कलयुगी बेटों ने अपनी मां के साथ मारपीट कर घर से निकाल दिया बाहर

चैमूं, विकास शर्माः शहर में एक बार फिर ममता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। कलयुगी पुत्रो-पुत्रवधुओं ने अपनी बूढ़ी मां को अपने ही घर से दर-दर की ठोकरे खाने को मजबूर कर दिया है। कलयुगी बेटों ने अपनी बूूूूढी मां के साथ इतना अत्याचार किया, कि उसे 2 दिन तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा। एक ऐसी बूढ़ी अभागिन मां जो अपनी ही कोख से जन्म ली चारों संतानों की प्रताड़ना का आज शिकार बन गई।
चैमूं थाना इलाके के भौड्या की ढाणी की रहने वाली करीब 75 वर्षीय कमली देवी कुमावत को आज अपने ही घर से बेघर होकर दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही है। बूढ़ी मां के चार पुत्र है। चारों बेटे और बहू रोजाना उसके साथ मारपीट करते हैं, उसके साथ अत्याचार किया जाता है। खाने के नाम पर लात घूसे मिलते हैं। रहने के लिए खुला आसमान। इस महिला का सिर्फ इतना ही गूनाह था कि इसने अपने वंश को बढ़ाना चाहाए खुशियां बटोरने चाही, बेटा, बहु, पोते, पोतियों के संग रहना चाहती थी लेकिन इस महिला को बदले में सिर्फ अत्याचार, मारपीट और घर से बेघर होना ही लिखा था। पीड़ित बूढ़ी मां का पति 45 वर्ष पूर्व ही स्वर्गवास सिधार गए। तब से बूढ़ी मां अपने परिवार का मेहनत मजदूरी कर पालन पोषण कर रही थी। लेकिन उसे क्या पता था कि आज उसी के बेटे उसके दुश्मन बनकर उसके साथ अत्याचार करेंगे।
बूढ़ी मां के चारो बेटे हर तरह से सक्षम है, अपने बच्चों को अच्छी पढ़ाई करवा रहे हैं, अच्छा रहना अच्छा खाना खाते हैंए लेकिन सिर्फ अपनी मां के लिए ही उनके पास कुछ नहीं है। सिर्फ मारपीट और अत्याचार के अलावा। अपने बेटे और बहूआंे के अत्याचार और मारपीट के बाद जब उसे चैमू पुलिस द्वारा राजकीय चिकित्सालय में भर्ती करवाया गया, तो बूढी मां ने पुलिस से भी न्याय की गुहार की, लेकिन पुलिस ने घर परिवार का मामला समझ कर मामले को गंभीर नहीं लिया। लिहाजा उसे 2 दिन तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा। इसके बाद वह पूछते पूछते वह अपने न्याय के लिए वह एसीपी कार्यालय तक पहुंच गई। यहां उसे एक फरिश्ता मिलता है, एक समाजसेवी के रूप में एक व्यक्ति ने उसे पूछा, मां तू क्यों दुखी है। बूढ़ी मां ने अपनी सारी आपबीती सुनाई। इस फरिश्ते की आंखों में भी आंसू आ गए और उसने तुरंत इस महिला को आॅटो में बिठा कर चैमूं नगरपालिका रैन बसेरे में लेकर आया और उसे खाना खिलाया। लगातार चार दिन तक रेन बसेरे में अपना जीवन यापन कर रही इस महिला का जब नगर पालिका चेयरमैन अर्चना कुमावत को पता चला तो उनका दिल भी पसीज गया। एक महिला होने के नाते एक मां का दर्द सिर्फ एक मां ही समझ सकती है। चेयरमैन अर्चना कुमावत ने उससे सारी वह बातें पूछी तो उसके साथ घटित हुई। चेयरमैन ने तुरंत मीडिया और प्रशासन को इसकी सूचना दी। चेयरमैन ने बताया कि बूढ़ी मां के रहने खाने की व्यवस्था नगर पालिका कर रही है। यहां तक कि समाज की ओर से इस बूढ़ी मां को रखने के लिए बेटों को काफी समझाइस भी की, लेकिन चाथो बेटे अपनी मां को अपने पास रखना नहीं चाहते। चेयरमैन अर्चना कुमावत ने कहा कि 9 महीने कोख में पाला फिर मेहनत मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण किया और आज खुद वह दर-दर की ठोकरे खाने को मजबूर है, कम से कम ये चारों बेटे अपनी मां के दूध का कर्ज ही चुका देते।
अब सवाल कई खड़े होते हैं कि आखिर इन कलयुगी बेटो व बहुओं पर क्या कार्यवाही होगी, क्या इस महिला को न्याय मिल पाएगा। सरकार एक ओर कहती हैै कि महिलाओं को सुरक्षा दी जाएगी, महिलाओं के अत्याचार को सहा नहीं जाएगा महिलाओं के साथ अत्याचार करने वालों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी। लेकिन ऐसा कहीं भी देता नजर नहीं आ रहा। हम यहीं अपील करते हैं कि इस महिला के सहयोग और न्याय के लिए लोग आगे आए और दरिंदेे बेटो बहुओं को सबक सिखाया जाये।

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