तमिलनाडु राज्य सरकार के अनुसार तमिलनाडु में प्लास्टिक रोक लगाने से सुधार

तमिलनाडु, वासुदेव दधिची : तमिलनाडु राज्य सरकार ने प्लास्टिक केरीबैग, पेपर कप, पेपर प्लेट, दोना, वाटर कप जैसे उपयोगी सामान को बंद कर जनवरी माह से मार्केट मे ये वस्तु न बेचने और खरीदने उपयोग करने का आदेश  दिया । हालांकि ये सही है क्योंकि पर्यावरण के संरक्षण के लिए किया गया है। क्योंकि आज  तक 4-5 दिन तक का रिकॉर्ड स्तर इस तरह पहुंच गया है की रास्ते एकदम सुन्दर दिखने लगे, साफ-सफाई कुछ ज्यादा ही नजर आने लगी और प्लास्टिक की थैलियां और चाय के कप तो मार्केट मे एकदम बंध ही कर दिया गया और कोई उपयोग मे लेना तक भुला गये क्योंकि राज्य सरकार ने  नगरपालिका विभाग के  10,000 अधिकारी को नये दिशा-निर्देश के दोरान सिविल ड्रेस मे ड्यूटी पर तैनात किया है । इस दौरान यह लोग एक बार समझाकर छोङ देते है । और ना समझने पर माल जब्त करके फाइन लगाते है। प्लास्टिक बंद हो जाने के कारण यह हुआ कि आज प्लास्टिक दुकान वाले रोङ पर आ गए । मगर इसमे सरकार की कोई गलती नही है । क्योंकि तमिलनाडु राज्य सरकार ने पिछले छः महीने पहले ही सभी प्लास्टिक केरीबैग व्यापारियों को खुलकर बता दिया था कि आज के बाद नया माल ना खरीदे । और पुराने माल को जल्द से जल्द खत्म करने की कोशिश करे और  1जनवरी 2019 तक का खुला समय बताया गया था । परन्तु प्लास्टिक व्यापार करने वाले को इस बात पर कोई असर नही पङा । बल्कि ज्यादा माल खरीदने बेचना शुरू कर दिया । हालांकि सरकार के फैसले का विरोध करना गलत है । मगर इस बात का असर भी जनता को ज्यादा पङेगा । क्योंकि प्लास्टिक केरिबेग की जगह महंगी कपड़े की थेली खरीदना । और पेपर कप प्लेट की जगह काच या चिन्नी मिट्टी और स्टील के बर्तन को प्रयोग मे लाना  बहुत से कठिनाईयो का सामना करना पड़ेगा । और इस तरह फायदा ये होता है क्योंकि पहले पेपर प्लेट और केरीबैग कचरे के ढेर मे फेंकते थे । जो गंदगी फैलाने के साथ साथ गाये भी खाती थी और जिससे उनके शरीर मे फंस जाने पर मोत हो जाती और जो गाये दुध देती थी । उनका दुध भी शुद्ध नही होता क्योंकि गाये प्लास्टिक और पेपर खाती थी । जो दुध उपयोग करने से लोगो को बीमारी का सामना करना पड़ता था । प्लास्टिक के लिए कुछ दुखी हुए लोगो के विचार – कुछ लोग कहना चाहते है कि अगर सरकार ये फैसला कर लिया है तो हम नाराज नही है । और इस फैसले के लिए सरकार को पहले सीधा निशाना उन फैक्ट्रियों पर साधना चाहिए जो प्लास्टिक बना रहे है । छोटे बङे व्यापारी लोगो को क्यो कष्ट दे रहे है । अगर प्लास्टिक की थैली और कप उपयोग मे नही लेना है तो कुरकुरे, चिप्स, नमकीन, बिस्कुट,दूध, दही, पानी, हल्दी, मिर्च, धनिया, मसाले उत्पाद और प्लास्टिक मे पेकिंग की गई प्रत्येक सामग्री पर लगे कवर पर रोक क्यु नही लगाया । केवल रोजमर्रा की वस्तुओं पर ही क्यो लगाया । इस प्रक्रिया की शुरुआत सबसे पहले अगर इन पेकिंग सामग्री और प्लास्टिक फैक्ट्री पर फॉलो करे । जिसके बाद प्लास्टिक का मार्केट मे आना भी बंद हो जायेगा । और हमारे लिए बेचना भी हम बंद कर देगे । (जब माल ही नही बनायेंगे तो बेचना और उपयोग मे लाना तो हो ही नही सकता ) किराणा, ऑटोमोबाइल, मोबाइल, कोलड्रीक, पानी, फोन और सभी सामग्री को प्लास्टिक के पेकिंग पर पाबंदी लगा देना चाहिए और बाद मे प्लास्टिक रोक लगाने की योजना बनाना चाहिए । और लोगो के साथ जो हुआ कोई बात नही मगर रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर भी प्लास्टिक बोटल और पेपर के उपयोग को बंद करना होगा । पत्रकार वार्ता तमिलनाडु के प्लास्टिक ऐसोसियन से पता चला है कि प्लास्टिक व्यापारी के गठन के  निर्णयात्मक आदेशानुसार आज 3-4 दिनो से सभी प्लास्टिक व्यापार दुकानदार दुकान के ताले लगाकर घर पर बैठे है। प्लास्टिक बंद हो जाने से 1-2 दिन तक तो लोगो को परेशान होना पङा- अनजान व्यक्ति को बिना बेग लेकर बाज़ार जाना पड़ रहा है। वो खाली हाथ वापस लौटना पङ रहा है । और चाय वाले तो कप भी नही रख सकते पुलिस पकड़ रही है । हमारी राय है कि केन्द्र सरकार को भी तमिलनाडु सरकार के फैसले को सही साबित करने के लिए पूरे देश मे प्लास्टिक केरीबैग पेपर की सामग्री पर रोक लगानी चाहिए । केन्द्र सरकार को कुछ सोचने समझने की जरूरत होती है और प्लास्टिक के बने सभी उत्पाद पर पाबंदी लगा दी जाएगी तो अपने देश मे पुरानी परंपरा अपने आप कायम हो सकती है । पुराने समय मे हमारे पूर्वज तो माटी के बर्तन उपयोग करने से बीमारी नही होती । उसी तरह आज भी ऐसे ही होना चाहिए ।

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