अहमदाबाद में डेंगू की चपेट में आने से 10 लोगों की मौत

अहमदाबाद/गुजरात, हार्दिक हरसोरा : अहमदाबाद, जेएनएन गुजरात के अहमदाबाद में डेंगू की बीमारी ने पांच साल का रिकार्ड तोड़ दिया है। पिछले पांच साल की तुलना में डेंगू के इस साल अधिक 3345 मामले दर्ज हुए है। इस बीमारी से इस साल 10 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग की ओर से यह रिपोर्ट जारी की गई है। विपक्ष का आरोप है कि डेंगू की मरीजों की संख्या पांच हजार के पार है व मरने वालों की संख्या भी अधिक है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग बीमारियों के रोकथाम के बजाय मरीजों के आकंडे छिपाने में लगी हुई है।

शहर में बारिश के बाद जगह.जगह गंदकी व पानी भरे रहने से मच्छरों का उपद्रव बढ़ गया। मच्छरजन्य रोगों से लोगों की हालत खराब है। महानगरपालिका के स्वास्थ्य विभाग डोर टू डोर सर्वे कर फोकिंग व दवाइयों का छिड़काव करने का दावा कर रही है। इसके बाद भी शहर में इस साल डेंगू, मलेरिया, पीलिया, टाइफाइड के मामले बढ़ गए। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक अहमदाबाद शहर में इस साल डेंगू के 3345 मामले दर्ज हुए हैं। जिसमें 10 लोगों की मौत हो गई। सादा मलेरिया के 3901, जहरी मलेरिया 157 डेंगू 1085 मामले दर्ज हुए हैं। डेंगू के सबसे ज्यादा शिकार बच्चे हो रहे हैं।

महानगर पालिका के स्वास्थ्य विभाग ने बीमारियों के रोकथाम के लिए 15 हजार से अधिक कन्स्ट्रक्शन साइट पर चेकिंग कर नोटिस व दंड वसूला है। जनवरी से नवंबर तक 12 लाख लोगों के घर जाकर ब्लड कके सैंपल लिए गए हैं। मनपा ने 21 लाख 83 हजार घरों की जांच की है, जिसमे पांच लाख से अधिक घरों में दो से तीन बार जांच की गई है। अहमदाबाद की सबसे बड़ी सिविल अस्पताल में इस साल डेंगू के 1400 मामले दर्ज हुए हैं, जिसमें सबसे अधिक बारिश के बाद पिछले महीने अक्टूबर में 808 मामले सामने आयेएहै। डेंगू के अलावा मलेरिया के भी मामले चिंता जनक है।

महानगर पालिका मे विपक्ष कांग्रेस ने स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े को बेबुनिया बताते हुए आरोप लगाया है कि केवल सरकारी अस्पताल में ही डेंगू के मामले पांच हजार से अधिक है। निजी अस्पतालो में तो डेंगू सहित मच्छरजन्य व पानीजनित बीमारियों से मरीज भरे पड़े हैं। क्लिनिकों मे मरीजों की लंबी लाइन दिखन को मिल रही है। महानगर पालिका मच्छरजनति बीमारियों को रोकथाम में असफल रहने से लोगों को गुमराह करने के लिए झूठे दावे कर रहा है। इस साल डेंगू से पांच साल का नहीं 10 साल का रिकार्ड टूट गया है।

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