जब तक प्रत्येक व्यक्ति आत्मिक स्तर पर जागृत नहीं होगा, वह समाज का कल्याण नहीं कर सकता : साध्वी दीपिका भारती

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दिल्ली, अरविंद यादव : दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा श्री आशुतोष महाराज जी के दिव्य मार्ग दर्शन में दिल्ली के दिलशाद गार्डन में सात दिवसीय भव्य श्री रामकथा का वाचन चल रहा है। कथा के चतुर्थ्य दिवस पर श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या कथाव्यास साध्वी सुश्री दीपिका भारती जी ने रामायण के पुष्प वाटिका प्रसंग को समाज द्वारा वीभत्स रूप से दर्शाने का विरोध किया और उसमें निहित दिव्य रहस्य को प्रभु प्रेम, divine love की संज्ञा देते हुए प्रतिपादित किया। अपने प्रवचनों में greek philosopher plato के वक्तव्य, “every soul bears the character of god” को दोहराते हुए भक्ति को प्रभु प्रेम की पराकाष्ठा बताया। गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी के कृपा हस्त तले ब्रह्मज्ञान आधारित ब्रेन अकेकनिंग द्वारा आज लाखों युवाओं तथा पाश्चात्य संस्कृति से प्रभावित आधुनिक वर्ग का भारतीयकरण तथा अध्यात्मिकरण हुआ है। वर्तमान समाज की मुख्यधारा में रहते हुए भी वेद कालीन जीवनशैली जी रहे ऐसे हजारों सेवादार व कार्यकर्ता कथा प्रांगण में अपनी अपनी सेवाओं में संलग्न दिखते हैं। मंच पर आसीन युवा साधू एवं साध्वी संगीतज्ञों को भक्ति रचनाओं का गायन करते देख ऐसा प्रतीत होता है मानो भारत पुनः ऋषियों की धरती बन गया हो। श्रीराम कथा के व्याख्यान से अपने गुरुदेव की सभ्य समाज की रचना की विचारधारा को प्रतिपादित करते हुए कथाव्यास जी ने धनुष यज्ञ के रहस्य को उद्घाटित किया उन्होंने कहा भगवान शिव का धनुष प्रत्येक युग में अभिमान का नाश करने का विहंगम कार्य करता है उन्होंने सीता स्वयंवर में उपस्थित राजाओं को भ्रष्टाचारी बताते हुए कहा सत्ताधारी के भीतर जब जब स्वाभिमान की जगह अभिमान ले लेता है तो वह भ्रष्ट हो जाता है स्वाभिमान का अर्थ है प्रत्येक जन में प्रभु की ही आत्मा को देखना जब तक सत्ता में बैठा अधिकारी आत्मिक स्तर पर जागृत नहीं होगा वह समाज का कल्याण नहीं कर सकता वह तो स्व कल्याण ही करता रह जाता है। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान श्री आशुतोष महाराज जी की अध्यक्षता में चल रही एक सामाजिक आध्यात्मिक संस्था है जिसका ध्येय है आध्यात्मिक जागृति द्वारा विश्व में शांति की स्थापना करना। इसी हेतु संस्थान द्वारा देश भर में समाज कल्याण के प्रकल्प चलाये जा रहे हैं नशा मुक्ति के लिए बोध प्रकल्प, अभावग्रस्त बच्चों की शिक्षार्थ मंथन प्रकल्प महिलाओं के सशक्तिकरण हेतु संतुलन प्रकल्प पर्यावरण संरक्षण हेतु संरक्षण प्रकल्प, गो संरक्षण, संवर्धन एवं नस्ल सुधार हेतु कामधेनु प्रकल्प, समाज के सम्पूर्ण स्वष्ट्य हेतु आरग्य प्रकल्प, आपदा प्रबंधन हेतु समाधान प्रकल्प तथा नेत्रहीनों, अपाहिजों के सशक्तिकरण हेतु अंतर्दृशी के साथ साथ जेल के कैदी बंधुओं के लिए अंतरक्रांति प्रकल्प इत्यादि।

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