टीबी रोगियों की अब 2 दिन की जगह 15 मिनट में होगी…

मुंबई, नजीर मुलाणी : टीबी रोगियों की अब दो दिन की जगह 15 मिनट में होगी पहचान, देश में टीबी मुक्ति की बारां से हुई शुरुआत मुंबई/वसई कभी टीबी (ट्यूबरोलोसिस) से जान गंवाने के कारण सुर्खियों में रहा बारां अब इसके उन्मूलन को लेकर पूरे देश में पहचाना जाएगा। शुक्रवार को मुंबई की निजी कंपनी ने सीएसआर के तहत बारां में साॅफ्टवेयर लगाया है। इसकी मदद से 15 मिनट में टीबी की बीमारी की पहचान हो सकेगी। इसके अाधार पर मरीज को आवश्यक दवा देकर स्वस्थ किया जाएगा। देश को 2025 तक टीबी मुक्त करने के मिशन की बारां से शुरुआत हुई है। देश में हर साल बढ़ रहे टीबी के रोगियों को लेकर पीएम मोदी ने 2025 तक देश को टीबी रोग से मुक्त करने का निर्णय लिया है। केंद्र सरकार ने टीबी के मरीजों की पहचान के लिए मुंबई की फ्रेक्टर इनलेटिक्स को सीएसआर के तहत नया साॅफ्टवेयर लगाकर मरीजों की पहचान करने की जिम्मेदारी सौंपी है। इसके लिए देश के 712 जिलों में से पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर बारां का चयन कर शुक्रवार को लेबोरेट्री में कम्प्यूटर कक्ष में साॅफ्टवेयर को अपडेट किया है। ऐसे में बारां में यह प्रयोग सफल होने पर देश के सभी 712 जिलों में इस साॅफ्टवेयर का लगाया जाएगा। इससे जिले के 9 सीएचसी को डिजिटल एक्स-रे कक्ष से जोड़ा जाएगा। इसके बाद जिला मुख्यालय से सभी जगह पर इसका प्रभावी अवलोकन किया जाएगा। ऐसे में कंपनी की ओर से कुछ दिन बाद इसके लिए जिले के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी, सीएचसी प्रभारी व सभी 9 सीएचसी के रेडियोलॉजिस्ट को कलेक्टर की मौजूदगी में डेमो के माध्यम से जानकारी दी जाएगी। इस दौरान साॅफ्टवेयर अपलोड करने के दौरान सीएमएचओ डॉ.संपतराज नागर, पीएमओ डॉ. एसके मालव, जिला क्षय अधिकारी डॉ. केके गुप्ता व साॅफ्टवेयर कंपनी के उपाध्यक्ष अमित खरे भी मौजूद रहे। बारां. जिला अस्पताल स्थित लैब में टीबी रोगियों के लिए कंप्यूटर में नया सॉफ्टवेयर लोड करते कंपनी की प्रतिनिधि। फ्रेक्टर कंपनी के साॅफ्टवेयर वैज्ञानिक अंकित मोदी ने बताया कि इस साॅफ्टवेयर के माध्यम से एक्स-रे के लिए आने वाले मरीज की टीबी की बीमारी की जल्द पहचान होने के बाद रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने के बाद भी चिकित्सक द्वारा मिलने वाली कंम्प्यूटर रिपोर्ट के आधार पर भी उसका ईलाज शुरू हो जाएगा। पहले मरीज को एक्स-रे कराने के बाद दो दिन बाद रिपोर्ट मिलने के बाद उसका ईलाज शुरू हो पाता था। इसमें डेढ़ लाख तक मरीजों के डाटा को एक साथ देखा जा सकेगा। जबकि बगैर सॉफ्टवेयर के अधिक संख्या में मरीजों के डाटा को नहीं देखा जा सकता था। प्रधानमंत्री के विजन 2025 तक देश काे टीबी रोग से मुक्त करने के लिए सीएसआर के तहत मुंबई की कंपनी ने बनाया है साॅफ्टवेयर, देश में हर रोज 1000 मरीज आ रहे सामने: देश में वर्तमान में 27 लाख लोग टीबी से ग्रसित हैं। रोजाना करीब 1 हजार मरीज रोजाना इस बीमारी के सामने आते हैं। टीबी रोग की जल्द पहचान करने के साथ ही चंद मिनट में उपचार शुरू करने के लिए साॅफ्टवेयर ईजाद कर इसे डिजिटल एक्सरे से जोड़ने की शुरुआत की गई। इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से टीबी रोग के साथ क्रेबीटी, फाइट्रोसे केल्सीफिकेशल, बल्टडेड समेत 12 प्रकार की बीमारियों की भी तुरंत जानकारी मिल सकेगी। शाहाबाद में एक्स-रे बारां से बता देंगे टीबी है या नहीं, जिला क्षयरोग अधिकारी ने इस संबंध में बताया कि जिला अस्पताल से 9 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को जोड़ा जा रहा है। वहां पर सीने का एक्स-रे होने पर यहां से साॅफ्टवेयर मरीज की रीडिंग कर उसके टीबी होने या नहीं होने की जानकारी दे देगा। यानी 80 किमी दूर शाहाबाद अस्पताल में एक्स-रे करवाया जाता है तो बारां क्षय रोग अस्पताल से बता दिया जाएगा कि संबंधित मरीज को टीबी है या नहीं। जिले में हैं टीबी के 1500 मरीज जिला क्षयरोग अधिकारी डॉ. केके गुप्ता ने बताया कि जिले में वर्तमान में टीबी के 15 सौ मरीज चिन्हित हैं लेकिन फिर भी कई मरीज जांच के बाद भी छूट जाते थे। ऐसे में अब केंद्र सरकार की ओर से नए साॅफ्टवेयर के माध्यम से सभी टीबी के मरीजों की पहचान हाेने के बाद उनका सुगमता के साथ ईलाज शुरू हो जाएगा। इस तकनीक के माध्यम से 2025 तक टीबी मुक्त भारत अभियान को सफल करने में अहम भूमिका होगी। नीति आयोग की ओर से बारां जिले को अति महत्वाकांक्षी जिलों में शामिल किया गया है। इसको लेकर शुक्रवार को मुंबई की एक साॅफ्टवेयर कंपनी की ओर से टीबी के मरीजों की पहचान के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस साॅफ्टवेयर अपडेट किया गया है। इससे जिले का एक भी टीबी मरीज जांच से नहीं छूटेगा। इससे जिले के टीबी के मरीजों को खासा लाभ मिलेगा। डॉ. संपतराज नागर सीएमएचओ!

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