मानवाधिकार से हाथ बांधे, मैनुअल से पैर जकड़े.. फिर बोले- “जाओ महेंद्र, दंगा रोको” .. और आखिरकार महेंद्र चला गया..

बेल्लारी, जोगाराम चौधरी : एससी/एसटी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट ने संशोधन का फैसला सुनाया, जिसके खिलाफ देश के दलित संगठनों ने भारत बंद बुलाया। उस भारत बंद के दौरान आंदोलनकारियों ने आंदोलन के नाम पर अपने ही देश को जलाया, सड़कों पर उत्पात मचाया, राह चलते लोगों के साथ मारपीट की, यहां तक कि पुलिसथानों,चौकियों में आग लगाई, पुलिस टीम पर हमला किया गया, आंदोलन के नाम पर वो सब कुछ हुआ जो आक्रांताओं का काम होता है गुंडों का काम होता.है और इसी आंदोलन का शिकार राजस्थान की जोधपुर पुलिस के सब इंस्पेक्टर महेंद्र चौधरी हुए, जो इन तथाकथित आंदोलनकारियों के हमले में घायल हुए तथा बाद में हॉस्पिटल में उन्होंने दम तोड़ दिया। आखिर ऐसा क्यों हुआ कि फैसला सुप्रीम कोर्ट का था और जान समाज के रक्षक महेंद्र चौधरी की गई हमारे कानून ने महेंद्र चौधरी को रिवॉल्वर थमा दी लेकिन उनके हाथों में बेड़ियां डाल दीं, पैरों में जंजीरें डाल दीं, ऊपर से मानवाधिकार का दवाब डाल दिया तथा SI महेंद्र चौधरी को आदेश दिया कि महेंद्र! तुम जाओ, लोग दंगा कर रहे हैं, तुमको दंगा रोकना है। महेंद्र दंगा रोकने गया, तो महेंद्र पर ही हमला हुआ महेंद्र के हाथ में रिवॉल्वर थी लेकिन उनके हाथ बेड़ियों में जकड़े हुए थे। महेंद्र अपनी सुरक्षा के लिए अपनी आत्मरक्षा में भी रिवाल्वर का प्रयोग नहीं कर सकते थे। महेंद्र पिटते रहे लेकिन कानून की बेड़ियों में बंधे होने के कारण रिवॉल्वर होने के बाद भी वह अपना बचाव नहीं कर सके। महेंद्र दंगा रोकने गए और इस दुनिया से ही हमेशा के लिए चले गए.ये दास्तां है राजस्थान की जोधपुर पुलिस के जवान की जो वीरभूमि राजस्थान को दंगाइयों का शिकार होने से बचाने गया था। लेकिन अफसोस वो स्वयं को नहीं बचा सकता था. राजस्थान पुलिस के सिपाहियों के हालात ये हैं कि उन्हें देश में सबसे ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ता है। राजस्थान एक ऐसा प्रदेश है जहां आये दिन आंदोलन होते रहते हैं, कभी राजपूत आंदोलन, कभी जाट आंदोलन, कभी गुर्जर आंदोलन और हर बार इसका शिकार होता है राजस्थान पुलिस का वीर सिपाही.. कुछ भी हो लेकिन आखिरी गाज गिरती है राजस्थान पुलिस के जवानों पर। राजस्थान एक ऐसा राज्य है जिसकी सीमाएं पाकिस्तान से सटी हुई हैं जिसके कारण राजस्थान एक बेहद संवेदनशील राज्य माना जाता है तथा राजस्थान की पुलिस के जवान हमेशा से अलर्ट पर रहते हैं। ये पुलिस के जवान बहुत कम तनख्वाह पर अपने सर पर कफन बांधकर समाज की रक्षा के लिए हमेशा तैयार रहते हैं लेकिन इसके बाद भी राजस्थान पुलिस के वीर जवानों को मिलती है तो गालियाँ, राजनैतिक प्रताड़ना, नेताओं के दवाब, धोखा, धोखा और सिर्फ धोखा। इस बात का जवाब कौन देगा कि आखिर सब इंस्पेक्टर महेंद्र चौधरी की क्या गलती थी जो उनकी जान ली गई? सुप्रीम कोर्ट के फैसले में सब इंस्पेक्टर महेंद्र चौधरी का दोष था जो उन पर हमला किया गया और उनको जान गंवानी पड़ी. दुर्भाग्य की बात ये है कि पुलिस का जवान, राजस्थान पुलिस का जवान जिन लोगों की रक्षा करता है वो लोग खुद उन पुलिस के जवानों की पीड़ा को न आज तक समझे हैं और न समझने का प्रयास किया है कि कितनी बाधाओं, परेशानियों के बाद भी ये पुलिस के जवान आक्रांताओं के कहर से शहर को बचाते हैं, हमें बचाते हैं। लेकिन हम हमेशा इन सिपाहियों के खिलाफ रहते हैं। पुलिस के जवान दूसरों को न्याय दिलाते हैं लेकिन इन पुलिस के जवानों को ही न्याय नहीं मिलता। लेकिन जुल्म से जंग न्यूज़ हमेशा से पुलिस के वीर जवानों के साथ खड़ा रहा है और आगे भी खड़ा रहेगा तथा पुलिस के जवानों की समस्याओं को पूरी ताकत से सत्ता के सामने उठाता रहेगा और उम्मीद है कि सत्ता पुलिस की समस्याओं को उनकी भावनाओं को समझेगी तथा उन्हें न्याय मिलेगा। जुल्म से जंग चैनल राजस्थान की जोधपुर पुलिस के सब इंस्पेक्टर अमर शहीद महेंद्र चौधरी को नमन करता है तथा अश्रुपूरित श्रद्धांजलि समर्पित कर है।

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