ऐम्बुलेंस हादसे में नहीं बचा गर्भवती महिला का 8 महीने का भ्रूण, ड्राइवर पर मामला दर्ज

मुंबई, नजीर मुलाणी : मुंबई के ईस्टर्न एक्सप्रेस हाइवे पर हुए सड़क हादसे में एक महिला का 8 महीने का भ्रूण नुकसान हो गया। दरअसल महिला को जिस ऐम्बुलेंस के जरिए अस्पताल ले जाया जा रहा था। उसके दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण यह दु:खद हादसा हुआ है। इस हादसे में महिला की हालत भी नाजुक बताई जा रही है  उधर पुलिस ने ऐम्बुलेंस के ड्राइवर के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है पुलिस का कहना है कि ऐम्बुलेंस का ड्राइवर नींद में था और वह गाड़ी पर संतुलन नहीं बना पाया।  महाराष्ट्र के मालेगांव के नया इस्लामपुर के रहने वाले पीड़ित परिवार के मुताबिक आठ महीने की गर्भवती तनकिला अहमद (40) का इलाज स्थानीय सिविल अस्पताल में चल रहा था  बाद में दिक्कत बढ़ने पर डॉक्टरों ने मुंबई के जेजे अस्पताल जाने का सुझाव दिया। रविवार दोपहर करीब 12:45 बजे गर्भवती महिला के साथ परिवार मुंबई के लिए रवाना हुआ। पुलिस का अनुमान है कि रात भर जगने के कारण ड्राइवर को अचानक नींद आ गई होगी और गाड़ी अनियंत्रित हो गई  राहत कार्य में जुटी पुलिस और क्षेत्रीय आपदा प्रबंधन टीम की मदद से बुरी तरह से क्षतिग्रस्त ऐम्बुलेंस से परिवार के सभी सदस्यों को बाहर निकाला गया। इसके बाद एक और ऐम्बुलेंस बुलाकर उन्हें घाटकोपर स्थित राजावाड़ी अस्पताल में पहुंचाया गया। अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विद्या ठाकुर के मुताबिक 6 लोगों को अस्पताल लाया गया था। इनमें एक गर्भवती महिला भी शामिल है शुरुआत में महिला को अस्पताल के आईसीयू में रखा गया था। गर्भवती महिला बेहोश थी और हांफते हुए सांस ले रही थी। उसे बेहतर इलाज की जरूरत थी इसलिए हमने तुरंत सायन अस्पताल भेज दिया। दुर्घटना के शिकार हुए लोगों में से फिलहाल 3 लोग अस्पताल में हैं और उनकी स्थिति खतरे से बाहर है. बता दें कि घायलों में अकील अहमद (33), मुस्ताक अहमद (40), सनकिला अहमद (40), शकूर शेख (50), अलिदा अब्दुल (65) और मुहम्मद शबाब (18) शामिल हैं। अधिकतर मामलों में घायलों को शरीर के बाहरी हिस्से पर चोटें आई हैं. उधर सायन अस्पताल के एक डॉक्टर ने कहा कि गर्भवती महिला को वेंटिलेटर पर रखा गया है। गर्भ को नहीं बचाया जा सका. महिला की भी स्थिति गंभीर है। उनकी स्थिति को देखते हुए हम आगे निर्णय लेंगे कि खराब हुए भ्रूण का क्या करना है। दरअसल, महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए अभी भ्रूण को निकाला नहीं गया है। स्त्रीरोग विभाग के प्रोफेसर डॉ.अरुण नायक का कहना है कि जब तक कोई जटिल स्थिति पैदा न हो। मृत भ्रूण को गर्भाशय में बने रहने में कोई दिक्कत नहीं है। चूंकि मरीज वेंटिलेटर पर है और ऐसे में उसे अतिरिक्त तनाव देना भी उचित नहीं होगा।

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