प्रधानमंत्री मोदी की ‘कौशल विकास योजना’ भी हुई नाकाम, ट्रेनिंग लेकर भी ‘बेरोजगार’ घूम रहे 35 लाख लोग

मुंबई, राजू सोनी : मोदी सरकार रोज़गार के मुद्दे पर पूरी तरह नाकामयाब दिखाई दे रही है। इस संबंध में सरकार की अपनी योजनाएं भी कामयाब नहीं हो पाई है। सरकार की कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) भी रोज़गार को लेकर बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाई। मतलब सिर्फ 15 प्रतिशत लोगों को नौकरियां मिल पाई और बाकी सब बेरोज़गार ही रहे। ऐसा प्रदर्शन तब है जब योजना पर 12000 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। इस योजना के अंतर्गत, पिछले तीन वर्षों में 41.3 लाख लोगों को प्रशिक्षित किया गया है। लेकिन नौकरियां केवल 6.15 लाख लोगों को मिलीं। ये बात इस साल 28 मार्च को राज्यसभा में कौशल विकास मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने एक सवाल के जवाब में बताई। इस योजना की शुरुआत 2015 में हुई थी। कार्यक्रम का उद्देश्य “उद्योग-प्रासंगिक कौशल प्रशिक्षण प्रदान करना है जो उन्हें बेहतर आजीविका हासिल करने में मदद करेगा”। एक करोड़ युवाओं को प्रशिक्षण देने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य चार साल, 2016 से 2020 तक तय किया गया था। यह योजना 485 जिलों में फैले 500 से अधिक कौशल विकास केंद्रों के माध्यम से लागू की जा रही। इलेक्ट्रॉनिक्स और हार्डवेयर, परिधान, सौंदर्य और कल्याण, कृषि, खुदरा, रसद, चमड़ा, दूरसंचार, सुरक्षा, कपड़ा और हैंडलूम इत्यादि क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। उद्योग के साथ साझेदारी के तहत, इसका उपयोग समन्वय के लिए डिजिटल पोर्टलों की पृष्ठभूमि डेटा है जिस पर राज्य या उद्योग को कितने कुशल लोग (‘कौशल अंतर’) की आवश्यकता होती है, उसे वह कौशल इस योजना के जरिए उपलब्ध कराना था। बर्बाद रही योजना दरअसल, यहाँ भी ‘गुड गवर्नेंस’ की बात करने वाली मोदी सरकार योजना को सही से नहीं चला सकी। योजना का नाम तो कौशल विकास रखा गया लेकिन प्रशिक्षण के लिए ज़िम्मेदारी निजी संस्थाओं को दी गई। उनके काम का कोई ट्रैक नहीं रखा गया था। पकोड़ा बेचने की सलाह को ‘स्वयं रोज़गार’ से जोड़ने वाली सरकार यहाँ स्वयं रोज़गार भी नहीं पैदा कर पाई। राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) के मुताबिक, पीएमकेवीवाई में प्रशिक्षण में से केवल 24 प्रतिशत  ही अपने कारोबार स्थापित कर पाए। कौशल विकास मंत्रालय के संयुक्त सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार, पीएमकेवीवाई के तहत प्रशिक्षित सभी लोगों में से केवल 10,000 ने स्वयं को रोजगार के लिए मुद्रा ऋण के लिए आवेदन किया था।

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