नज़रिया: अफसोस है कि, चौपाल के बाद भी नहीं सुधरे हालात

कौशाम्बी, चंद्रा भा :  प्रदेश सरकार की अति महत्वाकांक्षी अंत्योदय ग्राम समग्र विकास योजना जनपद में कितनी फलीभूत हो रही है इसका अंदाजा चयनित गांवों को देखकर आसानी से लगाया जा सकता है। हालत यह है कि योजना के तहत यहां चयनित किए गांवों में विकास कार्य धरातल पर काम बल्कि कागजों पर ही अधिक हो रहे हैं। जी हाँ, इसका प्रत्यक्ष प्रमाण मंझनपुर ब्लाक क्षेत्र का अंत्योदय ग्राम ओसा है जो विकास में अब भी पूरी तरह फेल साबित होकर रह गया है। जिसके कारण बुनियादी समस्याएं घटने के बजाय नासूर बनती जा रही हैं। आलम यह  है कि इस गांव में नाली, सड़क, पेयजल, शौचालय, बिजली, राशन कार्ड सहित अनेक समस्याएं इस कदर व्याप्त हैं कि लोगों के लिए परेशानी कम होने के बजाय बढ़ती ही चली जा रही है। अंत्योदय गांव चयनित होने के बाद भी कुछ नहीं बदला। बताते चलें कि जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा द्वारा इस गांव में चौपाल लगाकर बुनियादी समस्याआ के समाधान कराने के साथ ही विकास को गति प्रदान करने के अधिकारियों के निर्देश के बावजूद भी ग्राम प्रधान व प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा अब तक शायद ही कुछ धरातल पर किया गया हो। गांव के श्रीकेशन मास्टर ने कहा कि विधायक लालबहादुर सांसद बिनोद सोनकर सहित कई भाजपा नेता कुछ महीने ही एक शादी समारोह में शामिल होने गांव मे आये थे। कीचड़ भरे रास्ते से उनकी गाड़ी गुजरी थी लेकिन क्या कहे। जन प्रतिनिधियों के उदासीन पूर्ण रवैये के कारण अंत्योदय गांव होने के बावजूद भी इस गांव में सड़क, बिजली, पेयजल, शौचालय आवास आदि के लिए लोगों को जुझना पड़ रहा है किंतु धरातल पर कोई भी विकास कार्य नहीं दिख रहा है। युवा संदीप तिवारी ने बताया कि इस गांव आजादी के बाद से ही सभी विद्युत तार जर्जर हो गए हैं नतीजा आये दिन बिजली बाधित रहती है किंतु इन्हें बदलने की दिशा में कोई भी कार्य अब तक नहीं किया जाना काफी दुर्भाग्यपूर्ण है। जिलाधिकारी के आदेश के बाद भी बिजली विभाग किसी बड़े दुर्घटना का इतंजार मे है। पंडित दीनदयाल योजना में भी भ्रष्टाचार व्याप्त है यहां पैसा मिला वहां पहले लगा दिया। कई मोहल्लों में खंभे पड़े हैं लेकिन लगाने वाले गायब हैं गांव के ही पितंबर कोरी ने कहा की जिलाधिकारी साहब ने कह ही दिया था कि चौपाल लगने से साफ सफाई हो जाती है तब हो गई थी जब फिर लगेगी तब फिर होगी सबका साथ, सबका विकास,गांवों में नहीं दिख रहा है। सफाई व्यवस्था का आलम यह है कि दो सफाई कर्मी होने के बावजूद सफाई नहीं होती। कई जगह नालियो का पानी रास्ते से बह रहा है दोनो सफाईकर्मी क्यों नही आते जब इस बारे में प्रधानपति रामसुरेमन से बात की गई तो उन्होंने बताया कि एक सफाईकर्मी के यहा सम्बद्ध है। एक कभी कभार आता था अब कही ट्रांसफर करवा लिया है। गांव के लोगो ने बताया सांसद बिनोद सोनकर जी जब वोट लेना था तब आये थे और कहे थे नही आऊँगा नही तो जूता की माला पहनाकर गांव से वापस भेज देना तब से आज तक नही दिखे। लगता है 2019 में वो दिन आएगा।
जनप्रतिनिधियों व प्रशासनिक उपेक्षा के कारण अनेकानेक समस्याएं विकराल रूप लेती जा रही हैं। किंतु इनका समाधान कब तक होगा यह जानने के लिए खण्ड विकास अधिकारी व ग्राम पंचायत अधिकारी से जानने का प्रयास किया गया मगर साहब लोगों का मोबाईल बंद मिला।

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