महंगा पड़ सकता है टैक्स बचाने के लिए फर्जी बिल !

लुधियाना, संदीप मिश्रा : डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (डीजीजीआई) के डिप्टी डायरेक्टर रचना सिंह ने एक ऐसे रैकेट पर नकेल डाली है जो फर्जी बिलों पर 40 करोड़ का इनपुट क्रैडिट क्लेम कर रहा था। डीजीजीआई के अधिकारियों ने बताया कि जीएसटी इंटेलिजेंस का यह पहला केस है उन्होंने बताया की 2 फर्मों पिंगासक एंटरप्राइजिस के जङ्क्षतद्र मैनरो व श्री राधा ग्रुप के सैमी धीमान पर प्रॉसिक्यूशन के खिलाफ सैक्शन-132 ऑफ सीजीएसटी एक्ट के अंतर्गत (बिना कोई सर्विस या माल दिए बिल देना) कंप्लेंट कोर्ट ऑफ चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट में दर्ज की जा चुकी है। रचना सिंह ने बताया कि जब तक अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक इन दोनों फर्मों के मालिकों को ज्यूडिशियल कस्टडी में रखा गया है। यह देश का पहला ऐसा केस है, जिसमें करोड़ों के टैक्स चोरी का पर्दाफाश हुआ है। रचना ने बताया कि सैमी और जतिंद्र एक-दूसरे को सेल-परचेज के नकली बिलों का लेन-देन करते थे। वे केवल सेल-परचेज के इनवॉइस एक्सचेंज करते थे। पंजाब में लगभग 6 फर्मों की परचेज बुक, सेल बुक व फाइनेंशियल जांच करने पर पता चला कि कोई भी फर्म लेन-देन नहीं कर रही थी और दस्तावेज फर्जी थे। उन्होंने बताया कि इन 6 फर्मों के बारे में जांच एडिशनल कमिश्नर, एक्साइज एंड टैक्सेशन डिपार्टमैंट पंजाब द्वारा की गई थी। अधिकारियों ने पाया कि कागज पर दिखाए गए कारखानों का अस्तित्व कभी नहीं था और एक ही नकली स्टाम्प पेपर पर कई काम किए गए थे, जिनका प्रयोग बार-बार किया जाता था। क्या है इनपुट टैक्स क्रैडिट और कैसे किया फ्रॉड इनपुट टैक्स क्रैडिट अर्थात आऊटपुट पर कर चुकाने के समय निर्माता इनपुट पर भुगतान कर कम कर सकता है। उदाहरण के लिए यदि आऊटपुट पर देय कर 550 रुपए है और इनपुट (खरीद) पर चुकाया गया कर 400 रुपए तो निर्माता 400 रुपए के इनपुट क्रैडिट का दावा कर सकता है और केवल करों में 150 रुपए जमा करने की आवश्यकता होगी। कुछ इस तरह दोनों फर्में कर रही थीं। टैक्स चोरी और बिना कोई सॢवस या माल दिए बिल इशू किए जा रहे थे। असल में वे कोई भी सेल या परचेज नहीं कर रहे थे, जिसके बाद उन्होंने आई.टी.सी. क्लेम कर दिया। इसके चलते जीएसटी इंटेलिजेंस के अधिकारियों को इन फर्मों पर शक हुआ था।

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