नास्तिक मात्र वहीं नहीं जो ईश्वर को मानता नहीं। “नास्तिक वह भी है जो ईश्वर को मानता है, पर ईश्वर को जानता नहीं है” : साध्वी दीपिका भारती

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दिल्ली, अरविंद यादव : दिल्ली के शाहदरा क्षेत्र में श्री आशुतोष महाराज जी के दिव्य मार्ग दर्शन में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा आयोजित श्री रामकथा को वांचती कथाव्यास साध्वी दीपिका भारती जी ने अवध एवं लंका का तुलनात्मक विश्लेषण करते हुए बताया जहाँ श्रीराम तत्व का जागरण हो जाता है वह स्थान अवध्य हो जाता है फिर उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता यह घटना मात्र समष्टि में ही नहीं अपितु व्यष्टि के स्तर पर भी घटती है। दशानन रावण को दीमक की संज्ञा देते हुए कथाव्यास जी ने रावण की आतंकवादी गतिविधियों का नक्शा लंका से लेकर त्रिशिरापल्ली जनस्थान दंडकारण्य से होता हुआ चित्रकूट तक बताया।उन्होंने कहा असुराधिपति रावण साधारण जन मानस को आतंकित करके उन्हें असुर बनने पर विवश करता था गौ वध, नारियों का शोषण, ऋषि मुनियों पर अत्याचार, रावण की आतंकवादी गतिविधियों के कुछ पहलू हैं। त्रेता युग के ऐसे परिवेश में जन मानस ही नहीं अपितु सम्पूर्ण वसुंधरा त्राहि मां कर उठी। कथाव्यास जी ने कहा ऐसा वातावरण हर युग में बनता है और फिर परमात्मा स्वयं शरीर धारण करके जन साधारण की पीर को हरने के लिए अवतरित होता है। वर्तमान समाज में बढ़ रही हिंसा अपराध रोष आपसी भेदभाव नारी शोषण भेदभाव के विषयों पर प्रकाश डालते हुए साध्वी जी ने कहा आज फिर से हम युग परिवर्तन के एक ऐसे ही दौर से गुज़र रहे हैं। जहां जन जन के हृदय में श्रीराम तत्व का अवतरण अर्थात जागरण होना अनिवार्य हो गया है। श्री राम तत्व के जागरण को आस्तिकता का आधार बताते हुए साध्वी जी ने समाज में व्याप्त पाखंडों का खंडन किया और कहा “नास्तिक मात्र वही नहीं, जो ईश्वर को नहीं मानता, नास्तिक वह भी है जो ईश्वर को मानता है, पर ईश्वर को जानता नहीं है” कथाव्यास जी ने ईश्वर दर्शन का व्याख्यान करते हुए स्वामी विवेकानंद की कथनी को दोहरायाए “If there is god we must see him, if there is soul we must perceive it, otherwise its better to be an atheist than being a hypocrite”. साध्वी जी ने कहा श्री आशुतोष महाराज जी समय के पूर्ण सतगुरु हैं और आध्यात्मिक जागरण के सनातन विज्ञान ब्रह्मज्ञान द्वारा जन जन में इसी राम तत्व को जागृत कर रहे हैं। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान ऐसे ही विशिष्ट मानवों का संगठन है जिनके भीतर श्रीराम के प्रकाश स्वरूप या ज्योति स्वरूप का जागरण हुआ है।

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