“बड़ी खबर-एससी, एसटी एक्ट पर एमपी हाईकोर्ट का बड़ा फैसला”

जबलपुर, हार्दिक हरसौरा : अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति एससी-एसटी एक्ट पर इन दिनों देशभर में बवाल मचा हुआ है। एससी-एसटी एक्ट पर केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदम से सवर्ण लोगों में जबर्दस्त गुस्सा है और देशभर में अनेक आंदोलनों, प्रदर्शनों आदि के माध्यम से यह वर्ग इस एक्ट के कई प्रावधानों का विरोध करते हुए अपनी नाराजगी जता रहा है। इस मुद्दे पर पिछले दिनों भारत बंद का भी आयोजन किया गया था। अब इस एक्ट के संबंध में मध्यप्रदेश के हाईकोर्ट ने भी एक अहम फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के बाद साफ शब्दों में कहा कि एससी-एसटी वर्ग की महिला सामान्य वर्ग के व्यक्ति से विवाह के बाद भी जाति का लाभ लेने की हकदार है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने मंगलवार को यह फैसला सुनाया। हाईकोर्ट ने इस अहम फैसले में कहा, एससी-एसटी (अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति) महिला, सामान्य वर्ग में विवाह कर लेने के बाद भी मूल जाति का लाभ लेने की हकदार है। जस्टिस एसके पालो की सिंगल बेंच ने यह फैसला सुनाया। बेंच ने यह भी कहा कि महिला के बच्चों को यह लाभ नहीं मिल सकेगा। इसके बाद एससी-एसटी एट्रोसिटी एक्ट के तहत दर्ज मामले को चुनौती देने वाली याचिका निरस्त कर दी गई। यह है मामला – सिवनी के अतुल दुबे के खिलाफ उनकी पड़ोसन रंजना उईके ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। रंजना उईके ने अतुल दुबे के खिलाफ एससी-एसटी एट्रोसिटी एक्ट के तहत थाने में मामला दर्ज कराया था। शिकायतकर्ता का कहना था कि आरोपी ने उसे जाति के आधार पर अपमानित किया। अतुल के द्वारा जातिसूचक शब्द से अपमानित किए जाने की शिकायत कराए जाने पर उसके खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज किया गया। इसे अतुल ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। आरोपी अतुल का कहना था कि शिकायतकर्ता गोंड़ जाति का है।

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