सीएम का ओएसडी बनकर डीएम को धमकाने वाले वार्ड ब्वाय को मिली जमानत

फतेहपुर, मो. तौशीफ : किशनपुर, सीएम का ओएसडी बनकर डीएम को धमकाने वाले वार्ड ब्वाय को मिली जमानत। विवेचक ने आरोपी पर लगाई है सुप्रीम कोर्ट के जरिए असंवैधानिक बतायी गयी 66-ए की धारा। पुलिस की मनमानी कार्यशैली के चलते अभियोजन पक्ष पेश नहीं कर सका सटीक तर्क! 66-ए की धारा लगाने पर सम्बंधित अधिकारी को जेल भेजने तक की सुप्रीम कोर्ट ने दी है चेतावनी… (1) सुलतानपुर। सीएम का ओएसडी बनकर डीएम को धमकाने के मामले में पुलिस ने 66-ए आईटी एक्ट समेत अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज किया। जिसके बाद करीब सवा माह तक पुलिस ने अपनी तफ्तीश जारी रखते हुए आरोपी वार्ड ब्वाय का नाम प्रकाश में लाते हुए उसे इन्हीं धाराओं में जेल भी भेजा जबकि सुप्रीम कोर्ट ने इस आईटी एक्ट की धारा को करीब साढ़े तीन वर्ष पूर्व ही असंवैधानिक करार दे दिया है। शायद यही वजह रही कि पुलिस के इस कारनामे का लाभ आरोपी को इस कदर मिला कि एडीजे द्वितीय की अदालत में उसकी तरफ से प्रस्तुत जमानत अर्जी स्वीकार कर ली गयी। अभियोजन की इस कमजोरी के पीछे विवेचक की ही घोर लापरवाही मानी जा रही है। विदित हो कि जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा.वीबी सिंह के खिलाफ स्टाफ नर्सों ने गंभीर आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी विवेक से शिकायत की थी। जिस पर संज्ञान लेते हुए डीएम ने जांच के लिए आदेशित किया था। जिसके बाद बीते 23 नवम्बर को डीएम के सीयूजी नम्बर पर मोबाइल नं. 9453150300 से फोन करने वाले व्यक्ति ने अपना नाम धर्मेंद्र चौधरी बताते हुए अपने को सीएम का विशेष कार्याधिकारी बताया। आरोप है कि फोन करने वाले व्यक्ति ने अपने पद का धौस जताते हुए स्टाफ नर्सों के जरिए सीएमएस के खिलाफ हुई शिकायत को फर्जी बताया आैर प्रस्तावित जांच की कार्यवाही को तत्काल समाप्त करने के लिए भी कहा। फोन करने वाले की बात सुनकर संदेह होने पर डीएम ने जब इस बात की पुष्टि करने के लिए सीएम के विशेष कार्याधिकारी धर्मेन्द्र चौधरी की मोबाइल पर वार्ता की तो उनके जरिए इस प्रकार से की गयी किसी भी वार्ता पर अनभिज्ञता जतायी गयी। मामले में जिलाधिकारी विवेक के निर्देश पर डीएम कंट्रोल रूम के कैंप सहायक राकेश कुमार के जरिए कोतवाली में तहरीर दी गयी। जिस पर अज्ञात मोबाइल धारक के खिलाफ भादवि की धारा 420 व 66 ए आईटी एक्ट के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया। तफ्तीश के दौरान पुलिस ने केस दर्ज होने के करीब सवा महीने बाद आरोपी संविदाकर्मी वार्ड ब्वाय अंकेश कुमार निवासी दादूपुर-धम्मौर का नाम प्रकाश में लाते हुए बीते 29 दिसम्बर को उसकी गिरफ्तारी कर जेल भेजने की कार्यवाही की। इस दौरान भी विवेचक हरिराम यादव के जरिए आरोपी के खिलाफ 420 के अलावा धारा 419 भादवि की बढ़ोत्तरी कर एवं 66-ए आईटी एक्ट के आरोप में जेल भेजा गया,जबकि विधिक जानकारों की माने तो जिस 66-ए आईटी एक्ट की धारा को पुलिस ने एफआईआर से लेकर आरोपी अंकेश को जेल भेजने तक लगाया है। वह धारा वर्ष 2015 में ही सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक करार दे दिया है। बावजूद इसके इस धारा को आरोपी के खिलाफ पुलिस ने आखिर क्यों लगाया है, इसका सही जवाब भी पुलिस के पास नहीं है, जबकि असंवैधानिक करार दिये जाने के बावजूद धारा 66-ए आईटी एक्ट लगाने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्यवाही कर जेल भेजने तक की भी चेतावनी सुप्रीम कोर्ट ने दी है। ऐसे में विवेचक की इस कार्यशैली से यह माना जा रहा है कि इस हाई-प्रोफाइल मामले में दर्ज की गयी जिस धारा 66-ए आईटी एक्ट की तफ्तीश विवेचक कर रहे हैं, शायद उसकी उन्हें सही जानकारी ही नहीं है या फिर उन्होंने सरसरी तौर पर विवेचना कर यह धारा आरोपी पर लगा दी है या फिर आरोपी को लाभ पहुंचाने की नीयत से जान बूझकर कागजी खेल किया जा रहा है। विवेचक की इस गैर जिम्मेदाराना हरकत के विषय में उनसे पूंछा गया तो उन्होंने सटीक जवाब न देकर अपनी करतूत को जाहिर न करने का प्रयास करते हुए गोलमोल जवाब दिया। विवेचक की यह कार्यशैली सुर्खियों में है। बावजूद इसके जिम्मेदार उच्चाधिकारी अब भी बेखबर बने हुए हैं। गुरुवार को इस मामले में आरोपी अंकेश की तरफ से अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय की अदालत में जमानत अर्जी पर सुनवाई चली। इस दौरान बचाव पक्ष की तरफ से पैरवी कर रहे पूर्व जिला शासकीय अधिवक्ता शुकदेव यादव ने अपने तर्क प्रस्तुत करते हुए कहा कि जिस दिन की घटना बताते हुए डीएम कैंप कार्यालय के सहायक ने मुकदमा दर्ज कराया है,उसी दिन घटना के करीब डेढ़ घंटे पहले आरोपी वार्ड ब्वाय ड्यूटी करने के लिए जिला अस्पताल पहुंचा था,जिसका मोबाइल कहीं गायब हो गया तो उसने अपने सहकर्मियों से पूछा लेकिन कोई जानकारी मोबाइल के विषय में नहीं मिल सकी तो उसने कोतवाली जाकर भी मोबाइल गायब होने की सूचना दी। फिलहाल पुलिस ने मामले को हल्के में लेते हुए आरोपी अंकेश से मोबाइल ढूंढने के लिए कहा आैर तब भी न मिलने पर सूचना दर्ज कर लेने का आश्वासन देते हुए उसे वापस भेज दिया। जिसके बाद देर शाम तक मोबाइल न मिलने पर उसी दिन अंकेश ने आनलाइन मोबाइल खोने की सूचना दर्ज करायी है। बचाव पक्ष ने अंकेश की गिरफ्तारी पर भी सवाल उठाते हुए पुलिस पर हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन न करने एवं अभी तक घटना में प्रयुक्त बताई जा रही मोबाइल भी बरामद न कर पाने का भी तर्क पेश किया। इन तर्कों के आधार पर बचाव पक्ष ने अंकेश पर लगे आरोपों को निराधार बताते हुए जमानत की मांग की। वहीं अभियोजन पक्ष ने अपराध गंभीर बताते हुए जमानत पर विरोध जताया लेकिन पुलिस की मनमानी कार्यशैली के चलते अभियोजन कमजोर दिखा। उभय पक्षों को सुनने के पश्चात सत्र न्यायाधीश श्यामजीत यादव ने आरोपी की जमानत के लिए पर्याप्त आधार पाते हुए उसे जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। पूर्व बीडीसी ने बंधक बनाकर छप्पर मे आग लगाने का लगाया आरोप, आठ के खिलाफ केस दर्ज (2) पीपरपुर-अमेठी। पूर्व बीडीसी को बंधक बनाकर उसकी मछली जबरन पकड़ ले जाने एवं आगजनी के मामले में पुलिस ने चार नामजद समेत आठ के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस मामले की छानबीन में जुटी हुई है।  मामला पीपरपुर थाना क्षेत्र के मरुई गांव से जुड़ा है। जहां के रहने वाले पूर्व बीडीसी राजेश यादव उर्फ पप्पू ने बीते बुधवार की रात को हुई घटना का जिक्र करते हुए गांव के ही चार नामजद व उनके चार अज्ञात साथियों के खिलाफ पेड़ से उसे बांधकर तालाब में पाली गयी उसकी मछली जबरन पकड़ ले जाने एवं उसके रहाईशी छप्पर में आग लगा देने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया है। थानाध्यक्ष श्याम सुंदर ने बताया कि तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। घटना की सच्चाई जानने के लिए तफ्तीश जारी है। छह न्यायिक कर्मियों के कार्यक्षेत्र में फेरबदल (3) सुलतानपुर । जिला जज उमेश चन्द्र शर्मा ने छह न्यायिक कर्मचारियों के कार्य क्षेत्र में फेरबदल किया है। जिसके क्रम में जितेंद्र कुमार सिंह को नाजिर पद की जिम्मेदारी सौंपी गयी है, वहीं अवधेश कुमार ओझा को एसीजेएम प्रथम का पेशकार, रामनरेश को कुटुम्ब न्यायालय का मुंसरिम, मो.अफजल को अभिलेखागार का रिकार्ड कीपर, मिट्ठूराम को एसीजेएम षष्ठम का अहलमद एवं रवि प्रकाश श्रीवास्तव को अपर सिविल जज-जूनियर डिवीजन कक्ष संख्या 29 के पेशकार पद की जिम्मेदारी सौंपी गयी है। बल्बा व हमले के आरोपी सगे भाइयों की अंतरिम जमानत खारिज (4) सुल्तानपुर। बल्बा व हमले समेत अन्य आरोपो से जुड़े मामले मे तीन सगे भाइयो की तरफ से जिला एवं सत्र न्यायालय में जमानत अर्जी प्रस्तुत की गई। जिस पर सुनवाई के पश्चात प्रभारी सत्र न्यायाधीश ने आरोपियो की अंतरिम जमानत खारिज कर दी। मामला बाजार शुकुल थाना क्षेत्र के हसनपुर मिरुरी गांव से जुड़ा है। जहां के रहने राजेश मिश्र ने करीब दो वर्ष पूर्व मुकदमा दर्ज कराया। आरोप के मुताबिक रास्ते का विवाद निपटाने राजस्व टीम आई थी। इस दौरान आरोपियो ने बल्बा व हमला किया। इस मामले में 34 नामजद व 30-40 अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ। मामले मे सगे भाई अमरेंद्र, जितेंद्र, धर्मेद्र की तरफ से जिला एवं सत्र न्यायालय में जमानत अर्जी प्रस्तुत की गई। जिस पर सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने तीनों भाइयों का आपराधिक इतिहास होने का जिक्र करते हुए अंतरिम जमानत पर विरोध जताया। ततपश्चात अदालत ने उनकी अंतरिम जमानत अर्जी खारिज कर दी।

Share This Post

Post Comment