राजस्थान के नौजवान वीरों ने शूरवीरों की भूमिका निभाने मे कोई कमी न रखी

नागौर, वासुदेव दाधिच : राजस्थान के नागौर जिले का इतिहास बहुत पुराना है। नागौर के शूरवीरों ने गौमाता और देश रक्षा के लिए अपना योगदान और बलिदान तक दे दिया। राजस्थान (नागौर) के लोकदेवता जाट श्री वीर तेजाजी महाराज (खरनाल) जिन्होंने अपने पूरे जीवन परोपकार और अतं मे 30 वर्ष की आयु मे गौमाता के लिए जीविका तक खत्म करनी पड़ी। ऐसा ही आज हमारे न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक सामने आया है एक नागौरी युवा का नया रिकॉर्ड। ये एक ऐसे वीर की वार्ता है-सेवक । इनका कहना है कि यह अपने समाज के उसूलों पर चलने की कोशिश जारी रखना चाहते है। दाधिच समाज महर्षि दधीचि का वंशज है जिन्होंने अपने प्राण तक त्याग दिया था। संसार के लिए। दाधिची शब्द का अर्थ – अपने अंगौ का त्याग करना। शूरवीरों की धरती नागौर के मिरानगरी मेङता से जौशिले जानदार और सेवाभावी (पं देव नागौरी दाधिच) तमिलनाडु मे अपने व्यवसाय के लिए ज्योतिष कर्मकांड पुजापाठ और नोकरीदार। अपने कार्य मे इमानदारी और आत्मविश्वास की भावना को साकार करके प्रवासी राजस्थान गुजरात महाराष्ट्र उत्तरप्रदेश बिहार स्वराष्ट्रा और बहुत से तमिल वालो के दिल मे स्थान बनाया । तमिलनाडु की गौशालाऔ मे पुरा सहयोग किया । किसी बीमारी से ग्रस्त गौमाता के लिए इलाज करने की सुविधा भी उपलब्ध कराई।। अपनी मर्जी के मालिक मनमोजी इन्सान जो अपने आप से ही गौसेवा के लिए पहल करके अपने दोस्तो का सहयोग प्राप्त करके आज 3 वर्ष तक की कुल  37,60 लाख रुपयौ तक का योगदान अपनी कर्मभूमि राजस्थान के अलग अलग जगह पर गौशाला मे पहुंचाया । जिससे गौमाता के लिए चारापानी की व्यवस्था करवाई जाए। ऐसा व्यक्ति जो अपने जीवन का छोड़कर केवल गौमाता की सेवा कर गौभक्त की भूमिका निभाई और आज तक केवल किसी तरह गौमाता की भलाई करने के लिए अलग अलग तरिको से गोदान शामिल करते हुए। ऐसा करते हुए 2/3 बार राजस्थान मे इनको राज्य स्तर और जिला स्तर पर सम्मानित करके पदक हासिल किए । और आज तक राजस्थान की माने तो 7/8 नंबर पर पहुंच गए और नागौर की जिला स्तर पर प्रथम चरण पार करने के साथ ही अपने समाज  (अखिल भारतीय दायमा दाधिच ब्राह्मण  समाज) के अनुसार दूसरे महा मुकाम पर पहुंचने के लिए बङे बङे मुकाबले तक सहना पड़ा। इस तरह के युवा हमेशा देश की ताकत बनना पसंद करते है तो देश की मुश्किले खत्म हो सकती है।

पशु नही है गौ मात् ,बतलावे संतौ
।।सेवा करनी है तो खर्च मत देखो।
भक्ति करनी है तो तन मन धन लगाऔ ।।

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