कर्मभूमि पर खर्च करने से ज्यादा जन्मभूमि पर ध्यान खर्च करो

तमिलनाडु, वासुदेव दाधिच : एक दिन सभी मारवाड़ियों को देसावर ख़ाली करके मारवाड़ भागना पड़ेगा, शुरुआत हो चुकी है, आए दिन ये घटनाए हो रही है मारवाड़ियों के साथ,….संभल जाइए अभी भी वक़्त है एक हो जाइए अन्यथा बिखरते देर ना लगेगी। जूने ज़माने में कोई एक सम्प्रदाय यहाँ देसावर आकर दुकान करता था और कई लोग उनके साथ काम करते थे, मगर आज माहोल बदला। मारवाड़ के हर एक युवा ने खेती बाड़ी छोड़ी और हर एक छोटे छोटे गाँवो में फैलकर दुकाने करने लगा है, बस उसका एक ही मक़सद होता है की कुछ भी उलटा सीधा-आड़ा टेड़ा रिस्क का काम करके रूपया कमाना!!! अब चारों तरफ़ देखिए मारवाड़ी आडंबर ही आडंबर को फेला रहा है, देखा देखी प्रति इस प्रर्था में फ़िज़ूल खर्ची बढ़ा रहा है, सादगी को छोड़ युवा मारवाड़ी महंगी कारे, महेंगे कपड़े, महंगे शोक, महंगी बिल्डिंगे के आडंबर में पड़ गया है, महाविवाह की भरमार में बेइंतेहा पेसा पानी की तरह बहाकर सारी हदें तोड़ना, हर कार्यक्रम में सोने चाँदी के सिक्के मुफ़्त बाटना, मामेरो में आँकड़े के रिकार्ड तोड़ देना, और जिन मंदिर में एक दूसरे की प्रतिस्पर्धा में लाखों करोड़ों की बोली बोलकर बेकार बेमतलब के कई भवन एवं बिन ज़रूरत के मंदिर यदि बनना या रूपयो को जमा करके ब्याज पर घुमाना। और तो और जैनियों के संसार त्यागी सन्यासी साधु भगवंतो के प्रवेश में भव्यती भव्या प्रवेश करवा कर उशमे लाखों रूपयों को पानी की तरह बहा देना, आज कल एक ट्रेड चला है जिस भी साधु भगवंत के चातुर्मास में जितने ज़्यादा ख़र्चीले कार्यक्रम होंगे? वो सबसे ज़्यादा नामदार! और  प्रभु भक्ति के नाम मंदिरो में लाखों करोड़ों रुपयों के चढ़ावे बेमतलब के बुलवाए जाते है, सिर्फ़ नाम के ख़ातिर, अब आप ही बताइए इतना सभी कुछ आडंबर प्रदर्शन होने के बाद भी हम सही है एकदम? क्या हम ग़लती नहीं कर रहे है? क्या हम अपनी भावी पीढ़ी के लिए ये सारी मुसीबत परेशानियों का निर्माण नहीं कर रहे है? वो वक़्त आ चुका है कि हमें हमारे पूर्वजों के बताए रास्ते “सादा जीवन उच्च विचार – सदाचार की हद में रहना” पर चलना ही होगा, अन्यथा मारवाड़ जल्दी से जल्दी भगा दिए जाओगे। सावधान हो जाइए, ये दिखावा उकालना छोड़िए, भावी पीढ़ी के लिए साफ़ सुंदर भयरहित जीवन निर्माण में सहयोग कीजिए।

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