अशोक गहलोत सरकार पर तबादले व विभागीय फेरबदल से तो हमेशा से ही चर्चा

जोधपुर/राजस्थान, जितेन्द्र सोनीः लगभग छः माह पुर्व बनी राजस्थान कि अशोक गहलोत सरकार पर तबादले व विभागीय फेरबदल से तो हमेशा से ही चर्चा मंे रही है। परन्तु अभी गत दिनों में हुए अकल्पनीय बलात्कारांे से फिर सुर्खियों मंे आ गयी है। इसे प्रशासनिक लापरवाही कहे या जानबूझकर की गयी विसंगति। परन्तु हालात जैसे बने हंै यह कहना ही सही होगा कि सरकार कि कमजोरी अब जनता पर कयामत बन कर टुटी है। 142 दिनों मंे 178 दुष्कर्म कि हेडलाइन बने राजस्थान के मुख्य प्रष्ट अब अशोक जी के लिये मुसीबत बनते जा रहे हैं। जहां विपक्षी पार्टी इस विषय पर जन समर्थन ले सरकार को घेरने में लगी है वहीं सरकारी मंत्री अब तक बयान बाजी से ही उपर नहीं आ पा रहे हैं आपको यह भी बता दे कि इन 178 दुष्कर्म कि शिकायतांे में 61 केस तो नाबालिक के ही है व कई केस तो ऐसे भी सामने आये है जिनमें सम्बंधित थाना अधिकारी ने तीन से चार दिनांे तक एफआईआर तक नहीं होने दी व कुछ मामलो मे दुष्कर्म के बाद आतताईयांे ने विडियो भी वायरल कर दिये थे। ऐसे में महिलाओं के न्याय की बात करने वाली एक मजबुत सरकार के राज में ऐसी लापरवाही बहुत बडा धक्का है। सलग्न सूची प्राप्त जानकारी तक कुछ दिनों में हुए अपराधांे की।

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