भक्ति का प्रारंभ ही ईश्वर के प्रकाश रूप के दर्शन से होता है : साध्वी दीपिका भारती

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दिल्ली, अरविंद यादव : सतगुरु श्री आशुतोष महाराज जी के दिव्य मार्गदर्शन में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा पिछले छह दिवसों से दिल्ली के दिलशाद गार्डन क्षेत्र में भव्य श्री रामकथा का समागम चल रहा है। श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या कथाव्यास साध्वी सुश्री दीपिका भारती जी ने छटे दिवस के कथा प्रसंग में किष्किंधाकाण्ड तथा सुंदरकाण्ड का बड़े ही मार्मिक ढंग से वर्णन किया। कथाव्यास जी ने सुन्दरकाण्ड को भक्ति पथ की यात्रा बताते हुए उसमें छिपे भक्ति के विशिष्ट सूत्रों का श्रीराम द्वारा शबरी को दिये गये नवधा भक्ति के उपदेश के संग तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया। फिर समाज में भक्ति के नाम पर बढ़ते व्यवसाय एवं पाखंड पर प्रकाश डालते हुए कथाव्यास जी ने सच्चे गुरु की पहचान बताई उन्होंने कहा भक्ति का प्रारम्भ ही ईश्वर के प्रकाश रूप के दर्शन से होता है और जो गुरु आपको आपके घट के भीतर तत्क्षण ईश्वर का साक्षात्कार करवाए वही सच्चा गुरु है। सम्पूर्ण कथा के दौरान साध्वी जी ने रामायण में निहित विभिन्न दृष्टांतों के आध्यात्मिक रहस्यों को उजागर किया जिन्हें आज तक समाज ने केवल प्रश्नवाचक दृष्टि से ही देखा था। माँ अहिल्या का पत्थर से स्त्री बन जाना अस्त्रों शास्त्रों के पीछे का विज्ञान मन की गति से चलने वाले विमान इत्यादि का बड़ा ही वैज्ञानिक निरूपण प्रस्तुत किया गया। हनुमान जी का श्री राम व लक्षमण भैया को कांधे पर उठाने और समुद्र लांघ कर लंका पहुँच जाने जैसे कोन्सेप्ट्स के गर्भ में छिपी भारत की सनातन योग पद्धति का विवरण पतंजल योगदर्शन के आधार पर दिया गया। कथाव्यास जी ने कहा, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के प्रयासों से आज समाज में फिर से शास्त्रों को वही सम्माननीय स्थान प्राप्त हुआ है जो कभी ऋषि काल में हुआ करता था। गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी की अनुकंपा से ईश्वर की ज्योति के अंतर्जगत में दर्शन करने के बाद समाज के एक विस्तृत वर्ग का हृदय परिवर्तन हुआ है जो शास्त्रों में उल्लेखित सूक्तियों को अतिशयोक्ति ही समझते थे। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान श्री आशुतोष महाराज जी की अध्यक्षता में चल रही एक सामाजिक आध्यात्मिक संस्था है जिसका ध्येय है आध्यात्मिक जागृति द्वारा विश्व में शांति की स्थापना करना। इसी हेतु संस्थान द्वारा देश भर में समाज कल्याण के प्रकल्प चलाये जा रहे हैं। नशा मुक्ति के लिए बोध प्रकल्प, अभावग्रस्त बच्चों की शिक्षार्थ मंथन प्रकल्प, महिलाओं के सशक्तिकरण हेतु संतुलन प्रकल्प, पर्यावरण संरक्षण हेतु संरक्षण प्रकल्प, गो संरक्षण, संवर्धन एवं नस्ल सुधार हेतु कामधेनु प्रकल्प, समाज के सम्पूर्ण स्वष्ट्य हेतु आरग्य प्रकल्प, आपदा प्रबंधन हेतु समाधान प्रकल्प तथा नेत्रहीनों, अपाहिजों के सशक्तिकरण हेतु अंतर्दृशी के साथ साथ जेल के कैदी बंधुओं के लिए अंतरक्रांति प्रकल्प इत्यादि। कथा प्रांगण में इन प्रकल्पों में चलते प्रयासों की फोटो प्रदर्शनी के साथ साथ अभावग्रस्त वर्ग तथा विकलांगों, अपाहिजों, नेत्रहीनों और जेल के कैदियों द्वारा बनाए गयी सामाग्री जैसे की हर्बल साबुन, हीना, मोमबत्तियों इत्यादि के भी स्टॉल लगाए गए हैं। साथ ही संस्थान की आयुर्वेदिक फार्मेसी में बनाई गयी दवाइयाँ तथा देसी गाय का गोमूत्र घृत इत्यादि भी स्टालों पर उपलब्ध है।

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