को, भारत दौरे पर आए अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी के लिए आयोजित औपचारिक स्वागत समारोह में राष्ट्रपति मुखर्जी ने ये बातें कही। मुखर्जी ने अफगानिस्तान के बडखशां प्रांत में मंगलवार को भूस्खलन में 52 लोगों की मौत पर शोक संवेदना भी व्यक्त की।
राष्ट्रपति भवन की ओर से बुधवार को जारी वक्तव्य में मुखर्जी ने कहा कि भारत गनी के अफगानिस्तान को एक मजबूत, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने के गनी के लक्ष्य का समर्थन करता है तथा अफगान के नेतृत्व वाली और अफगानिस्तान की ओर से अफगानिस्तान के संविधान सम्मत राष्ट्रीय समन्वय प्रक्रिया को भारत अपना समर्थन देता है।
मुखर्जी ने कहा, एक मित्र और पड़ोसी देश के तौर पर भारत हमेशा अफगानिस्तान के साथ खड़ा है। अफगानिस्तान के राष्ट्र के रूप में निर्माण और समावेशी विकास में अफगानवासियों के साथ अपनी क्षमताओं एवं अनुभवों को साझा करने को भारत अपना सौभाग्य मानता है।
मुखर्जी ने कहा कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय कारोबार को बढ़ाने की कोशिशें की जा रही हैं। दोनों देशों के बीच 2013-14 के बीच 68.31 करोड़ डॉलर का द्विपक्षीय कारोबार हुआ। 2003 से 2013 के बीच भारत की करीब 17 कंपनियों ने अफगानिस्तान में 1.7 करोड़ डॉलर का निवेश किया। मुखर्जी ने कहा, अफगानिस्तान में और निवेश करने के लिए भारत कंपनियों को प्रोत्साहित करेगा। राष्ट्रपति भवन परिसर के भीतर द्वारका सूट में ठहरे गनी ने कहा कि राष्ट्रपति भवन में ठहरने का निमंत्रण उनके लिए अद्वितीय सम्मान की बात है।

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