सेबी की सख्तीः एक कंपनी के खिलाफ रिकवरी की कार्रवाई

इंदौर, अमित जैन : सेबी की सख्तीः एक कंपनी के खिलाफ रिकवरी की कार्रवाई। शेयर-कमोडिटी बाजार से मोटे मुनाफे का लालच देकर लोगों से मोटी फीस वसूलने वाली शहर की एडवायजरी कंपनियों पर सेबी की सख्ती शुरू हो गई है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने शहर की एक कंपनी के खिलाफ रिकवरी की कार्रवाई शुरू कर दी है। तकरीबन 15 अन्य कंपनियों के खिलाफ शिकायतों की जांच भी शुरू हो गई है। पलासिया क्षेत्र में कॉमर्स हाउस स्थित कैप विजन नामक कंपनी के खिलाफ सेबी ने रिकवरी आदेश जारी किया है। खाते फ्रीज कर दिए गए हैं। कंपनी पर बिना रजिस्ट्रेशन के कामकाज करने व निवेशकों से पैसा वसूलने के मामले में कार्रवाई की गई है। सेबी द्वारा आंतरिक जांच में इस बात का पता चला था। असल में कंपनी ने सेबी रजिस्ट्रेशन लेने से पहले ही कामकाज शुरू कर दिया था। निवेश सलाह के नाम पर तमाम लोगों से मोटी फीस बी वसूल ली थी। ऑडिट में सेबी ने पकड़ लिया था। इसके बाद कंपनी पर 75 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया था। 45 दिन में जुर्माने की राशि जमा करने का आदेश दिया गया था। हालांकि कंपनी ने उसका पालन नहीं किया। इसके बाद रिकवरी आदेश जारी करते हुए सेबी ने वसूली प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। गौरतलब है कि निवेश सलाह देने वाली ऐसी कंपनियों के मामले में इंदौर देश में नंबर वन बन चुका है। बीते दिनों डेटा चोरी के मामले में पुलिस भी ऐसी तमाम कंपनियों पर जांच और कार्रवाई कर चुकी है। फ्रेंचाइजी देने वालों के लाइसेंस खतरे में। सेबी की सख्ती के बाद बीते महीनों से शहर में मौजूद अनरजिस्टर्ड कंपनियों की संख्या अचानक आधी से भी कम हो गई है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि कार्रवाई से बचने के लिए बिना रजिस्ट्रेशन काम कर रही ऐसी तमाम कंपनियों ने बीच का रास्ता निकाला। रजिस्टर्ड कंपनियों से इन्होंने उनके लाइसेंस और नाम को फ्रेंचाइजी के तौर पर किराए पर ले लिया। बदले में फ्रेंचाइजी देने वाली कंपनियां हर महीने 50 हजार से 5 लाख रुपए तक किराए या फीस के तौर पर वसूल रही है। नियमानुसार सेबी के रजिस्ट्रेशन पर फ्रेंचाइजी या किराए पर नहीं दिया जा सकता। अंदरूनी तौर पर ऐसी कंपनियों का सर्वे और जांच शुरू हो गई है। कई कंपनियों ने शहर में ही 20 से ज्यादा अनरजिस्टर्ड कंपनियों को फ्रेंचाइजी के तौर पर अपना नाम उपयोग करने की अनुमति दे दी है। कैप विजन के साथ कैपिटल लाइफ, प्रॉफिट गुरु, इंवेस्टमेंट वाइजर, कैपिटल वेज, कैपिटल काऊ, मनीडिजायर, रिसर्च इनफ्रोटेक, स्मार्ट मनी, स्टार वर्ल्ड रिसर्च, वेज-टू स्टार जैसे तमाम कंपनियों के नाम एक से ज्यादा किराए पर दिए जाने की शिकायतn सेबी तक पहुंची है। सूत्रों के मुताबिक सबसे ज्यादा फ्रेंचाइजी वाली कंपनियां विजय नगर और पीयू-4 क्षेत्र से चलाई जा रही है। सेबी जांच के बाद ऐसी तमाम कंपनियों के लाइसेंस निरस्त करने की तैयारी में है। फ्रेंचाइजी के नाम पर सर्विस टैक्स, इनकम टैक्स और पीएफ चोरी के बिंदु पर जांच की जा रही है। नहीं चलेगी कर्मचारी की आड़ । फ्रेंचाइजी के पक्ष में कंपनियों द्वारा दिए जा रहे तर्क सेबी ने खारिज कर दिए हैं। सेबी के रेग्युलेशन में किसी भी तरह की फ्रेंचाइजी नहीं दी जा सकती। गड़बड़ी पाए जाने पर बजाय फ्रेंचाइजी लेने वाली कंपनी के सेबी नाम किराए पर देने वाली रजिस्टर्ड कंपनी पर कार्रवाई करेगा। अब तक ये कंपनियां कार्रवाई से बचने के लिए गलत सलाह देने वाले या फिर नियम तोड़ने वाले कर्मचारी के नौकरी छोड़ने का बहाना बनाकर बचने की कोशिश करती रही हैं। सेबी ने बीते सप्ताह हुई बैठक कंपनी संचालकों को साफ कर दिया है कि कर्मचारी के निकालने पर भी कार्रवाई कंपनी पर ही होगी। सेबी ने चार एडवाइजरी कंपनियों पर की कार्रवाई। महाराष्ट्र के निवेशकों से वसूले लाखों, सेबी। पहुंची जांच करन। तीन चिटफंड कंपनियों पर सेबी ने लगाया प्रतिबंध। निवेश सलाह पर सेबी सख्त, शहर की सवा सौ से ज्यादा कंपनियों पर संकट। सभी ट्रेडरो से निवेदन है कि किसी भी कंपनी को एडवांस मे एक भी रूपये का भुगतान न करे…मुनाफे के बाद ही भुगतान करें….

 

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