बीबीएमबी प्रबंधन भाखड़ा बांध की सुरक्षा

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रूपनगर, अमित शर्मा : नंगल भाखड़ा मजदूर संघ (इंटक) ने दर्ज़ा चार के कर्मचारियों की पदोन्नति वापस लेने का कड़ा विरोध किया है आज इसी विषय पर यूनियन के प्रधान सुखदेव सिंह ने कहा कि भाखड़ा प्रबंध बोर्ड ने अपना कर्मचारी विरोधी फरमान जारी रखते हुए कर्मचारियों के साथ धोखा किया है। इन दर्जा चार 32 कर्मचारियों ने अप्रैल 2018 में लिपिक के पद के लिए टाइपिंग टैस्ट पास किया और भाखड़ा प्रबंध बोर्ड ने उन्हें लिपिक के पद का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा था जिस समय उन्हें यह कार्यभार सौंपा गया था उस समय बीबीएमबी में लिपिकों के लगभग 70 पद खाली पड़े थे। भाखड़ा प्रशासन ने इन्हें (लुक आफ्टर) चार्ज देकर बतौर लिपिक पदोन्नति दे दी थी। यह कर्मचारी इस आस में थे कि हमें लिपिक का पूर्ण पद सौंपा जाएगा लेकिन इन कर्मचारियों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। आज इन कर्मचारियों को एक पत्र जारी किया गया है जिसमें कहा गया है कि आपके लुक आफ्टर चार्ज को वापस ले लिया गया है अब आप क्लास चार का ही कार्य करेंगे। जबकि यह सभी कर्मचारी बीबीएमबी के कार्य को अच्छी तरह से निपटाने के लिए योगदान दे रहे थे। इस कर्मचारी विरोधी निर्णय से आने वाले समय में बीबीएमबी में काम कर रहे कर्मचारियों पर काम करने की क्षमता पर भी असर पड़ेगा। ऐसे फरमान सिर्फ कर्मचारियों के लिए ही निकलते हैं जबकि बीबीएमबी में कई अधिकारी लुकआफ्टर चार्ज लेकर काम करते हैं और बाद में उनकी पदोन्नति भी हो जाती है। इस पत्र पर हस्ताक्षर कर के उसे जारी करने वाले अधिकारी ने खुद लुकआफ्टर चार्ज ले रखा है लुकआफ्टर का दोहरा मापदंड अपनाने पर  यह साबित होता है कि भाखड़ा व्यास मैनेजमेंट में सब कुछ ठीक नही है। दूसरी तरफ पैस्को द्बारा भी क्लर्कों को रखा गया जोकि बीबीएमबी की भर्ती प्रक्रिया का उलंघन है। बीबीएमबी अध्यक्ष से हम माँग करते हैं कि पैस्को द्वारा भर्ती बन्द की जाए और इस सबंद में माननीय स्पीकर पंजाब विधानसभा राणा कंवरपाल सिंह से भी बात की गई और उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मसले पर बीबीएमबी प्रबंधन से बात करके हल करवाएंगे। इस मौके पर इंटक के कर्मचारी नेता प्रधान सुखदेव सिंह जनरल सेक्टरी रहमत अली अशोक कुमार, गोपाल कृष्ण गौतम, शमशेर सिंह व अन्य कर्मचारी नेता उपस्थित थे। उन्होंने कहा इसके संबंध में कर्मचारियों को इकट्ठा कर न्याय दिलाया जाएगा चाहे इसके लिए हमें कोई भी संघर्ष क्यों ना करना पड़े।

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