थार के तेल के खजाने को मानते हे देवी की कृपा

थार, खेताराम : थार के रेगिस्तान में चमत्कार के रूप में निकले तेल के खजाने के नाम भारतीय देवियों के नाम से हैं। भू- वैज्ञानिक नामोंं के अलावा हुए नामकरण में केवल मुम्बई के शहीद तुकाराम के सम्मान में एक तेल क्षेत्र है। शेष सभी भारतीय देवियां हैं। तेल क्षेत्र को लेकर ओएनजीसी ने नवरत्नों के नाम से अधिकांश तेलक्षेत्र देश को दिए हैं। जिसमें पन्ना, रावा, मुक्ता जैसे नाम प्रमुख हैं। इसके बाद केयर्न ने यहां कार्य शुरू किया तो देवियों के नाम पर तेलक्षेत्र के नामकरण प्रारंभ हुए। वर्ष 2001 में पहला तेल क्षेत्र सरस्वती खोजा गया। इसके बाद मंगला, भाग्यम्, एेश्वर्या, रागेश्वरी, कामेश्वरी, शक्ति और विजया की खोज बाड़मेर में हुई। गुजरात के सूरत के पास अम्बे और गौरी तेल क्षेत्र हैं। नवरात्र में होती है विशेष पूजा यहां तेल क्षेत्रों में देश-विदेश के लोग काम कर रहे हैं। देशभर से आए ये लोग नवरात्र में यहां विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। तेल क्षेत्र का नाम देवियों के नाम से होने से यहां पर इन देवियों की पूजा भी होती है। नौ दिन तक होने वाली पूजा-अर्चना में सभी की श्रद्धा दिखती है। बाड़मेर भरता है देश का खजाना बाड़मेर प्रतिदिन 15 करोड़ रुपए का राजस्व प्रदेश और 35 करोड़ से अधिक का राजस्व देश को दे रहा है। इन देवियों के नाम से बने तेल क्षेत्र में तेल उत्खनन लगातार हो रहा है। इतने तेल की वजह से ही रिफाइनरी भी बाड़मेर के पचपदरा में स्थापित हो रही है शेष भू- वैज्ञानिक नाम बाड़मेर में 36 तेल क्षेत्र पर उत्खनन हो रहा है। इनमें से जिनके नामकरण हुए हैं उसमें एकमात्र शहीद तुकाराम के नाम का तेलक्षेत्र है। मुम्बई के शहीद को सम्मान के लिए यह नामकरण हुआ। इसके अलावा देवियों के नाम हैं। जिनके नामकरण नहीं हुए है वे भू- वैज्ञानिक नामों से ही जाने जा रहे हैं। यह तय किया गया है यह तय किया गया कि तेलक्षेत्र के नाम देवियों के नाम पर रखे जाएंगे। इसके लिए 2001 में आए पहले नाम से ही एेसी परिपाटी हो गई। आने वाले समय में भी देवियों के नाम से ही अधिकांश तेल क्षेत्र होंगे।

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