श्री मणिमहेश कैलाश यात्रा की जानकारी 26 अगस्त से 17 सितंबर 2018

पठानकोट, अमित शर्मा : श्री मणिमहेश कैलाश यात्रा में जो भी शिव भक्त पहली बार आ रहे हैं या आना चाहते हैं वह कृपया ध्यान दें। श्री मणिमहेश कैलाश यात्रा हर वर्ष रक्षा बंधन, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से शुरू होती है और राधा अष्टमी को सम्पूर्ण होती है। जोकि इस बार आधिकारिक तौर पर 26 अगस्त 2018 से 17 सितंबर 2018 तक चलेगी जिसमे पहला स्नान रक्षा बंधन, दूसरा जनमाष्टमी और अंतिम स्नान जिसको बड़ा स्नान भी बोलते हैं राधाष्टमी वाले दिन होगा जिसके साथ ही मणिमहेश की यात्रा समाप्त हो जायेगी हिमाचल के अलावा बाकि सभी राज्यों से जो भी भक्त पहली बार श्री मणिमहेश कैलाश यात्रा में आना चाहते हैं उन्हें सबसे पहले पठानकोट (पंजाब) के रेलवे स्टेशन या बस अड्डे तक आना भले आप पठानकोट ट्रेन से आए, भले बस से या फिर अपने वाहन से। पठानकोट में हिमाचल, पंजाब और जम्मू कश्मीर तीन राज्यों का बार्डर है। पठानकोट से फिर आपको हिमाचल प्रदेश में चम्बा जिला की तरफ प्रस्थान करना है पठानकोट से चम्बा की दूरी मात्र 120 किलोमीटर की है। चम्बा पहुँचकर आप चाहें तो वहाँ के सुन्दर दृश्यों और प्राचीन लक्ष्मी नारायण मंदिर के दर्शन कर आप वहाँ भी कुछ समय आराम कर सकते हैं। फिर आपको चम्बा से भरमौर की ओर रवाना होना है चम्बा से भरमौर की दूरी केवल 60 किलोमीटर की है। भरमौर से 10 किलोमीटर पहले मार्ग में आएगा “खडामुख” जहाँ से आपको श्री मणिमहेश कैलाश के प्रथम दर्शन होंगे। फिर आप पहुंच जाते हो भरमौर में भगवान धर्मराज जी की नगरी में, यहाँ पहुँचकर सबसे पहले आपको माता भरमाणी जी के दर्शनोंके लिए जाना होगा जो भरमौर से केवल 4 किलोमीटर है, भरमौर से आपको माता भरमाणी जी के मंदिर के लिए प्राईवेट वाहन मिल जाएंगे, फिर भरमौर में आपको चौरासी मंदिर के दर्शन करने होते हैं किंतु चौरासी मंदिर के दर्शन आप चाहो तो श्री मणिमहेश कैलाश यात्रा से पहले कीजिए या बाद में वापसी में लेकिन दर्शन जरूर करें जी क्योंकि यह इस धरती पर वह पवित्र स्थान है जहाँ विश्व में केवल यही एक स्थान है जहाँ धर्मराज जी निवास करते हैं और उनके साथ चित्रगुप्त जी भी। वैसे वापसी में अगर आप दर्शन करते हैं तो ठीक रहेगा क्योंकि श्री मणिमहेश कैलाश यात्रा के दरम्यान यहाँ मेले भी लगते हैं और इन मेलों में आप अपने परिवार के लिए भी यहाँ से कुछ ले जा सकते हैं उसके बाद आपको भरमौर से हडसर की ओर रवाना होना है जिसकी दूरी भरमौर से केवल 12 किलोमीटर की है। अपने वाहन से जाते हो तो ठीक है अगर बस से जाते हो तो यहाँ से आपको प्राईवेट वाहन मिल जाएंगे। हडसर से आपकी पैदल यात्रा शुरू हो जाती है, आपकी सुविधाओं के लिए यहाँ घोडे- पालकी और पिठ्ठू भी मिल जाते हैं और अगर आप हेलीकॉप्टर से जाना चाहो जिसका इस बार का एक तरफ का किराया 2900 रूपए किया गया है तो आपको हेलीकॉप्टर की सुविधा भरमौर से ही मिलेगी, भरमौर से गौरीकुण्ड गोंठ तक आपको हेलीकॉप्टर ले जाएगा फिर गौरीकुण्ड से श्री शिव कुण्ड की दूरी केवल 700 मीटर की रह जाती है जो पैदल 15 मिनट से 30 मिनट् का मार्ग है। हडसर से श्री शिव कुण्ड की दूरी केवल 12 किलोमीटर की है और उँचाई 13500 फुट की। यात्रा के दरम्यान धन्छो के झरने के दर्शन और शिव के घराटों की आवाजें सूनना न भूलें। पैदल यात्रा के दरम्यान आपको श्री मणिमहेश कैलाश पर्वत के प्रथम दर्शन गौरीकुण्ड से होते हैं। गौरीकुण्ड से मणिमहेश झील की दूरी केवल 1 किलोमीटर की है। झील में स्नान करने के बाद जो भी आपकी श्रद्धा होती है वह आप वहीं चढा देते हैं और फिर बादलों से घिरा हुआ कैलाश पर्वत कब खुलता है इसकी आपको भगवान श्री शिव शक्ति जी से प्रार्थना और उनके चरणों में सच्चे मन से ध्यान लगाना पडता है और फिर जब कैलाश पर्वत के दर्शन आपकी आँखों के सामने होते हैं उसकी व्याख्या हम नहीँ कर सकते हैं वहाँ पर किसको क्या और कैसे दर्शन भगवान शिव शक्ति जी देते हैं यह तो वह जानते हैं और दर्शन पाने वाले भक्त ..विश्व में सूर्योदय की लालिमा की जगह नीलिमा केवल यहीं देखने को मिलती है। इतनी जानकारी जान लेने के बाद भी अगर मन में कोई किसी बात का संदेह हो तो आप हमसे संपर्क कर सकते हैं। एक महत्वपूर्ण बात और है कि यात्रा पर जाते समय यह सामान अपने साथ ले जाना न भूलें  गर्म कपडे, वर्षा से बचने के लिए छाता या बरसाती, हो सके तो एक रात गौरीकुण्ड में या फिर श्री शिव कुण्ड में जरूर बिताएं। शायद श्री शिव शक्ति जी की कृपा से आपको रात्रि में मणि दर्शन हो जाएं।

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